हौसले और मेहनत से बदली अपनी कहानी, पलक कोहली बनीं पैरा-बैडमिंटन की पहचान – Palak Kohli

Shikha Mishra | Nedrick News Punjab Published: 28 सितम्बर 2026, 09:20 PM Updated: 28 सितम्बर 2026, 09:20 PM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

 Palak Kohli — पैरा-बैडमिंटन ओलंपियन

मशहूर शायर अल्लामा इकबाल की एक बहुत ही वर्ल्ड फेमस लाइन है।

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।।

ये पंक्तियों उन लोगों के लिए है जो हर हालात से लड़कर कर भी केवल जीतना जानते है। जिन्होंने तमाम मुसीबतें आने के बाद भी और किसी तरह हार मानने के बजाय खुद को इतना काबिल बना लिया कि उनकी नाकाबलियत ने ही उन्हें सफलता की ऊंचाइयों पर चढ़ाया। हीरा कोयले की खान से ही निकलता है, जरूरत है तो बस उसे सही तरीके से तराशे जाने की, खुद को मेहनत और हर मुसीबत की अग्नि में ही तराश कर जालंधर से पेशेवर भारतीय पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी पलक कोहली ने भी हर उस इंसान को करारा जवाब दिया जिन्होंने उनके एक हाथ न होने को उनकी सबसे बड़ी कमी माना था। लेकिन पलक ने अपनी इसी कमी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में भारत के नाम रोशन किया है। अपने इस लेख में हम पलक कोहली की उस उम्पलब्धियों के बारे में बात करेंगे जिसके दम पर वो वर्ल्ड की बेहतरीन बैंडमिंटन खिलाड़ी बनी।

और पढ़े: Balbir Singh Sr.: भारतीय हॉकी के वो महानायक, जिन्होंने रचा ओलंपिक इतिहास

जानें कौन है Palak Kohli?

पलक कोहली का जन्म 12 अगस्त 2002 को पंजाब के जालंधर में महेश कोहली के यहां हुआ था। उनके पिता जालंधर के एक बड़े व्यापारी है। तो वहीं उनकी मां सिमी कोहली एक हाउस वाइफ है। पलक जन्म से ही अविकसित बायें हाथ के साथ पैदा हुई थी। लेकिन उन्होंने इस कमी को कमी मानने के बजाय अवसर में बदल लिया। खासकर जब उन्होंने बैंडमिंटन खेलने में रूचि दिखाई तो माता पिता ने पूरा बढ़ावा दिया और साल 2017 में जब जालंधर में एक मॉल के सामने कोच गौरव खन्ना से मिलने के बाद तो उन्होंने तय कर लिया था कि वो पैरा बैंडमिंटन खेलेंगी और ओलंपिक में जायेंगी। पलक ने जालंधर के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल, से स्कूलिंग पूरी की थी, और गौरव खन्ना की लाइफ जर्नी जानने के बाद तो पलक ने पढ़ाई को कुछ समय के लिए ब्रेक देकर खुद को खेल की तरफ समर्पित कर दिया… गौरव ने उन्हें बताया कि कैसे एक बेहतरीन खिलाड़ी होते हुए भी एक एक्सीडेंट ने उनकी जिंदगी बदल दी.. लेकिन वो हारे नहीं.. पलक के लिए उनके कोच अंधेरे में दिये जैसे ही थे।

