CJI Justice BR Gavai: मुख्य न्यायाधीश ने महाराष्ट्र के शीर्ष अफसरों को सार्वजनिक रूप से लताड़ा, प्रोटोकॉल उल्लंघन पर उठाए सवाल

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 19 मई 2025, 12:00 AM 🔄 Updated: 19 मई 2025, 12:00 AM
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CJI Justice BR Gavai: देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने महाराष्ट्र दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का सही ढंग से पालन न होने पर गहरी नाराजगी जताई है। रविवार को मुंबई पहुंचने पर जब महाराष्ट्र के शीर्ष अधिकारी जैसे मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और मुंबई पुलिस कमिश्नर उनकी अगवानी के लिए मौजूद नहीं थे, तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी असंतोष व्यक्त किया। हालांकि कुछ घंटे बाद ये अधिकारी एक अन्य कार्यक्रम में सीजेआई के साथ नजर आए।

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सीजेआई गवई ने क्या कहा? (CJI Justice BR Gavai)

सीजेआई गवई ने महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल के आयोजन में अपने सम्मान समारोह में कहा, “लोकतंत्र के तीन स्तंभों—न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका—के बीच सम्मान बेहद आवश्यक है।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रोटोकॉल कोई मामूली औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के बीच सम्मान का प्रतीक है।

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सीजेआई ने स्पष्ट किया कि जब कोई महाराष्ट्र का व्यक्ति देश का मुख्य न्यायाधीश बनता है और पहली बार अपने गृह राज्य आता है, तो उससे जुड़े वरिष्ठ अधिकारी सम्मान दिखाने के लिए उपस्थित रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर ऐसा नहीं होता, तो अधिकारियों को इस बात पर विचार करना चाहिए।”

हालांकि जस्टिस गवई ने इस मामले को लेकर ज्यादा विवाद खड़ा करने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने यह बात जनता तक पहुंचाने की जरूरत महसूस की ताकि सभी इसकी गंभीरता समझें। उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में कहा, “अगर मेरी जगह कोई और होता तो अनुच्छेद 142 की चर्चा होने लगती।”

सीजेआई की टिप्पणी के बाद अधिकारियों की मौजूदगी

सीजेआई की नाराजगी के कुछ घंटे बाद ही महाराष्ट्र के मुख्य सचिव सुजाता सौनिक, पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला और मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती दादर स्थित चैत्यभूमि में डॉ. बीआर अंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के मौके पर मौजूद थे। इस अवसर पर सीजेआई ने कहा, “सीजेआई बनने के बाद यह मेरा पहला चैत्यभूमि दौरा है, मैं यहां डॉ. अंबेडकर का आशीर्वाद लेने आया हूं। मैं प्रोटोकॉल को लेकर ज्यादा परेशान नहीं हूं, बस इस बात को उजागर किया है।”

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अनुच्छेद 142 का महत्व

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को यह अधिकार है कि वह न्यायिक कार्यवाही में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करे। इसके अंतर्गत अदालत व्यक्तियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए निर्देश भी दे सकती है।

सीजेआई गवई का बार एसोसिएशन पर भी बयान

सीजेआई ने पहले भी सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की उस नीति की आलोचना की थी, जिसमें जस्टिस बेला त्रिवेदी को उचित विदाई नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सम्मान की कमी स्वीकार्य नहीं है। सीजेआई ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल की तारीफ की, जिन्होंने जस्टिस त्रिवेदी के प्रति सम्मान दिखाया।

CJI के लिए प्रोटोकॉल का मतलब

जब मुख्य न्यायाधीश किसी राज्य का दौरा करते हैं तो उनके स्वागत, सुरक्षा, और ठहराव के लिए सख्त प्रोटोकॉल होता है। इसमें राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन और सम्मान बनाए रखने के लिए यह प्रोटोकॉल बेहद जरूरी माना जाता है।

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