S-400 Features: S-400 हर लक्ष्य पर नहीं करता हमला, जानिए कैसे बनता है भारत का सुदर्शन चक्र

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 19 मई 2025, 12:00 AM 🔄 Updated: 19 मई 2025, 12:00 AM
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S-400 Features: भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य टकराव में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह वही आधुनिक रक्षा प्रणाली है जिसने पाकिस्तान की तरफ से दागे गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को प्रभावी ढंग से विफल कर भारत को मुकाबले में बढ़त दिलाई। भारत ने 2018 में रूस से पांच S-400 सिस्टम खरीदने का समझौता किया था, जिसे चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरे को देखते हुए दोनों सीमा क्षेत्रों पर तैनात किया गया। भारत में इसे ‘सुदर्शन चक्र’ नाम दिया गया है, जो भगवान विष्णु के न अजेय अस्त्र से प्रेरित है। इस सिस्टम की ताकत को देखकर लोग इसके कामकाज और क्षमताओं को समझने के लिए उत्सुक हैं।

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S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की विशेषताएं- S-400 Features

S-400 को दुनिया के सबसे उन्नत और प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टमों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी मोबाइलिटी है, यानी इसे आसानी से किसी भी स्थान पर ले जाकर 10 मिनट के अंदर तैनात किया जा सकता है। इस सिस्टम का रडार अत्यंत संवेदनशील है और 600 किलोमीटर तक की दूरी में 300 से अधिक लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता है। वहीं, यह 400 किलोमीटर तक की दूरी में दुश्मन की मिसाइल, ड्रोन और विमान को मार गिराने में सक्षम है। एक S-400 स्क्वाड्रन 72 मिसाइलों को एक साथ दाग सकता है, जिससे एक बार में बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई संभव होती है।

S-400 Features india
source: google

क्या S-400 हर मिसाइल या ड्रोन पर फायर करता है?

यह एक आम भ्रांति है कि S-400 हर लक्ष्य पर हमला करता है। वास्तव में, यह प्रणाली केवल तब सक्रिय होती है जब किसी लक्ष्य से खतरा महसूस किया जाए। सिस्टम 600 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखता है, लेकिन मिसाइल या ड्रोन पर तभी प्रतिक्रिया करता है जब वे हमारे क्षेत्र की तरफ हमला करने की कोशिश करें। इसे कमांड से आदेश मिलने पर ही कार्यवाही करने का अधिकार होता है, ताकि अनावश्यक हमले से बचा जा सके।

S-400 Features india
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S-400 का संचालन कैसे होता है?

S-400 सिस्टम में चार मुख्य घटक होते हैं:

  • रडार: यह 24 घंटे काम करता है और 600 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन की हर गतिविधि को स्कैन करता है। जब कोई संदिग्ध वस्तु 400 किलोमीटर की सीमा में आती है, तो रडार कमांड एंड कंट्रोल यूनिट को सूचना भेजता है।
  • कमांड एंड कंट्रोल यूनिट: यह यूनिट डेटा के आधार पर यह निर्धारित करती है कि किस लक्ष्य से कितना खतरा है, उसकी गति और दिशा क्या है।
  • एंगेजमेंट रडार: यह लक्षित वस्तुओं को ट्रैक करता है और मिसाइलों को निशाना बनाने के लिए कमांड भेजता है।
  • लॉन्चर: प्रत्येक लॉन्चर में चार मिसाइलें होती हैं, जिन्हें एक साथ या अलग-अलग समय पर दागा जा सकता है।

S-400 की ताकत का मतलब भारत की सुरक्षा में मजबूती

भारत के लिए S-400 का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह सीमा क्षेत्रों पर बढ़ते खतरे के बीच एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है। पाकिस्तान की तरफ से लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करते हुए इस सिस्टम ने भारतीय रक्षा बलों को न केवल तत्काल प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाया है, बल्कि शत्रु के हमलों को नाकाम कर भारतीय नियंत्रण रेखा पर नियंत्रण बनाए रखने में भी मदद की है।

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