कोरोना, अयोध्या और ट्विन टॉवर जैसे इन ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 09 नवम्बर 2022, 05:30 AM Updated: 09 नवम्बर 2022, 05:30 AM
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जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ बने देश के 50वें प्रधान न्यायाधीश 

बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ को उनके पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गया। जिसके बाद अब वो भारत के 50वें चीफ जस्टिस बन गए हैं। लेकिन क्या पाको पता है कि जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ भारत के ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं जिसकी वजह से वो चर्चा में आए और अब उन्हें देश के 50वां प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) का पद मिला है.

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जानिए कौन है जस्टिस धनंजय यशवंत

जस्टिस चंद्रचूड़ अपने पिता और भारत के पूर्व चीफ जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ के बेटे हैं और उनके पिता 1978 से 1985 तक सुप्रीम कोर्ट के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले चीफ जस्टिस थे। 11 नवंबर, 1959 को जन्मे न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से बीए की पढाई की उन्होंने यहाँ से अर्थशास्त्र में बीए किया और उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कैम्पस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री ली. वहीं लॉ की डिग्री लेने क बाद उन्होंने अमेरिका के हार्वर्ड लॉ स्कूल से ज्यूरिडिकल साइंस में डॉक्टरेट तथा एलएलएम की डिग्री ली. इसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय और बंबई उच्च न्यायालय से अपनी वकालत शुरू की साथ ही मुंबई विश्वविद्यालय में संवैधानिक कानून के अतिथि प्रोफेसर भी रहे.

इसी के साथ न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. वहीँ इस पद पर नियुक्त होने से पहले, 29 मार्च 2000 तक बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे. बंबई उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ को जून 1998 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पदस्थ किया और उन्हें उसी साल अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था.

इन ऐतिहासिक फैसले का रहे हैं हिस्सा

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड अयोध्या भूमि विवाद, धारा 377 के तहत समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटाने, सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा, सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने, भारतीय नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने और आधार योजना की वैधता से जुड़े कई फैसलों में शामिल थे। इसी के साथ जस्टिस चंद्रचूड मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट में महत्वपूर्ण फैसला देने वाली बेंच का भी हिस्सा थे।

कोरोना, अयोध्या और ट्विन टॉवर को गिराने का दिया आदेश

कोरोना महामारी को लेकर जस्टिस चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने सरकार को  दिशा-निर्देश देते हुए कहा था कि रोगियों के उचित इलाज के लिए देश भर के अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करें. वहीं 9 नवंबर, 2019 को सर्वसम्मति के साथ अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण करने का फैसला सुनाया था साथ ही सरकार को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित करने के निर्देश दिया था. इसी के साथ जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने नोएडा में 40 मंजिला सुपरटेक ट्विन टॉवर्स को तय मानदंडों का पालन न करने पर अवैध मानते हुए इन्हें ढहाने के निर्देश दिए थे। वहीं 28 अगस्त, 2022 को इन टॉवरों को गिरा दिया गया.

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