Nithari case murder mystery: देश को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित निठारी कांड में सभी आरोपों से बरी हो चुका सुरेंद्र कोली अब इस दुनिया में नहीं रहा। 19 साल जेल की सलाखों के पीछे काटने और कानूनी लड़ाई जीतकर बाहर आने के एक साल के भीतर ही उसका अंत हो गया। हरिद्वार में चाय की गुमनाम दुकान चला रहे सुरेंद्र कोली ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जिस शख्स को अदालत ने कभी 13 मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी और जो 2014 में फंदे पर लटकने से महज कुछ घंटे पहले बच निकला था, उसने आखिरकार खुद ही अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
फांसी से 4 घंटे पहले कैसे बचा था कोली? Nithari case murder mystery
कोली की जिंदगी किसी बेहद रहस्यमयी थ्रिलर से कम नहीं रही। सितंबर 2014 में मेरठ की चौधरी चरण सिंह जेल में उसकी फांसी की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। पवन जल्लाद ने फांसीघर के नट-बोल्ट दुरुस्त कर लिए थे, ग्रीसिंग हो चुकी थी और तीन बार डमी ट्रायल भी किया गया था। लेकिन 7 सितंबर की आधी रात को सुप्रीम कोर्ट में इमरजेंसी सुनवाई हुई और तड़के करीब एक बजे फांसी पर रोक का फैक्स जेल पहुंच गया। बाद में उसकी फांसी उम्रकैद में बदली और जांच की कमियों के चलते एक-एक कर मामले दरकते गए।
जांच की कमजोर कड़ियां और सुप्रीम कोर्ट से रिहाई
दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर 31 स्थित मोनिंदर सिंह पंधेर के डी-5 बंगले के पास नाले से जब मासूम बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले, तो कोली को इस पूरे नरसंहार का मुख्य चेहरा बना दिया गया था। उस पर 19 एफआईआर दर्ज हुईं और सीबीआई ने 16 मामलों में चार्जशीट पेश की। हालांकि, सालों बाद जब सबूतों की बारीकी से पड़ताल हुई तो अभियोजन पक्ष की थ्योरी बिखर गई:
- जबरन कबूलनामे पर सवाल: अदालतों ने पाया कि लगभग 60 दिन की पुलिस रिमांड के बाद बिना कानूनी मदद के बयान दर्ज कराए गए थे, जो स्वैच्छिक नहीं लग रहे थे।
- फोरेंसिक और बरामदगी में झोल: बंगले के भीतर से न तो खून के धब्बे मिले और न ही कड़ियों का पुख्ता मेल हुआ।
- दोषमुक्ति का रास्ता: अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोली को 12 मामलों में और पंधेर को सभी मामलों में बरी कर दिया था। इसके बाद 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की विशेष पीठ ने आखिरी मामले में भी सजा रद्द करते हुए इसे न्याय का स्पष्ट उल्लंघन माना और कोली 12 नवंबर 2025 को ग्रेटर नोएडा की जेल से रिहा हो गया।
चाय की गुमनाम दुकान से फंदे तक का सफर
रिहाई के बाद कोली नोएडा से सैकड़ों किलोमीटर दूर हरिद्वार आ गया। जिस चेहरे को कभी पूरे देश ने टीवी स्क्रीन पर सबसे क्रूर कातिल के रूप में देखा था, वह हरिद्वार में चुपचाप चाय की दुकान चलाकर गुमनाम जिंदगी बसर कर रहा था। लेकिन शुक्रवार को उसी दुकान में उसका शव फंदे से लटकता मिला। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और पुलिस शुरुआती तौर पर इसे खुदकुशी मान रही है।
कोली की मौत के साथ ही 20 साल पुराना यह खौफनाक मामला फिर उसी अनसुलझे चौराहे पर आकर खड़ा हो गया है। पंधेर और कोली दोनों ही अदालत से बेकसूर साबित हो चुके थे। ऐसे में सवाल जस का तस है कि अगर पंधेर और कोली ने नहीं मारा, तो निठारी के उन मासूम बच्चों का असली कातिल कौन था?












































