Rahul Gandhi PC: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और चुनावी प्रणालियों में कथित धांधली को लेकर दिल्ली में राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। बता दें कि सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की पीसी (PC) की वीडियो ट्रेंड हो रही है, जिसमें राहुल गांधी ने भाजपा के शीर्ष नेताओं—पीएम मोदी और अमित शाह—के तीन पुराने बयानों की क्लिप्स दिखाकर इसे ‘वोट चोरी’ का ब्लूप्रिंट बताया है। राहुल गांधी के इन गंभीर आरोपों और भाजपा के पलटवार ने देश के चुनावी सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Rahul Gandhi ने वीडियो क्लीप शेयर कर उठाए गंभीर सवाल
अमित शाह की पहली क्लिप
संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा था कि वे 61 वर्ष के हो चुके हैं और अगले 14 से 30 सालों तक देश में भाजपा की ही सरकार रहने वाली है। राहुल गांधी का आरोप है कि यह दावा जनता के समर्थन से नहीं, बल्कि चुनावी मशीनरी में हेरफेर के भरोसे किया जा रहा है।
अमित शाह की दूसरी क्लिप
भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा था कि उन्हें अगले 50 सालों तक पंचायत से पार्लियामेंट तक सिर्फ जीत की कल्पना करनी चाहिए। विपक्ष के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और संस्थाओं पर नियंत्रण के जरिए इस लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश हो रही है।
पीएम मोदी की तीसरी क्लिप
2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के लिए ‘400 पार’ का नारा दिया था। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का दावा है कि बिना किसी पूर्व निर्धारित या सटीक डेटा हेरफेर (जैसे वोटर लिस्ट से नाम हटाना) के, कोई भी पार्टी चुनाव से ठीक पहले इतनी सटीक सीटों का दावा नहीं कर सकती।
LIVE :: वीडियो चलाकर:: राहुल गांधी ने Press Conference में मचाया हड़कंप! || Rahul Gandhi जी ने पक्के सबूतों के साथ सबकी पोल खोल दी। https://t.co/8VuZJrWYBM
— Nagesh Pandey (@NageshPandeyJi) October 16, 2026
राहुल गांधी के तीखे सवाल
राहुल गांधी ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकतंत्र, संविधान और चुनाव प्रणालियों की निष्पक्षता को लेकर कुछ बेहद तीखे सवाल उठाए थे। राहुल गांधी का बयान है कि “दुनिया या देश में ऐसा कोई नेता नहीं है जिसके खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी यानी जनता की नाराजगी या सत्ता विरोधी लहर न आती हो। हर सामान्य राजनीतिक व्यवस्था में नेताओं और सरकारों के खिलाफ जनता में नाराजगी होती है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ यह नाराजगी चुनाव परिणामों में क्यों दिखाई नहीं दे रही है?”
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का तर्क था कि जब जमीन पर महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों को लेकर जनता में सरकार के खिलाफ गुस्सा साफ दिखता है, तो फिर चुनाव के नतीजों में वह गुस्सा क्यों गायब हो जाता है? उनके अनुसार, यह इस बात का सबूत है कि चुनावी नतीजों को मशीनरी और डेटा प्रबंधन के जरिए बदला जा रहा है।
वोट, संविधान और कानून की बुनियाद पर चोट
राहुल गांधी का कहना है कि “वोट इस देश की नींव है। वोट से ही हमारे संविधान को पावर (ताकत) मिलती है और संविधान से ही इस देश के कानून बनते हैं। अगर आपने वोट को ही खत्म कर दिया, तो फिर न तो संविधान का कोई मतलब रह जाएगा और न ही इस देश के कानूनों का कोई मतलब बचेगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि ‘वोट चोरी’ का यह मुद्दा सिर्फ चुनाव हारने या जीतने का नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र को अंदर से खोखला करने जैसा है। अगर जनता के वोट की ताकत ही खत्म हो गई, तो देश का पूरा संवैधानिक ढांचा ढह जाएगा।
भाजपा का पलटवार
राहुल गांधी के इन गंभीर आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीखा पलटवार किया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के ‘एंटी-इंकम्बेंसी गायब होने’ वाले तर्क का जवाब देते हुए इतिहास का हवाला दिया और कहा कि तमिलनाडु में द्रमुक (DMK), पश्चिम बंगाल में वामपंथी/टीएमसी और ओडिशा में बीजद (BJD) जैसी पार्टियों ने भी दशकों तक बिना सत्ता विरोधी लहर के राज किया है।
वहीं, भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने हाल के चुनावों में हुए भारी मतदान (वोटर टर्नआउट) का जिक्र करते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रणाली पर जनता के अटूट भरोसे का प्रतीक बताया और आरोप लगाया कि राहुल गांधी जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसके साथ ही, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमजोरी और लगातार मिल रही चुनावी हार का ठीकरा केवल चुनाव आयोग और मशीनों पर फोड़कर बहानेबाजी कर रही है।













































