IIT रुड़की के विद्यार्थियों ने कुछ लाख रूपये में करके दिखाया 11 हज़ार करोड रुपए का काम

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 01 नवम्बर 2022, 05:30 AM Updated: 01 नवम्बर 2022, 05:30 AM
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IIT रुड़की के विद्यार्थियों ने ‘डेयर टू ड्रीम’  प्रतियोगिता में मारी बाजी, कम पैसों में बनाई सोडियममाइन बैटरी 

आईआईटी रुड़की के विद्यार्थियों ने नया कीर्तिमान रचा है और ये कीर्तिमान महज कुछ लाख रुपए में सोडियममाइन बैटरी को बनाने को लेकर है. दरअसल, सोडियममाइन बैटरी जिसे मुकेश अंबानी ने बनाने के लिए यूके की एक कंपनी फराडियन (Faradion) को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने और उसके शेयर खरीदने के लिए लगभग 11000 करोड रुपए खर्च किए लेकिन भारत में ही एक स्टार्टअप के तहत IIT रुड़की के विद्यार्थियों ने 11 हज़ार करोड रुपए का काम मात्र कुछ लाख रुपए में करके दिखाया है.

सरकार ने दिया 10 लाख रूपये का इनाम 

जानकरी के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की याद में ‘डेयर टू ड्रीम’ प्रतियोगिता शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य उन विचारों और प्रौद्योगिकियों की पहचान करना है जिनमें भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस जरूरतों में भविष्य में अपनाने की क्षमता है। वहीं आईआईटी रुड़की के विद्यार्थियों आकाश सोनी, योगेश शर्मा, नागेश कुमार और असित साहू सहित टीम ने इस प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा प्रस्तुत 10 लाख रुपये का पुरस्कार जीता। वहीं आईआईटी रुड़की के विद्यार्थियों द्वारा कुछ लाख रूपये खर्च करके बनाए गये सोडियममाइन बैटरी के इस प्रोजेक्ट को डीआरडीओ (DRDO) ने पास भी कर दिया 

सह-संस्थापक ने किया समर्थन

वहीं इंडीनेर्जी, सह-संस्थापक, योगेश शर्मा ने कहा कि “बैटरी निर्माण में एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए पूरे देश की सामूहिक इच्छाओं और प्रयासों की आवश्यकता है। स्वदेशी बैटरी प्रौद्योगिकी विकसित करने की अपनी खोज में IIT रुड़की के Indinergy के समर्थन को स्वीकार किया जाना चाहिए। ऊर्जा भंडारण में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए, हम न केवल सेल प्रौद्योगिकी पर काम कर रहे हैं, बल्कि Na-ion बैटरी के लिए कच्चे माल के लिए एक स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला भी बना रहे हैं।

देश को होगा ये फायदा

आईआईटी रुड़की के विद्यार्थियों द्वारा कम कीमत में बनी इस सोडियममाइन बैटरी की वजह से देश को बड़ा फयदा होगा.  इस सोडियममाइन बैटरी के जरिये बिजली से चलने वाले वाहन लगभग आधी कीमत में मिलने लगेंगे साथ ही इस बैटरी को बनाने के लिए भारत को कोबाल्ट, कॉपर और रेयर अर्थ मेटेरियल को विदेशों से मंगवाना नहीं  पड़ेगा.  एक रिपोर्ट के अनुसार, सोडियम आयन बैटरी हर लिहाज से लिथियम आयन बैटरी से बेहतर है. 

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