पूजा में मन नहीं लगता तो क्या करें ? प्रेमानंद जी से जानिए

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 16 मई 2024, 05:30 AM Updated: 16 मई 2024, 05:30 AM
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पूजा में मन नहीं लगता तो क्या करें ? हममें से कई लोग ऐसे हैं जो हर दिन मंदिर जाते हैं और धार्मिक किताबें पढ़ते हैं। इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो भगवान में आस्था तो रखते हैं लेकिन पूजा-पाठ में उनका मन नहीं लगता। समाज ऐसे लोगों को नास्तिक और ईश्वर विरोधी कहने लगता है। शास्त्रों के अनुसार, भले ही कोई व्यक्ति मंदिर या तीर्थ पर न जाए, लेकिन उसके दिल में मानव हित और लोक कल्याण की भावना हो, तो भी वह भगवान का भक्त है। यही बात वृन्दावन के प्रेमानंद जी महाराज ने अपने हालिया प्रवचन में भी कही है।

वर्तमान में महाराज जी वृन्दावन में रहते हैं और अपने पास आने वाले भक्तों को जीवन में सही रास्ते पर चलने की शिक्षा देते हैं। कुछ दिन पहले एक भक्त महाराज के दरबार में आया और पूछा, महाराज जी, मुझे भगवान में आस्था तो है लेकिन पूजा-पाठ में मन नहीं लगता, क्या करूं? भगत के सवाल के जवाब में महाराज जी ने क्या कहा, आपको जरूर सुनना चाहिए।

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पूजा में मन नहीं लगता तो क्या करें ?

महाराज जी कहते हैं कि यदि पूजा पाठ नहीं करना है तो नाम जप अवश्य करना चाहिए। क्योंकि नाम जपने से हमारे सारे पाप धुल जाते हैं और सांसारिक कष्टों से भी मुक्ति मिल जाती है। महाराज जी ने आगे कहा कि अगर कोई व्यक्ति करोड़ों रुपये दान करता है और नाम नहीं जपता है तो भी उसे भगवान की प्राप्ति नहीं होती है और वहीं दूसरी ओर अगर कोई व्यक्ति पूजा-पाठ या दान नहीं करता है और सिर्फ राधा-राधा या ईशर का नाम जपता है तो तो निश्चित रूप से उसके ऊपर भगवान की कृपा बनी रहती है। क्योंकि भगवान का नाम जपने में एक अलग तरह की शक्ति होती है इसलिए सदैव भगवान का नाम गुनगुनाते रहना चाहिए। कोई भी भगवान हो, राधा हो, कृष्ण हो, राम हो, कोई भी नाम हो, आप उसका जाप कर सकते हैं लेकिन करना जरूरी जरूर है।

महाराज जी आगे कहते हैं कि यदि कोई हर समय नाम का जाप करता है तो उसके भीतर ध्यान का प्रकाश होता है और वह बाहर से भी प्रसन्न रहता है। नाम जपने के लिए न तो कोई मेहनत करनी पड़ती है और न ही कोई पैसा और भगवान का नाम जपने से आत्मा आंतरिक और बाहर दोनों रूप से प्रकाशित हो जाती है।

पूजा में मन नहीं लगता तो क्या करें ? – साथ ही नाम जपने मात्र से ही व्यक्ति दिव्य सुख की प्राप्ति हो जाती है। महाराज जी यह भी कहते हैं कि यदि कभी दान का अवसर मिले तो किसी गरीब या उदासी की सेवा करना आवश्यक है। ऐसा मौका बिल्कुल भी नहीं चूकना चाहिए। जब तक आप किसी की मदद नहीं करेंगे तब तक आप उस खुशी की कल्पना नहीं कर पाएंगे जो मदद करने में मिलती है। दूसरों की सेवा और उनका नाम जपने से ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है।

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