मध्य प्रदेश में कोदो बाजरा खाने से 10 हाथियों की मौत कैसे हुई? क्या है कोदो बाजरा जानें…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 04 नवम्बर 2024, 05:30 AM Updated: 04 नवम्बर 2024, 05:30 AM
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10 elephants died after eating Kodo millet – हाल ही, में मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ नेशनल पार्क से एक खबर सामने आई हैं कि मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ नेशनल पार्क में पिछले तीन दिनों में 13 हाथियों के झुंड में से 10 जंगली हाथियों की मौत हो गई. हाथियों की मौत को लेकर भोपाल से दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है. सरकार ने दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं क्या कोदो की फसल को खाने के बाद हाथियों की मौत हो सकती है या नहीं? इसे लेकर अभी तक जांच जारी है.

जानें क्या है पूरा मामला  

दरअसल, हाल ही में मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ से एक नया मामला सामने जिसमे बताया जा रहा हैं कि कोदो (Kodo Millet) खाने से 10 हाथियों की मौत हो गई हैं. शुरुआती जांच रिपोर्ट में हाथियों की मौत की वजह कोदो को बताया जा रहा है जिस पर स्थानीय किसानों को रत्ती भर यकीन नहीं है. हाथियों की मौत के बाद से मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है. सरकार ने दो वन विभाग के दो कर्मचारियों को सस्पेंड भी कर दिया है. वही कुछ लोगो का सवाल है कि आखिर कोदो खाने से कैसे किसी की मौत हो सकती हैं.  हालांकि इसे लेकर अभी तक जांच जारी है.

शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक कोदो की फसल को ही हाथियों की मौत की वजह बताया जा रहा है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया कि कोदो की फसल में जहर था जो हाथियों की मौत का कारण बन गया. इस मामले को लेकर सबसे पहले 29 अक्टूबर को 4 हाथी मृत और 6 हाथी गंभीर रूप से बीमार हालत में पाए गए थे. फिर ठीक उसी के अगले दिन यानी 30 अक्टूबर को इनमें से 4 और हाथियों ने दम तोड़ दिया था. इसके बाद 31 अक्टूबर को भी बाकी 2 बीमार हाथियों की भी जान चले गयी.

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क्या हैं कोदो (Kodo Millet)

कोदो बाजरा (Kodo Millet), जिसे हिंदी में “कोदो” भी कहा जाता है, यह एक प्रकार का अनाज है जो मुख्यतः भारत में उगाया जाता है. यह एक पारंपरिक फसल है, जो सूखे और कठिन जलवायु में भी अच्छी तरह से बढ़ती है. कोडो बाजरा पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसमें उच्च फाइबर, प्रोटीन, और विभिन्न विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं. इसमें आयरन, जिंक, और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं. वही कोदो बाजरा (Kodo Millet) ग्लूटेन- फ्री भी होता है. यह एक बढ़िया विकल्प है उन लोगों के लिए जो ग्लूटेन से परहेज करते हैं. दूसरी और कोदो बाजरा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह मधुमेह के मरीजों के लिए लाभकारी है. इसके अलवा उच्च फाइबर सामग्री पाचन में सहायता करती है.

 

Kodo Millet , Bajra
Source: Google

कैसे किया जाता है कोदो बाजरा का उपयोग

कोदो बाजरा को दाल, खिचड़ी, या रोटी बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. इसे उबालकर या भूनकर भी खाया जा सकता है. वही कोदो बाजरा की खेती करने के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है, जिससे यह जलवायु परिवर्तन के दौर में एक टिकाऊ विकल्प है. इस प्रकार, कोदो बाजरा एक पोषक तत्वों से भरपूर और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद अनाज माना जाता हैं. कोदो बाजरा भारत में कई आदिवासी और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए मुख्य भोजन है. शोधकर्ताओं के अनुसार, यह ‘सबसे कठोर फसलों में से एक है, जो उच्च उपज क्षमता और उत्कृष्ट भंडारण गुणों के साथ सूखा सहन करती है’

कोदो बाजरा जहरीला क्यों हो जाता है

जर्नल ऑफ साइंटिफिक एंड टेक्निकल रिसर्च में प्रकाशित 2023 के शोध पत्र, ‘कोडुआ विषाक्तता में साइक्लोपियाज़ोनिक एसिड विषाक्तता का संभावित जोखिम’ के अनुसार, कोदो बाजरा मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाया जाता है. हालाँकि, कभी-कभी “वसंत और गर्मियों जैसी पर्यावरणीय परिस्थितियाँ एक निश्चित प्रकार के विषाक्तता के लिए उपयुक्त होती हैं, जिससे फसल का अधिक आर्थिक नुकसान होता है.”

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