UK independence referendum: दुनियाभर में अपनी हुकूमत का डंका बजाने वाले और कभी भारत का बंटवारा करने वाले यूनाइटेड किंगडम (UK) के सामने आज अपने ही वजूद को बचाए रखने का सबसे बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। ब्रिटेन के नक्शे में शामिल स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड की प्रांतीय सरकारों के प्रमुख लंदन स्थित केंद्र सरकार (वेस्टमिंस्टर) से आजादी के लिए जनमत संग्रह कराने का अधिकार छीनने के मकसद से एकजुट हो गए हैं। वेल्स की राजधानी कार्डिफ स्थित सेंट डेविड्स होटल में होने वाले एक अभूतपूर्व शिखर सम्मेलन में तीनों क्षेत्रों के शीर्ष नेता एक ऐतिहासिक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। इस कदम का सीधा मकसद अपने-अपने इलाकों का संवैधानिक भविष्य खुद तय करना और ब्रिटिश हुकूमत पर आजादी के लिए वोटिंग की अनुमति देने का चौतरफा दबाव बनाना है।
इतिहास में पहली बार तीनों क्षेत्रों में आजादी समर्थकों की सत्ता| UK independence referendum
ब्रिटिश राजनीति के इतिहास में यह पहला मौका है जब स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड तीनों ही जगहों पर एक साथ स्वतंत्रता समर्थक दल सत्ता की कुर्सी पर काबिज हैं। हालिया चुनावी नतीजों ने लंदन के हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है। कार्डिफ सेनेड में जुटने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं:
- स्कॉटलैंड: स्कॉटिश नेशनल पार्टी (SNP) के नेता और फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी।
- वेल्स: चुनाव जीतकर सत्ता में आए प्लैड सिमरू के नेता रून एप लोवेर्थ।
- उत्तरी आयरलैंड: सिन फेन पार्टी की नेता और फर्स्ट मिनिस्टर मिशेल ओ’नील।
- आयरलैंड रिपब्लिक: आयरिश संसद में विपक्ष की कद्दावर नेता मैरी लू मैकडोनल्ड भी इस बैठक में शिरकत कर रही हैं।
स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था अब और नहीं चल सकती और वेस्टमिंस्टर को ‘यूके के बाद के भविष्य’ को स्वीकार करना ही होगा। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए यहां तक दावा कर दिया कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम को इस कड़वे सच का सामना करना पड़ेगा कि इतिहास उन्हें यूनाइटेड किंगडम के आखिरी प्रधानमंत्री के रूप में याद रखेगा।
To go from “off limits” to this is an acceptance of the reality that the people of Scotland will decide their own future – not the UK Government.
For the first time since 2014, a British Prime Minister accepts that majority support for a referendum should mean one takes place. https://t.co/2DB9AuAybp
— John Swinney (@JohnSwinney) September 9, 2026
ब्रिटिश पीएम पर भारी दबाव और ट्रंप के बयान से भड़की आग
ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम इस समय सबसे कड़े राजनीतिक इम्तिहान से गुजर रहे हैं। बर्नहम ने हाल ही में संसद में संकेत दिया था कि यदि स्कॉटलैंड में अलग होने को लेकर स्पष्ट जनमत बनता है, तो वे जनमत संग्रह की मांग पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने इसकी तुलना 1998 के ऐतिहासिक ‘गुड फ्राइडे समझौते’ से की, जिसके तहत प्रावधान है कि यदि जनता चाहे तो बहुमत के आधार पर उत्तरी आयरलैंड का विलय आयरलैंड गणराज्य में हो सकता है।
इस सुलगती आग में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने घी डालने का काम किया है। डबलिन यात्रा के दौरान ट्रंप ने खुलकर संयुक्त आयरलैंड की वकालत करते हुए कहा कि उत्तरी आयरलैंड का आयरिश रिपब्लिक में शामिल होना एक बेहतरीन कदम होगा।
यूके और ग्रेट ब्रिटेन का अंतर और आगे की राह
अक्सर लोग ग्रेट ब्रिटेन और यूके को एक ही समझ लेते हैं। दरअसल, ‘ग्रेट ब्रिटेन’ एक भौगोलिक भूभाग है जिसमें सिर्फ इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स शामिल हैं। वहीं ‘यूनाइटेड किंगडम’ (UK) में इन तीनों के साथ उत्तरी आयरलैंड भी जुड़ता है। भले ही तीनों क्षेत्रों के नेता एक मंच पर आ गए हों, लेकिन इसे यूके का तुरंत टूटना नहीं कहा जा सकता। स्कॉटलैंड 2014 में जनमत संग्रह में ब्रिटेन के साथ रहने का फैसला कर चुका है और किसी भी नए जनमत संग्रह के लिए लंबी कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। मगर इतना जरूर साफ है कि तीनों प्रांतीय सरकारों की इस साझा लामबंदी ने लंदन की सत्ता के सामने ब्रिटेन की अखंडता को बनाए रखने की सबसे विकट चुनौती खड़ी कर दी है।












































