Gujrat News: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेल बाजार पहले से ही दबाव में है। इसी माहौल में गुजरात के तट पर एक ऐसा तेल टैंकर पहुंचा है, जिसने नई हलचल पैदा कर दी है। करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आया यह टैंकर अचानक चर्चा में है, क्योंकि इसके बारे में कई अहम सवालों के जवाब अब तक साफ नहीं हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बहुत बड़ा क्रूड कैरियर (VLCC) ‘डेर्या’ मंगलवार को गुजरात के एक बंदरगाह पर पहुंचा। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस शिपमेंट को लेकर न तो पहले से कोई स्पष्ट जानकारी थी और न ही यह साफ है कि इसे किसने खरीदा है।
टाइमिंग बनी सबसे बड़ी परेशानी | Gujrat News
जहाज से जुड़ा डेटा बताता है कि इसमें ईरानी कच्चा तेल 28 मार्च को भरा गया था। यही इसकी सबसे बड़ी समस्या बन गई है। दरअसल, अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में एक सीमित समय के लिए छूट दी थी, लेकिन वह छूट सिर्फ उन टैंकरों पर लागू थी, जिनमें 20 मार्च से पहले तेल लोड किया गया हो।
अमेरिकी वित्त विभाग के लाइसेंस के मुताबिक, 20 मार्च से 19 अप्रैल के बीच उन्हीं शिपमेंट्स की बिक्री की अनुमति है, जो पहले से जहाजों पर लदे हुए थे। ऐसे में 28 मार्च को लोड हुआ यह तेल उस सीमा से बाहर हो जाता है।
क्यों पीछे हट रही हैं भारतीय रिफाइनरियां
यही वजह है कि भारत की रिफाइनिंग कंपनियां इस तेल को खरीदने से बच रही हैं। अगर वे इस शिपमेंट को स्वीकार करती हैं, तो उन पर अमेरिका के सेकेंडरी सैंक्शंस लग सकते हैं, जो किसी भी कंपनी के लिए बड़ा जोखिम है। सूत्रों का कहना है कि भारतीय कंपनियां पहले भी छूट के दायरे में आने वाले ईरानी तेल को खरीद चुकी हैं, लेकिन इस बार मामला अलग है क्योंकि यह शिपमेंट तय नियमों से बाहर माना जा रहा है।
अमेरिका का सख्त रुख, नहीं बढ़ेगी छूट
इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू अमेरिका का रुख है। हाल ही में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत बेनतीजा रही, जिसके बाद अमेरिका ने अपने रुख को और सख्त कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका अब इस छूट की समय सीमा बढ़ाने के मूड में नहीं है। इसके उलट, उसने ईरानी बंदरगाहों के आसपास अपनी नौसेना की गतिविधियां भी बढ़ा दी हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में दबाव और बढ़ सकता है।
टैंकर के खरीदार पर सस्पेंस
सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि इस तेल का खरीदार कौन है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस टैंकर के लिए चीन के अलावा कोई और बड़ा खरीदार मिलना मुश्किल है। ग्लोबल शिपिंग डेटा के अनुसार, ‘डेर्या’ टैंकर खुद अमेरिका के प्रतिबंधों की सूची में शामिल है और इसे ईरान की नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी ऑपरेट करती है। यही वजह है कि इससे जुड़ा हर सौदा जोखिम भरा माना जा रहा है।
गुजरात के पास खड़ा, लेकिन आगे क्या?
ट्रैकिंग डेटा से यह भी सामने आया है कि टैंकर गुजरात के पास पहुंचने के बाद से लगभग स्थिर है और उसमें कोई खास गतिविधि नहीं देखी गई है। यानी फिलहाल यह साफ नहीं है कि इस तेल का आगे क्या होगा क्या इसे कोई खरीदेगा या फिर यह लंबे समय तक यूं ही फंसा रहेगा।
सात साल बाद बढ़ी हलचल
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हाल के दिनों में ईरानी तेल से जुड़े कुछ और टैंकर भी भारत पहुंचे हैं। इनमें कच्चा तेल और एलपीजी ले जाने वाले जहाज शामिल हैं। करीब सात साल बाद ऐसा देखा जा रहा है कि ईरान से जुड़े शिपमेंट भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचे हैं।
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