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जानिए दलितों के विकास के लिए कितना कारगर है जातीय जनगणना

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 06 Oct 2023, 12:00 AM | Updated: 06 Oct 2023, 12:00 AM

हम सब जानते है की हमारे देश की जनगणना मे ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमे जनगणना का आधार जाति हो। जातीय जनगणना केवल आकडा नहीं है, जिससे हम जनसंख्या का अनुमान लगते है।  आमतौर पर हम जातीय जनगणना से यही अनुमान लगते है की इसे किन किन जातियों मे कितने व्यक्ति है, लेकिन जातीय जनगणना इसे कई ज्यादा है। जातीय जनगणना से दलितो और पिछड़े वर्ग के लोगो का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक तौर पर विकास किया जा सकता है। लेकिन ऐसा होता नहीं है। हमारे देश मे दलितो को हमेशा दुतकारा गया है, जितना हक़ उन्हे मिलना चाहिए उसका आधा भी नहीं मिला है। हमारे देश मे दलितो को इंसान होने तक के अधिकार से वंचित रखा जाता था। इतनी दुर्गति के बाद दलितो ओर पिछड़े वर्ग के लोगो के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए बहुत काम करना पड़ेगा। जिसमे जातीय जनगणना, आरक्षण जैसी कामो से यह मुमकिन है।

दोस्तो, आइए आज हम आपको बताएँगे कि हमारे देश मे जातीय जनगणना दलितो ओर पिछड़े वर्ग के लोगो के लिए कैसे कारगर है। इससे कैसे उनके जीवन स्तर को सुधारा जा सकता है। हमारे देश मे इसको लेकर क्या प्रावधान है या क्या प्रावधान होने चाहिए।

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क्यों दलितों के विकास के लिए जातीय जनगणना है जरूरी

कोई इस बात को कितना भी झुठलाले, लेकिन यह हमारे समाज की सचाई कि आज भी हमारे समाज मे गैर बराबरी और असमानता जैसी कुरतीय मौजूद है। क्यों कि देश की 40% संपति देश के 1% लोगो के पास होगी तो असमानता की बात उठेगी ही, इसीलिए देश के दूसरे वर्ग यानि दलितो और पिछड़े वर्ग के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए हमे कुछ कदम उठाने होंगे। जिसमे जातीय जनगणना एक बड़ा कदम साबित होगा। जातीय जनगणना से दलितो और पिछड़े वर्ग के लोगो का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक तौर पर विकास किया जा सकता है।

अगर देश के बजट के हिस्से को पिछड़ेपन के शिकार लोगो पर भी लगाया जाएगा तो उनका भी विकास हो सकता है। जो हर योजना पर झूठे वादों पर यकीन करके खुद के विकास की उम्मीद लगता है। ऐसा नहीं है कि कभी जातीय जनगणना की आवाज नहीं उठाई गयी, कई दशको से जातीय जनगणना के लिए आवाज भी उठाई जा रही है।

जनगणना के आकड़ों को छुपना

हम आपको बता दे कि जातीय जनगणना की मांग कई दशको से उठती आ रही है। इसमे लालू प्रसाद, मुलायम सिंह यादव और शरद यादव जैसे नेताओ ने मुख्य भूमिका भी निभाई है। लेकिन इसे अलग एक ओर पहलू भी है, जिसमे जगणनना के सही आकड़ों को छुपाया जाता है। 2014 की सामाजिक आर्थिक जनगणना मे सरकार ने कुछ चुनिन्दा आकडे ही प्रकाशित किए थे, जिसमे उनको जतियों को छुपा दिया गया था, ताकि मुट्ठी भर विशेषाधिकार लोग पिछड़े वर्ग के लोगो को समाज से वंचित रखने मे सफल हो जाए। इस बात को लोगो ने काफी नाराजगी भी दिखाई थी।

अगर हमे हमारे देश के पिछड़े वर्ग का विकास करना है तो एक बार देश के दलितो और पिछड़े वर्ग के लोगो का जातीय, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अच्छे से जांच होनी चाहिए। जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।

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