परिवार में कलह-कलेश मचा हो तो क्या करें? प्रेमानंद जी महाराज से जानिए

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 26 मई 2024, 05:30 AM Updated: 26 मई 2024, 05:30 AM
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आज के समाज में बहुत अशांति है. हर घर में कलह होती है और जो लोग शांति चाहते हैं उनके लिए घर में कलह नर्क के समान हो जाती है। हर घर में छोटे-मोटे विवाद चलते रहते हैं। इसे देखकर न सिर्फ घर के बुजुर्गों को बल्कि घर में रहने वाले छोटे बच्चों को भी काफी परेशानी होती है। अब आपके मन में आ रहा होगा कि कलह तो हर घर में होती है, लेकिन इस कलह को अपने जीवन से दूर रखने के लिए क्या करें। तो आप बिल्कुल भी चिंता न करें क्योंकि प्रेमानंद जी महाराज ने अब आपके प्रश्न का उत्तर दे दिया है। दरअसल, महाराज जी कीर्तन के दौरान एक भक्त ने महाराज जी को अपनी समस्या बताई और पूछा कि परिवार में कलह हो तो क्या करें। दुखी भक्त का यह प्रश्न सुनकर महाराज ने बहुत अच्छा उत्तर दिया जो हम सभी को जानना चाहिए।

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घर में कलेश की वजह

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जो कुछ समाज में इन दिनों जो चल रहा है वह बहुत दुखद है। कुछ बच्चे अपने माता-पिता को पीटते हैं। वहीं, कुछ दुष्ट माता पिता अपने बच्चों का शोषण करते हैं। आजकल हर दूसरे या तीसरे घर में कलह होती रहती है। महाराज जी कहते हैं कि इस कलह का कारण बुरे आचरणों का भोग और गंदी वस्तुओं का सेवन है। महाराज जी कहते हैं कि शराब और मांस के सेवन से हमारे विचारों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

परिवार में कलह-कलेश मचा हो तो क्या करें

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि घर में होने वाली इन परेशानियों से बचना आसान नहीं है क्योंकि ये सब आजकल हर घर में मौजूद हैं। यहां समझदारी यही है कि जब घर में किसी भी तरह का कलह हो तो खुद को उससे दूर रखना ही बेहतर है। भले ही चीजों को ठीक नहीं किया जा सकता हो, लेकिन खुद को कभी भी किसी कलेश का कारण नहीं बनना चाहिए। साथ ही महाराज जी कहते हैं कि हमारा मन भी एक प्रकार का घर है, ऐसे में इस घर को पवित्र रखने का एकमात्र उपाय राधा का नाम या अपने किसी इष्ट का नाम जपना है। नाम जपने से हमारे मन को बहुत संतुष्टि मिलती है। अन्यथा हमारा मन इधर-उधर सांसारिक सुखों की चाहत रखता है, जो बिल्कुल भी सही नहीं है। महाराज जी कहते हैं कि अपने साथ-साथ छोटे भाई-बहनों या छोटे बच्चों को भी 5 से 10 मिनट तक नाम जपने की आदत डालनी चाहिए। ताकि भविष्य में उनमें अपने बड़ों के प्रति प्रेम बना रहे और वे घर में कलह का कारण न बनें।

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