India France Rafale Deal: राफेल को बड़ा झटका, 29 हजार करोड़ की डील हाथ से गई, लेकिन भारत के साथ महा-सौदे पर नजरें टिकीं

Nandani | Nedrick News Published: 18 जनवरी 2026, 09:30 PM Updated: 18 जनवरी 2026, 09:30 PM
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India France Rafale Deal: एक तरफ भारत और फ्रांस के बीच राफेल फाइटर जेट्स को लेकर करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की ऐतिहासिक डील पर तेजी से काम चल रहा है, वहीं दूसरी ओर राफेल को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन को लगभग 29 हजार करोड़ रुपये की एक अहम डील गंवानी पड़ी है। यह डील दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया से जुड़ी थी, जहां राफेल को मजबूत दावेदार माना जा रहा था।

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कोलंबिया की जरूरत, राफेल सबसे आगे (India France Rafale Deal)

कोलंबिया अपनी एयरफोर्स के पुराने हो चुके फाइटर जेट्स को बदलना चाहता था। इस प्रक्रिया में फ्रांस के राफेल को लेकर वहां के सैन्य अधिकारियों ने खुले तौर पर तारीफ भी की थी। शुरुआती संकेतों से ऐसा लग रहा था कि राफेल ही कोलंबिया की पसंद बनने वाला है। यहां तक कि बैकडोर बातचीत के बाद दसॉल्ट एविएशन और कोलंबिया के बीच करीब 2.96 बिलियन पाउंड यानी लगभग 27 हजार करोड़ रुपये की डील लगभग फाइनल मानी जा रही थी। कागजों पर यह सौदा लगभग तय हो चुका था और माना जा रहा था कि राफेल इजरायली ‘कफिर’ जेट्स की जगह लेगा।

ऐन वक्त पर बदला फैसला, ग्रिपेन को मिली बाजी

लेकिन आखिरी समय पर कोलंबिया सरकार ने सबको चौंकाते हुए राफेल की जगह स्वीडन के ग्रिपेन फाइटर जेट को चुन लिया। आधिकारिक तौर पर इस फैसले की कोई ठोस वजह नहीं बताई गई, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के बीच इसकी खूब चर्चा हो रही है। राफेल को इतनी करीब आकर डील गंवाना फ्रांस के लिए किसी झटके से कम नहीं माना जा रहा।

ग्रिपेन ने क्यों मारी बाजी?

bishopstrow.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीडन की कंपनी साब (Saab) ने कोलंबिया को कई ऐसे ऑफर दिए जो लंबे समय के लिहाज से ज्यादा फायदेमंद माने गए। इसमें इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और देश के भीतर लोकल असेंबली की संभावना शामिल थी। इसके अलावा ग्रिपेन की ऑपरेशनल कॉस्ट और मेंटेनेंस खर्च राफेल के मुकाबले कम बताए गए। कोलंबिया को यह भी लगा कि इस डील के जरिए वह अपने देश में फाइटर जेट मैन्युफैक्चरिंग का एक इकोसिस्टम खड़ा कर सकता है।

सिर्फ खरीद नहीं, उड़ाने का खर्च भी अहम

इस फैसले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि फाइटर जेट्स की खरीद सिर्फ ताकत दिखाने का मामला नहीं है। असली चुनौती उन्हें लंबे समय तक ऑपरेट करने और मेंटेन करने की होती है। मिड-साइज एयरफोर्स के लिए ग्रिपेन खुद को एक हल्का, स्मार्ट और किफायती विकल्प के तौर पर पेश करता है। यही वजह है कि कई देशों के लिए वह राफेल या यूरोफाइटर टाइफून के मुकाबले ज्यादा प्रैक्टिकल साबित हो रहा है।

क्या राफेल की चमक कम हो रही है?

कोलंबिया की डील गंवाने के बाद यह सवाल जरूर उठता है कि क्या राफेल की चमक फीकी पड़ रही है। इससे पहले 2021 में ऑस्ट्रेलिया ने भी फ्रांस को झटका दिया था, जब उसने सबमरीन डील में अमेरिका और यूके को तरजीह दी थी। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इन घटनाओं के आधार पर राफेल को कमजोर आंकना सही नहीं होगा।

ऑर्डर बुक भरी हुई, कई देशों की पसंद बना राफेल

हकीकत यह है कि राफेल को यूरोप के बाहर कई नए ग्राहक मिले हैं। अब तक करीब 300 राफेल फाइटर जेट्स बन चुके हैं और ये फ्रांसीसी एयरफोर्स की रीढ़ माने जाते हैं। फ्रांस के पास खुद 234 राफेल विमान हैं और कंपनी के पास करीब 273 फाइटर जेट्स का पक्का ऑर्डर मौजूद है। भारत, कतर, ग्रीस, क्रोएशिया और यूएई जैसे देश राफेल के बड़े खरीदारों में शामिल हैं।

भारत बना राफेल का सबसे बड़ा भविष्य

भारत पहले ही फ्रांस से एयरफोर्स के लिए 36 राफेल और नेवी के लिए 26 मरीन राफेल खरीद चुका है। अब भारत 114 नए फाइटर जेट्स की डील की तैयारी में है, जिसकी कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है। अगर यह सौदा पूरा होता है, तो फ्रांस के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा राफेल ऑपरेटर बन जाएगा।

एक झटका, लेकिन तस्वीर अभी भी मजबूत

कोलंबिया की डील भले ही फ्रांस के हाथ से निकल गई हो, लेकिन कुल मिलाकर राफेल की ग्लोबल पोजिशन अब भी मजबूत नजर आती है। भारत जैसे बड़े और रणनीतिक साझेदार के साथ होने वाला सौदा आने वाले समय में राफेल की कहानी को नई ऊंचाई दे सकता है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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