Gold Price Fall Prediction: सोने के निवेशकों के लिए चेतावनी का समय है। पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिला है, लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी जल्द ही गिरावट में बदल सकती है। पूर्वानुमानों के मुताबिक, सोने की कीमतें 80,000 रुपये प्रति सोने से नीचे जा सकती हैं।
जनवरी में रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई (Gold Price Fall Prediction)
सोने की कीमतों में पिछले साल से लगातार तेजी देखी जा रही थी। 29 जनवरी को एक ग्राम सोने की कीमत 16,800 रुपये और एक सॉवरेन सोने की कीमत 1,34,400 रुपये तक पहुंच गई थी। इस ऊंचाई के बाद निवेशकों के लिए सोना खरीदना मुश्किल हो गया। हालांकि, 30 जनवरी को अचानक 10% से अधिक गिरावट देखने को मिली। उसके बाद से कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने का भंडारण और रूस की अंतरराष्ट्रीय रणनीतियां प्रमुख कारण रही हैं।
रूस का बड़ा असर
सोने की संभावित गिरावट का मुख्य कारण रूस को माना जा रहा है। पिछले छह महीनों में रूस ने अमेरिकी डॉलर के उपयोग को सीमित रखा था, जिससे सोने की कीमतें बढ़ीं। लेकिन हालिया रिपोर्टों के मुताबिक रूस डॉलर का व्यापक उपयोग फिर से शुरू करने की योजना बना रहा है।
अमेरिका ने रूस से भारत के कच्चे तेल आयात पर रोक जैसी कई कार्रवाई की हैं, जिससे रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना। अब रूस अगर अपने सोने के भंडार बेचकर डॉलर जुटाने लगे, तो वैश्विक सोने की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाप्त होने की स्थिति में गिरावट और तेज हो सकती है।
ब्रिक्स देशों की भूमिका
चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे ब्रिक्स देशों ने हाल के महीनों में सोने की खरीद बढ़ा रखी थी। लेकिन अगर ये देश अब खरीदारी कम करते हैं, तो वैश्विक मांग घटने के कारण कीमतों में और नरमी आ सकती है। पिछले छह महीनों में ब्रिक्स देशों ने वैश्विक सोने की लगभग 50% हिस्सेदारी खरीदी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से भारत में सोने की कीमतें 70,000 से 80,000 रुपये प्रति सोना तक गिर सकती हैं। हालांकि, यह गिरावट अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे होगी। 2027 के अंत तक कीमतें लगभग 80,000 रुपये पर स्थिर हो सकती हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
सोने में निवेश करने वाले लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार पर बारीकी से नजर रखें। अब खरीदारी करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। वैश्विक आर्थिक हालात, रूस की नीतियां और ब्रिक्स देशों की मांग पर आधारित अस्थिरता अगले कुछ महीनों में कीमतों पर असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सोना हमेशा सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता है, लेकिन अस्थिर बाजार में निवेशकों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए ही निवेश योजना बनाना लाभदायक साबित हो सकता है।
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