History of Punjab First Cinema: आज पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री और संगीत इंडस्ट्री का क्रेज ऐसा है कि केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पंजाबी संगीत ही सुना जाता है। संगीत के साथ साथ फिल्मों की भी दायरा बढ़ा औऱ इसे नाम मिला पॉलीवुड या फिर कभी कभी पंजवुड भी कहा जाता है। आप ये तो जानते है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का दौर 1913 के दशक में शुरु हुआ था लेकिन पंजाबी फिल्मों का दौर कब शुरु हुआ था। कब पहली बार पंजाबी भाषा में भी फिल्म बनी थी। और कौन सी फिल्म ने पंजाब को बॉलीवुड से कनेक्ट कर दिया था। कौन सी फिल्म थी सुपरहिट.. अपने इस वीडियो में हम पंजाब के पहली फिल्म के बारे में जानेंगे, साथ ही कैसे कैसे पंजाब सिने जगत में बड़े बड़े बदलाव आये..
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पंजाब की पहली फिल्म कौन सी थी?
साल 1913 में दादा साहब फाल्के, जिन्हे हिंदी फिल्मों का पिता कहा जाता है उन्होंने पहली फिल्म राजा हरीशचंद्र बनाई थी। ये एक ब्लैक एंड वाइट मूक फिल्म थी। दादा साहब फाल्के का ये एक्पेरिमेंट काफी सफल रहा.. जिसके बाद भारत में एक नया युग शुरु हो गया। इस दौरान केवल दक्षिण और मध्य भारत में ही नहीं बल्कि उत्तर भारत में भी फिल्मो का क्रेज बढ़ रहा था.. मगर विडंबना ये थी कि भारत एक ऐसा देश है जहां अलग अलग बोली औऱ भाषा है.. ऐसे में किसी एक स्टेट की भाषा दूसरे स्टेट में समझना मुश्किल था, इसलिए स्थानीय भाषा में भी फिल्में बनने लगी.. जिनमें से अपनी भाषा में फिल्म बनाने में पंजाब भी काफी आगे निकल गया। आपने सोचा है कि पहली पंजाबी भाषा की फिल्म कैसी होगी..दरअसल पहली बार पंजाबी फिल्म साल 1928 में रिलीज हुई थी.. फिल्म का नाम था ‘डॉटर्स ऑफ़ टुडे’… जिसे लाहौर में बनाया गया था.. आप इसे पहली पंजाबी फिल्म इसलिए कह सकते है क्योंकि तब लाहौर भारतीय पंजाब का ही हिस्सा था।
3 सालों में फिल्म बन कर तैयार हुई
भारत का बंटवारा नही थी औऱ लाहौर 1920 के दशक में लाहौर भारत में फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्रों में से एक बन गया था। फिल्म ‘डॉटर्स ऑफ़ टुडे’ भी मूक भाषा में बनी थी.. यानि की वॉइसलैस.. इस फिल्म को बनाने वाले निर्देशक थे शंकरदेव आर्य.. तो वहीं इस फिल्म के निर्माता थे जी.के. मेहता, जिन्होंने फिल्म के निर्देशक शंकरदेव आर्य के साथ मिलकर फिल्म में सह निर्देशक का भी काम किया था। वहीं इस फिल्म के लीड एक्टर थे अब्दुर राशिद करदार, जिन्होंने इस फिल्म में मुख्य निभाई थी। इस फिल्म का निर्माण का काम असल में साल 1924 में ही शुरु कर दिया गया था, लेकिन फिल्म के निर्माता को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा जिसके कारण फिल्म का निर्माण काफी धीमा हो गया गया था और करीब 3 सालों में ये ये फिल्म बन कर तैयार हुई थी।
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पंजाबी भाषा की पहली बोलती फिल्म हीर रांझा
इस फिल्म में मुख्य किरदार के अलावा विलायत बेगम, एम. इस्माइल, विजय कुमार, हीरालाल, गुलाम कादिर और जी.के. मेहता ने भी अदाकारी की थी। ये फिल्म साल 1928 में रिलिज हुई और पसंद भी की गई.. पंजाब तब एक बहुत बड़ा भूखंड था.. पंजाबियों के लिए स्थानिय भाषा में फिल्म का देखना ही बेहद रोमांचक अनुभव था। हालांकि पहली बोलती फिल्म बनाने में पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से बाजी मार ली, और जहां 1933 में पहली हिंदी फिल्म आलमआरा आई थी तो वहीं 1932 में ही ए.आर. कादर ने पंजाबी भाषा की पहली बोलती फिल्म हीर रांझा ले कर आयेँ।
पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री बहुत फेमस हब
इस फिल्म का पहले नाम हूर पंजाब रखा जाना था, लेकिन किन्ही कारणों से नाम बदल कर हीर रांझा रख दिया था, ये वो दौर था जब पंजाब में बंटवारे की बात तक नहीं उठी थी.. इस फिल्म में रफीक ग़ज़नवी ने मुख्य किरदार निभाया था तो वहीं अनवरी बेगम ने हीर का किरदार निभाया था जो उस समय की सबसे खूबसूरत हिरोईन में गिनी जाती थी। वहीं रांझा का रोल प्ले करने वाले रफीक गज़वनी ने ही इस फिल्म में संगीत भी दिया था। इस फिल्म को पूरे पंजाब में काफी पंसद किया गया था। जिसके बाद पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री एक बहुत फेमस हब बन गई, लेकिन अगर बंटवारा न होता तो शायद आज मुम्बई नहीं पंजाब माया नगरी होती..बंटवारे के कारण पंजाबी की आर्थिक स्थिति को नुकसान हुआ और फिलम् हब लाहौर पाकिस्तान के हिस्से में चला गया।
जिसे बाद भारत में फिल्म इंडस्ट्री को मजबूत करने में करीब 20 साल लग गए और आजाद भारत की पहली पंजाबी फिल्म आई ‘नानक नाम जहाज़ है.. जो कि साल 1969 में बॉक्स ऑफिस पर रीलिज हुई थी, जो एक बड़ी हिट साबित हुई। ‘नानक नाम जहाज़ है फिल्म 1947 में पंजाबियों औऱ सिखों ने जो त्रासदी झेली उसे लेकर थी.. अमृतसर के रहने वाले एक परिवार का कहानी जो आध्यात्मिक है, और ईश्वर पर पूरी विश्वास करता है, जिनके मुखिया है गुरमुख सिंह.. जिसका रोल निभाया था पृथ्वीराज कपूर ने। ये फिल्म बहुत चली.. जिसके बाद भारत में भी पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री अपनी पैठ जमाने लगी। खास साल 2000 के बाद पंजाबी फिल्मों और संगीत का औहदा और दायरा दोनो ही बढ़े है।
































