एकनाथ शिंदे गुट को मिला शिवसेना का नाम और निशान, चुनाव आयोग ने बताई फैसले की वजह

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 18 फ़रवरी 2023, 05:30 AM Updated: 18 फ़रवरी 2023, 05:30 AM
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चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को दिया शिवसेना का नाम और धनुष और तीर

चुनाव आयोग (Election Commission) ने शुक्रवार को एक महाराष्ट्र के एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट का पक्ष में एक अहम फैसला सुनाया है और ये फैसला शिवसेना (Shiv Sena) का नाम और पार्टी का सिंबल ‘धनुष और तीर’ को लेकर है. दरअसल, चुनाव आयोग (Election Commission) ने शिवसेना (Shiv Sena) का नाम और पार्टी का सिंबल ‘धनुष और तीर’ एकनाथ शिंदे गुट को देने का फैसला सुनाया है. इसी के साथ चुनाव आयोग ने इस फैसले की वजह भी बताई है. 

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शिंदे गुट को मिला शिवसेना का नाम और सिंबल

चुनाव आयोग ने अपने 78 पन्नों के आदेश में कहा कि शिंदे गुट को इसलिए पार्टी की कमान सौंपी गई कि साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के 55 विजयी उम्मीदवारों में से एकनाथ शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों के पक्ष में लगभग 76 फीसदी मत पड़े. जबकि 23.5 प्रतिशत मत उद्धव ठाकरे धड़े के विधायकों को मिले. आयोग ने कहा कि प्रतिवादी (ठाकरे गुट) ने चुनाव चिह्न और संगठन पर दावा करने के लिए पार्टी के 2018 के संविधान पर बहुत भरोसा किया था, लेकिन पार्टी ने संविधान में संशोधन के बारे में आयोग को सूचित नहीं किया था.

चुनाव आयोग ने बताई वजह 

चुनाव आयोग ने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा कि शिवसेना का वर्तमान संविधान अलोकतांत्रिक है. बिना किसी चुनाव पदाधिकारियों के रूप में एक मंडली के लोगों को अलोकतांत्रिक रूप से नियुक्त करने के चलते यह बिगड़ गया. आयोग ने कहा कि इस तरह की पार्टी संरचना विश्वास हासिल नहीं कर सकती है.

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वहीं चुनाव आयोग ने ये भी कहा कि राजनीतिक दलों के संविधान में पदाधिकारियों के स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव का प्रावधान होना चाहिए. आयोग ने आंतरिक विवादों के समाधान के लिए एक स्वतंत्र व निष्पक्ष प्रक्रिया पर भी जोर दिया. इन प्रक्रियाओं में संशोधन करना कठिन होना चाहिए. संगठनात्मक सदस्यों का बड़ा समर्थन सुनिश्चित करने के बाद ही संशोधन किया जाना चाहिए. वहीं आयोग ने कहा कि पार्टी के संविधान को अक्सर बिना किसी चुनाव के पदाधिकारियों के रूप में एक मंडली के लोगों को अलोकतांत्रिक रूप से नियुक्त करने के लिए ‘विकृत’ किया जाता है.

चुनाव आयोग ने पाया कि शिवसेना में मूल संविधान को गुपचुप तरीके से अलोकतांत्रिक तरीकों से लाया गया, यानी ऐसे प्रावधान की गए जिससे पार्टी निजी जागीर जैसी हो गई.  आयोग ने ये भी कहा कि शिवसेना का 2018 में संशोधित किया गया संविधान आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है. आयोग ने कहा कि उसने पाया कि पार्टी का संविधान, जिस पर ठाकरे गुट पूरा भरोसा कर रहा था, वह अलोकतांत्रिक था.

फैसले पर क्या बोले एकनाथ शिंदे?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Maharashtra Chief Minister Eknath Shinde) ने चुनाव आयोग के फैसले को सच और लोगों की जीत बताया है. उन्होंने आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संवाददाताओं से कहा कि मैं निर्वाचन आयोग को धन्यवाद देता हूं. लोकतंत्र में बहुमत का महत्व होता है. यह सच्चाई और लोगों की जीत है और साथ ही यह बालासाहेब ठाकरे का आशीर्वाद भी है. हमारी शिवसेना वास्तविक है. सीएम शिंदे ने कहा कि हमने बालासाहेब के विचारों को ध्यान में रखते हुए पिछले साल महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई.

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