Abhijeet Dipke FIR: महाराष्ट्र के लातूर जिले से एक बड़ा कानूनी मामला सामने आया है, जहां ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके साथियों के खिलाफ सरकारी स्कूल में जबरन घुसने, क्लासरूम में व्यवधान डालने और शिक्षकों को धमकाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई जिला परिषद उर्दू स्कूल की 53 वर्षीय शिक्षिका सैयद शमशादबानो खैरातली की शिकायत पर औसा पुलिस स्टेशन में की गई है।
दरअसल, अभिजीत दिपके अपनी पार्टी के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की समस्याओं को उजागर करने के लिए लगातार दौरे कर रहे हैं, लेकिन लातूर के इस स्कूल में हुए घटनाक्रम ने अब गंभीर कानूनी विवाद का रूप ले लिया है।
क्लासरूम में बच्चों से सवाल-जवाब और वीडियो रिकॉर्डिंग| Abhijeet Dipke FIR
यह पूरा मामला मुंबई से लगभग 500 किलोमीटर दूर औसा तहसील के जावली स्थित जिला परिषद उर्दू स्कूल का है। शिक्षिका द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 20 अगस्त को दोपहर करीब 1 बजे अभिजीत दिपके, अजिंक्य शिंदे और उनके कुछ साथी बिना किसी आधिकारिक अनुमति के स्कूल परिसर में दाखिल हुए।
आरोप है कि ये लोग अलग-अलग कक्षाओं में गए, छात्रों के बीच बैठकर उनसे सवाल-जवाब किए और करीब डेढ़ से दो घंटे तक स्कूल में मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने परिसर की तस्वीरें लीं और वीडियो रिकॉर्डिंग भी की, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
दूसरे स्कूल के छात्रों को बैठाने पर विवाद, निलंबन की धमकी का आरोप
शिकायत में बताया गया है कि स्कूल में दूसरे विद्यालय के छात्रों को लाकर कक्षा में बैठाए जाने के मुद्दे को लेकर शिक्षकों और सीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हो गई। शिक्षकों का आरोप है कि इस दौरान उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया और उन्हें नौकरी से सस्पेंड कराने की धमकियां दी गईं। इससे स्कूल का नियमित शैक्षणिक कार्य प्रभावित हुआ और बच्चों की पढ़ाई का माहौल बाधित हुआ। शिकायत के आधार पर औसा पुलिस ने अभिजीत दिपके समेत 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
BNS की 4 धाराएं: क्या हो सकती है कानूनी कार्रवाई?
पुलिस ने दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की चार प्रमुख धाराएं लगाई हैं:
- धारा 132 (लोक सेवक को कर्तव्य पालन से रोकना): ड्यूटी कर रहे सरकारी कर्मचारी पर आपराधिक बल प्रयोग या बाधा पहुंचाने पर अधिकतम 2 वर्ष की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- धारा 329(3) (आपराधिक अतिचार / Trespass): किसी संपत्ति में गलत इरादे या डराने-धमकाने के उद्देश्य से बिना अनुमति घुसने पर अधिकतम 3 महीने की जेल या ₹5,000 जुर्माना हो सकता है।
- धारा 351(2) (आपराधिक धमकी): शिक्षकों को धमकाने के मामले में यह धारा जोड़ी गई है।
- धारा 356(2) (मानहानि): सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर स्कूल और शिक्षकों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोप में अधिकतम 2 वर्ष की साधारण कैद, जुर्माना या कम्युनिटी सर्विस का प्रावधान है।
अदालत में इरादे पर टिकेगा केस
कानूनी जानकारों के मुताबिक, किसी सरकारी स्कूल में केवल बिना अनुमति चले जाना अपने आप में आपराधिक अतिचार (BNS 329) का अपराध सिद्ध नहीं करता। इसके लिए अदालत में यह साबित करना अनिवार्य होगा कि उनका इरादा वहां मौजूद शिक्षकों को डराना, अपमानित करना या काम में जानबूझकर बाधा पहुंचाना था। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान और साक्ष्य जुटा रही है।














































