Dwarka Bribery Scandal: दिल्ली पुलिस के द्वारका जिला नारकोटिक्स सेल में तैनात इंस्पेक्टर सुभाष यादव को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिश्वतखोरी और अवैध वसूली के एक बड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से फरार चल रहे सुभाष यादव की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच में जुट गई है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
कांस्टेबल की गिरफ्तारी के बाद फरार हो गया था इंस्पेक्टर| Dwarka Bribery Scandal
इस मामले में सीबीआई ने पहले दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल अजय को गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान उसके पास से करीब 48 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही कांस्टेबल अजय की गिरफ्तारी हुई, इंस्पेक्टर सुभाष यादव फरार हो गया था। इसके बाद सीबीआई लगातार उसकी तलाश कर रही थी।
दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर सुभाष यादव को आज CBI ने रंगे हाथ पकड़ ही लिया।
60 हजार का महीना कमाने वाले इस narcotics inspector के पास 100 करोड़ की संपत्ती का खुलासा CBI ने किया है।
अगर एक इंस्पेक्टर के पास 100 करोड़ हो सकता है
सोचिए ऊपर के अधिकारी के पास कितने सौ करोड़ की… pic.twitter.com/aZBYJkIqU8
— Rahul Kumar (@MukAn_X) May 12, 2026
कई दिनों की निगरानी और तकनीकी जांच के बाद आखिरकार एजेंसी ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब आरोपी इंस्पेक्टर को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां एजेंसी उसकी रिमांड मांग सकती है ताकि पूरे मामले की तह तक पहुंचा जा सके।
100 करोड़ से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इंस्पेक्टर सुभाष यादव पर रिश्वतखोरी और अवैध वसूली के जरिए करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाने का आरोप है। शुरुआती जांच में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं। इतना ही नहीं, कई बेनामी संपत्तियों और प्रॉपर्टी से जुड़े लिंक भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।
सीबीआई अब आरोपी के बैंक खातों, निवेश, चल-अचल संपत्तियों और कथित अवैध कमाई के अन्य स्रोतों की पड़ताल कर रही है। सूत्रों का कहना है कि बरामद 48 लाख रुपये इस पूरे नेटवर्क का सिर्फ एक छोटा हिस्सा हो सकता है।
क्या बड़ा नेटवर्क चला रहा था रिश्वत का खेल?
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, यह मामला सिर्फ एक इंस्पेक्टर तक सीमित नहीं हो सकता। एजेंसी इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं यह रिश्वत और अवैध वसूली का संगठित नेटवर्क तो नहीं था। जांच के दायरे में कुछ बड़े पुलिस अधिकारी और अन्य कर्मियों के नाम भी आ सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि जांच में कुछ आईपीएस अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि अभी तक एजेंसी की ओर से किसी वरिष्ठ अधिकारी का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।
लंबे समय से निगरानी कर रही थी CBI
बताया जा रहा है कि सीबीआई की टीम काफी समय से इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए थी। एजेंसी ने पर्याप्त सबूत जुटाने के बाद ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की। जांच के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े इनपुट मिले, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
सीबीआई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध वसूली का पैसा कहां-कहां निवेश किया गया और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
दिल्ली पुलिस महकमे में बढ़ी बेचैनी
इस कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। भ्रष्टाचार और अवैध वसूली को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच यह मामला विभाग की छवि पर बड़ा असर डाल सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई और अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है।




























