Azamgarh firing crime news: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में घर के भीतर चल रही पूजा के दौरान अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। यहां अरविंद सिंह नाम के शख्स ने मामूली विवाद में अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर निकालकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस सनसनीखेज हमले में आरोपी की पत्नी और पूजा करा रहे दो पुरोहितों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने अपने ही तीन मासूम बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया। देर रात चले खौफनाक रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस की जवाबी गोलीबारी में आरोपी अरविंद मारा गया, जबकि बाद में अस्पताल में उसके 8 साल के घायल बेटे ने भी दम तोड़ दिया। इस दिल दहला देने वाले खूनी खेल में अब तक कुल पांच लोगों की जान जा चुकी है।
महामृत्युंजय जाप और पहचान पत्र पर भड़का विवाद| Azamgarh firing crime news
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के पीछे की कहानी आरोपी अरविंद की मां श्यामबला देवी के बयान से सामने आई है। उन्होंने बताया कि अरविंद की मानसिक और शारीरिक सलामती के लिए ही उसकी पत्नी बबीता सिंह पिछले तीन दिनों से तीन पुरोहितों को बुलाकर घर में महामृत्युंजय का अनुष्ठान करवा रही थी। कल शाम करीब 5:30 बजे अरविंद जैसे ही घर पहुंचा, उसने पूजा करा रहे पुरोहितों से सवाल-जवाब शुरू कर दिया और उनका पहचान पत्र मांगने लगा। जब पत्नी बबीता ने घर आए पुरोहितों के इस तरह अपमान किए जाने का कड़ा विरोध किया, तो अरविंद आपा खो बैठा। गुस्से में आकर उसने सबसे पहले अपनी पत्नी पर गोली चला दी, जिससे उसकी जान चली गई।
दो पुरोहितों की हत्या, एक ने भागकर बचाई जान
पत्नी को लहूलुहान देख पूजा करा रहे पुरोहित जान बचाकर बाहर की तरफ भागे। लेकिन सिर पर खून सवार अरविंद ने उनका पीछा किया और ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। गोली लगने से पंडित महेंद्र पाठक समेत दो पुरोहितों की वहीं मौत हो गई, जबकि तीसरा पुरोहित किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा।
वारदात को अंजाम देने के बाद अरविंद अपने 8 साल के बेटे शौर्य, 5 साल की बेटी परी और महज 6 महीने की दूधमुंही बच्ची को लेकर एक कमरे में बंद हो गया। उसके पास तीन लाइसेंसी हथियार और दर्जनों जिंदा कारतूस मौजूद थे, जिससे पूरे गांव में दहशत फैल गई।
भाई की हत्या का दर्द और पुरानी रंजिश का साया
मां श्यामबला देवी के मुताबिक, अरविंद के इस हिंसक रूप के पीछे परिवार का एक पुराना और खौफनाक अतीत भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने बताया कि साल 2015 में बबीता ने पड़ोस के दो लोगों के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था, जिसमें अदालत ने दोनों को 20-20 साल की सजा सुनाई थी। उस मुकदमे की अहम सुनवाई से ठीक पहले 12 अक्टूबर 2018 को अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिसका मामला अभी भी अदालत में चल रहा है।
बड़े भाई की मौत के बाद से ही अरविंद गहरे मानसिक तनाव और डर के साए में जी रहा था। जिस रिवाल्वर से उसने इस पूरी वारदात को अंजाम दिया, वह भी उसके दिवंगत भाई सुनील सिंह के नाम पर ही थी, जो बाद में अरविंद के नाम ट्रांसफर हुई थी।
आधी रात का रेस्क्यू ऑपरेशन और एनकाउंटर
कमरे में मासूम बच्चों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। जब पुलिस टीम ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कमरे का दरवाजा तोड़ा, तो अरविंद ने पुलिस पर भी गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई। हालांकि, कमरे के भीतर घायल मिले उसके 8 साल के बेटे शौर्य ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बाकी दोनों बच्चियों को बचा लिया गया है। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं एहतियात के तौर पर गांव में भारी पुलिस बल तैनात है।












































