Sushil Kumar Bail News: ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को सागर धनखड़ हत्याकांड में दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी नियमित जमानत की याचिका खारिज कर दी। 6 अगस्त को दिए गए फैसले में कोर्ट ने मामले की गंभीरता, गवाहों पर संभावित प्रभाव और ट्रायल की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका को अहम वजह माना।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार की पीठ ने कहा कि आम तौर पर जमानत नियम और जेल अपवाद है, लेकिन हर मामले में परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी है। कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर और कथित तौर पर पहले से सोचे-समझे हमले से जुड़ा माना, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई।
गवाहों पर प्रभाव को लेकर कोर्ट की चिंता| Sushil Kumar Bail News
हाई कोर्ट ने सुशील कुमार के सामाजिक और सार्वजनिक प्रभाव को भी जमानत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उस पुराने फैसले का जिक्र किया, जिसमें सुशील की जमानत रद्द की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले यह चिंता जताई थी कि सुशील के प्रभाव के कारण गवाहों पर असर पड़ सकता है। कोर्ट के सामने यह बात भी आई थी कि जब सुशील को अस्थायी तौर पर जेल से बाहर आने का मौका मिला था, तब कुछ गवाहों के अपने पहले के बयानों से पीछे हटने की स्थिति सामने आई थी। इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए हाई कोर्ट ने माना कि गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हथियार और वीडियो फुटेज का भी जिक्र
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में मौजूद सबूतों का भी उल्लेख किया। इनमें कथित तौर पर एक हथियार की बरामदगी, वीडियो फुटेज और अन्य सामग्री शामिल है। हालांकि, इन सबूतों की अंतिम जांच और उनकी विश्वसनीयता का फैसला अभी ट्रायल के दौरान होना है। हाई कोर्ट ने इसी वजह से इस स्तर पर सबूतों का अंतिम मूल्यांकन करने से परहेज किया। अदालत के मुताबिक, मामले की सुनवाई अभी जारी है और ऐसे में जमानत देने से ट्रायल प्रभावित होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बचाव पक्ष ने बताई ये वजहें
सुशील कुमार की ओर से उनके वकील ने जमानत के लिए दलील दी कि पिछली बार जमानत खारिज होने के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया है। बचाव पक्ष ने खास तौर पर सागर धनखड़ के पिता अशोक धनखड़ के बयान का हवाला दिया। वकील का कहना था कि ट्रायल के दौरान अशोक धनखड़ ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया। इसके अलावा बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि सुशील कुमार पांच साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुके हैं और ट्रायल में अब मुख्य रूप से औपचारिक तथा सरकारी गवाहों की गवाही बाकी है।
कोर्ट ने क्यों नहीं मानी दलील?
दिल्ली पुलिस और सागर धनखड़ के पिता की ओर से जमानत का विरोध किया गया। हाई कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि किसी गवाह की गवाही अभियोजन के पक्ष में है या नहीं, इसका अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट को करना है। इसलिए सिर्फ अशोक धनखड़ के बयान को ऐसी बदली हुई परिस्थिति नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के बावजूद सुशील को जमानत दे दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट पहले रद्द कर चुका है जमानत
सुशील कुमार को इस मामले में मई 2021 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में 19 जुलाई 2023 को एक सत्र अदालत ने उन्हें घुटने की सर्जरी के लिए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। हालांकि, 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी। शीर्ष अदालत ने उस समय गवाहों पर उनके संभावित प्रभाव और ट्रायल में देरी की आशंका को गंभीरता से लिया था।
क्या है सागर धनखड़ हत्याकांड?
मामला पूर्व जूनियर राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन सागर धनखड़ की मौत से जुड़ा है। आरोप है कि मई 2021 में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम परिसर में सागर और उनके साथियों के साथ मारपीट हुई थी। इस घटना के बाद सागर की मौत हो गई थी। सुशील कुमार इस मामले में आरोपी हैं और उनके खिलाफ ट्रायल चल रहा है। हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद फिलहाल उन्हें नियमित जमानत नहीं मिली है। हालांकि, मामले में आरोपों और सबूतों पर अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पूरी होने के बाद ही होगा।














