भारत की सबसे कम उम्र की एथलीट

इसके लिए उन्होंने गौरव खन्ना के लखनऊ के एकेडमी में दाखिला से लिया.. जहां अथक मेहनत और कड़ें प्रयास से उन्होंने 18 साल की उम्र में पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया… जिसके कारण वो भारत की सबसे कम उम्र की इंडियन पैरा बैंडंमिंटन खिलाड़ी बन गई। खुद पलक कहती है कि उनके लिए किसी भी तरह का खेल खेलना एक सपने की ही तरह थी, वो बचपन से ही केवल खेलते हुए देखती थी,, लेकिन कभी सोचा ही नहीं था कि कभी वो खुद इसका हिस्सा बनेगी। 2019 में उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक्स के लिए क्वालिफाई कर भारत की सबसे कम उम्र की एथलीट बन गई थी। पलक अपने खेल के दम पर  टोक्यो में सेमीफाइनल तक पहुंची लेकिन वो पदक नहीं जीत सकी थी, हालांकि वो चौथे  नंबर पर रही थी। लेकिन इतनी छोटी सी उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाली वो पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई थी। पलक की जिंदगी, उनकी सोचने का तरीका, जिंदगी जीने का तरीका पूरी तरह से बदल चुका है. वो अब बेचारी नहीं है, कोई उन्हें बेचारी की नजरो से नहीं देखता, बल्कि अब लोगो की आंखो में उनके लिए सम्मान और गर्व है। जो पलक को प्रेरित करता है अपनी तरह तमाम लड़कियों को शारीरिक कमी के कारण अवहेलना झेलने के बजाय कुछ दिखाने के लिए हौसला देने का।

कौन है पलक के कोच

पलक अपनी सफलता के लिए अपने कोच को धन्यवाद कहना कभी नहीं भूलती.. वो कहती है कि उनके कोच सभी बच्चो को मुफ्त में ट्रेनिंग देते है.. ताकि को टैलेंट केवल पैसों के अभाव में पीछे न रह जायें। गौरव का कहना है कि उनके खिलाड़ियों ने पैरा ओलंपिक में अब तक 600 पदक जीते है, जिसमें 200 तो केवल गोल्ड ही जीते गए है। गौरव जो कि खुद 15 सालो से बच्चो को ट्रेनिंग दे रहे है.. एक बेहतरीन खिलाड़ी रह चुके है.. वो कहते है कि उनकी नजरे टैलेंट को एक ही नजर में पहचान लेती है और पलक को भी उन्होंने केवल एक नजर में पहचान लिया था। वो कहते है कि विडंबना ये है कि शारीरिक कमी के कारण अक्सर समाजिक अवहेलना झेलने के कारण बच्चो का मनोबल कमजोर हो जाता है, जबकि उनके अंदर जो टैलेंट छिपा है वो आम बच्चों में भी नहीं होता। गौरव 2015 से भारतीय पैरा टीम के कोच है। पलक अपने कोच के 30 होनहार छात्रों में से एक है, जो  2028, 2032 और 2036 के ओलंपिक खेलों की तैयारी कर रहे है। पलक बैडमिंटन खेलने के साथ साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से डिस्टैंस में कॉलेज भी कर रही है।

बीडब्लूएफ विश्व पैरा-बैडमिंटन चैंपियनशिप से बाहर

हालांकि पलक इस वक्त बेहद बुरे दौर से गुजर रही है। 2025 में एशियाई पैरा-बैडमिंटन चैंपियनशिप में वो बुरी तरह से घायल हो गई और उनके घुटने में गंभीर चोट आई.. जिसके कारण उन्हें ब़ड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा था। जिससे अभी तक वो उबर नहीं पाई है.. इतना ही नहीं इस सर्जरी के कारण उन्हें 2026 के बीडब्लूएफ विश्व पैरा-बैडमिंटन चैंपियनशिप से बाहर होना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ (Disability Classification Documents) को लेकर पंजाब के खेल मंत्रालय के पास कई कंप्लेन दर्ज कराई गई थी, जिसके कारण वो जांच के दायरे में फंस गई है। हालांकि पलक के योगदान के लिए मई 2026 में, पंजाब के सीएम भगवंत मान ने उन्हें महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। जो सबूत है कि भले ही कितनी मुसिबतें आई लेकिन देश की लाखों करोड़ो जनता उनके साथ उनकी हिम्मत बढ़ाने के लिए खड़े है। पलक फिलहाल रेस्ट पर है। अब देखना ये होगा कि वो कब कोर्ट में वापिस लौटती है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

Recent News

Editor's Picks

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds