शेर-ए-पंजाब की विरासत और फिरंगियों की चुनौती, जानिए क्यों पंजाब को गुलाम बनाना अंग्रेजों के लिए सबसे कठिन था। Maharaja Ranjit singh

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 06 May 2026, 11:12 AM | Updated: 06 May 2026, 11:12 AM

Maharaja Ranjit singh: जब आप भारत पर अंग्रेजी हुकुमत का इतिहास जानेंगे तो आपको समझ आयेगा कि अंग्रेज तो भारत केवल व्यापार के इरादे से आये थे, लेकिन यहां की संपददा देखकर उनके मन में लालच जाग गया.. और रही सही कसर यहां बंटी रियासतो ने पूरी कर दी.. इस्ट इंडिया कंपनी जिसे महारानी एजिलाबेथ ने 16वी सदी में स्थापित की थी, वो दुसरे देशों में व्यापार के लिए जाती थी, लेकिन भारत में उन्होंने देखा कि छोटे छोटे रियासतें आपस में ही सत्ता के लिए ल़ड़ रहे थे, ऐसे में अंग्रेज जो व्यापार करने आये थे. धीरे धीरे अपनी ताकत बढ़ाने लगे… जिसे यहां के शासको ने भी साथ दिया.. अंग्रेज आधुनिकता से लैस थे, जिनका इस्तेमाल उन लोगो ने भारत के राजे रजवाड़ो को लुभाने के लिए किया.. बदले में वो अंग्रेजो को यहां बसने में, व्यापार को बढ़ाने में मदद करने लगे..

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बंगाल के शासक सिराजुदौला और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच युद्ध

जिसके कारण अंग्रेजो ने व्यापार पर कब्जा कर लिया.. और तब शुरु हुआ भारतीयो को गुलाम बनाने का सफर.. 18वी सदी के मध्य में मुगल शासक पूरी तरह से खत्म हो गया.. और ईस्ट इंडिया कंपनी  को भारत में पैर जमाने का मौका मिला.. 1757 के आसपास पहली बार बंगाल के शासक सिराजुदौला और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच युद्ध हुआ और सिरजुद्दौला इस युद्ध में मारे गए.. और तब पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बंगाल से भारत पर राज करने की शुरुआत कर दी थी। लेकिन तमाम कोशिशो के बाद भी अंग्रेजी हुकुमत पंजाब पर कब्जा नही कर पाई थी, पंजाब पर कब्जा करने में अंग्रेजो को करीब 92 सालो का लंबा इंतजार करना पड़ा था। अपने इस वीडियो में हम जानेंगे कि ऐसा क्यों था। अंग्रेज पंजाब की तरफ बढ़ क्यों नहीं पा रहे थे।

पंजाब में अलग-अलग प्रभावशाली मिसल

1757 में जब अंग्रेजो ने बंगाल पर कब्जा किया तब इसके बाद वो लगातार आगे बढ़ते रहे औऱ 1764 तक बंगाल, बिहार और उड़ीसा पर उन लोगो ने शासन शुरु कर दिया। और धीरे धीरे दिल्ली की तरफ बढ़ने लगे..वहीं दूसरी तरफ से अंग्रेजो ने 1639 में ही मद्रास को अपना व्यापारिक केंद्र बना लिया था, जहां उन लोगो ने फोर्ट सैंट जॉर्द बनाया था, जो व्यापार के साथ साथ राजनीतिक रूप से भी प्रभावशाली होता गया। लेकिन तब भी पंजाब में अलग-अलग प्रभावशाली मिसल बंटे हुए थे, जिनके रहते पंजाब में एंट्री करना आसान नहीं था। अंग्रेज जानते थे कि सिखो की ताकत का कोई तोड़ नहीं है, इसलिए उनसे भिड़ने के बजाय इंतजार किया जाना चाहिए सही मौके का.. लेकिन तब उन्हें ये नही पता था कि उनता सामना शेर ए पंजाब से भी होगा.. जो अपने दरबार में अंग्रेजो को केवल चिढ़ाने के लिए बुलाते थे।

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अंग्रेज व्यापार के इरादे से तो महाराजा के दरबार जाते

1801 में महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब की गद्दी संभाली.. औऱ उन्होंने खालसा सेना का गठन कर दिया.. साथ ही पहली बार पूरे पंजाब को एकजुट करके सिख सम्राज्य का गठन कर दिया। उनकी सेना इतनी मजबूत थी..गोरिल्ला युद्ध कौशल में पारांगत, सेना में हरि सिंह नलवा जैसे महान यौद्ध थे.. तो उन्हें किसका डर था… अंग्रेज व्यापार के इरादे से तो महाराजा के दरबार जाते थे, लेकिन वहां की शानो शौकत देखकर वो समझ चुके थे कि महाराजा के रहते वो पंजाब पर कब्जा नही कर सकते.. महारजा की सेना न तो आधुनिक हथियारो से डरती है और न ही अंग्रेजो से.. लेकिन अगर अंग्रेज उस वक्त पंजाब पर हमला करते तो शायद उन्हें भारत पर और 100 सालो तक राज करने की सुख नहीं मिलता।

अफगानिस्तान से लेकर कश्मीर तक शासन

महाराजा रणजीत सिंह ने अफगानिस्तान से लेकर कश्मीर तक शासन बढ़ा लिया था.. बस वो इंतजार करने लगे महाराजा के अंत का.. और ये मौका उन्हें अपना शासन स्थापित करने के करीब 92 सालों बाद मिला। 1839 में महाराजा रणजीत सिंह का 59 साल की उम्र निधन हो गया, उनके जाने के बाद अंग्रेजो के लिए पंजाब मे आना आसान नहीं था.. मराहानी जिंद कौर अपने 5 साल के बेटे के साथ मिलकर भ्रष्ट दरबारियों और शासन व्यवस्था को सभाल रही थी, लेकिन खालसा सेना के कुछ लोगो ने धोखा कर दिया।

जिससे सेना में फूट पड़ गई और पहली बार 1845 में सिख आंग्ल युद्ध हुआ..जिसमे पंजाब का कुछ हिस्सा अंग्रेजी हुकुमत के पास गया, लेकिन राजकुमार दलीप को अंग्रेजो ने ब्रिटेन भेज दिया औऱ महारानी को नजर बंद कर दिया। महारानी की कोशिशो के बाद भी वो फिर से सिख सम्राज्य को स्थापित नहीं पाई थी। और अंग्रेजो की गुलानी पंजाब में भी शुरु हो गई। लेकिन ये पूरी तरह से सच है कि महाराजा रणजीत सिंह के रहते अंग्रेज कभी पंजाब की तरफ आंख उठा कर भी नहीं कर पायें।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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