Kerala MDMA Case: केरल के कोझिकोड जिले का वडाकरा एमडीएमए ड्रग्स मामला लगातार नए खुलासों के साथ सुर्खियों में है। इस केस में तीन महिला शिक्षकों की गिरफ्तारी ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ी इन महिलाओं पर सिंथेटिक ड्रग्स एमडीएमए की तस्करी में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी शिक्षिकाएं सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों तक पहुंचती थीं और डिजिटल पेमेंट के बाद ड्रग्स की सप्लाई करवाई जाती थी। फिलहाल मामले की जांच तेज कर दी गई है और पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य लोगों के शामिल होने की आशंका है।
ब्लॉक रिसोर्स सेंटर में थीं तैनात, इंस्टाग्राम से चल रहा था नेटवर्क| Kerala MDMA Case
गिरफ्तार की गईं तीनों महिला टीचर्स कोझिकोड जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित पहाड़ी कस्बे पेराम्बरा में ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) से जुड़ी थीं। ये केंद्र समग्र शिक्षा केरल के तहत संचालित होते हैं। डिस्ट्रिक्ट एंटी-नारकोटिक्स स्पेशल एक्शन फोर्स की जांच में सामने आया कि आरोपी शिक्षिकाएं सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क में मीडिएटर का काम कर रही थीं। वे इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों की पहचान करती थीं और ऑनलाइन भुगतान मिलने के बाद ड्रग्स की डिलीवरी करवाई जाती थी।
मामले की जांच गृह विभाग के ‘ऑपरेशन तूफान’ के तहत गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम कर रही है। इस टीम की अगुवाई वडाकरा के इंस्पेक्टर ए. वी. दिनेश कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार, ऐसे खुलती गई पूरी साजिश
इस मामले में पुलिस अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। सबसे पहले 26 जून को वडाकरा निवासी सफवान को एमडीएमए के साथ पकड़ा गया था। पूछताछ के दौरान उसके मोबाइल, क्यूआर कोड और बैंक खातों से जुड़े कई अहम सुराग मिले। इन्हीं जानकारियों के आधार पर 11 जुलाई को फिजिकल एजुकेशन इंस्ट्रक्टर के. सी. कीर्तना को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद 26 जुलाई को स्पेशल एजुकेटर के. काव्या को हिरासत में लिया गया, जो ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को पढ़ाती थी। 28 जुलाई को ट्रेनर वी. पी. नीष्मा और कन्नूर जिले के डिलीवरी वर्कर जिजिल कुरियाकोस को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, जिजिल ड्रग्स की डिलीवरी और पैसों के लेन-देन की जिम्मेदारी संभालता था। गिरफ्तार तीनों शिक्षिकाएं समग्र शिक्षा केरल के तहत अस्थायी अनुबंध पर कार्यरत थीं।
12-13 हजार की सैलरी, लेकिन खातों में लाखों रुपये
29 जुलाई को कन्नूर रेंज के डीआईजी के. कार्तिक और कोझिकोड रूरल पुलिस प्रमुख मेरिन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जांच के दौरान शिक्षिकाओं के बैंक खातों में लाखों रुपये के लेन-देन का पता चला है। जबकि उनकी मासिक सैलरी महज 12 से 13 हजार रुपये थी। पुलिस को शक है कि इन खातों का इस्तेमाल बड़े ड्रग्स नेटवर्क के पैसों के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी ड्रग्स की डील कराने के बदले अच्छा-खासा कमीशन कमाती थीं। इसी वजह से उनकी लाइफस्टाइल भी सामान्य कर्मचारियों की तुलना में कहीं ज्यादा आलीशान थी।
एंटी-ड्रग्स कैंपेन से जुड़ी टीचर ही बन गई ड्रग्स एजेंट
जांच में यह भी सामने आया कि कीर्तना और काव्या हमेशा साथ देखी जाती थीं और संस्थान के कर्मचारी उन्हें सिर्फ अच्छी दोस्त मानते थे। हैरानी की बात यह है कि कीर्तना स्कूल के एंटी-ड्रग्स अभियान से भी जुड़ी हुई थी और छात्रों के लिए नियमित रूप से जुम्बा क्लास आयोजित करती थी।
पुलिस का दावा है कि शुरुआत में इन महिलाओं ने खुद ड्रग्स का सेवन करना शुरू किया। बाद में जब इसकी लत और खर्च बढ़ा तो उन्होंने खुद ही ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा बनकर एजेंट के रूप में काम करना शुरू कर दिया।
स्कूली बच्चों नहीं, कॉलेज छात्रों को बनाया गया निशाना
इस मामले के सामने आने के बाद लोगों में सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कहीं स्कूल के बच्चे भी इस नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं बने। हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि शुरुआती जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है। जांच के मुताबिक आरोपी शिक्षिकाओं का मुख्य निशाना कॉलेज के छात्र थे। पुलिस को ऐसे भी संकेत मिले हैं कि इस गिरोह ने कुछ अन्य शिक्षकों को भी अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की थी। इस पहलू की अब अलग से गहन जांच की जा रही है।
जुम्बा क्लास और बन बिक्री की आड़ में चलता था पूरा खेल
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी शिक्षिकाएं जुम्बा क्लास और बन बिक्री जैसी गतिविधियों को अपने अवैध कारोबार की आड़ के रूप में इस्तेमाल करती थीं। एमडीएमए बेंगलुरु से कोझिकोड लाया जाता था। आरोपी अपने बेंगलुरु दौरे के वीडियो इंस्टाग्राम पर भी साझा करते थे ताकि किसी को उन पर शक न हो।
ग्राहकों को खाड़ी देशों के एक फोन नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था। डिजिटल पेमेंट मिलने के बाद उन्हें एक गुप्त लोकेशन भेजी जाती थी। यह ‘डेड ड्रॉप’ सिस्टम था, जहां ग्राहक खुद जाकर ड्रग्स उठा लेते थे। इस पूरी प्रक्रिया में गिरफ्तार डिलीवरी वर्कर अहम भूमिका निभाता था।
शिक्षा विभाग का सख्त एक्शन, दो टीचर्स बर्खास्त
ड्रग्स केस सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने भी तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य परियोजना निदेशालय के निर्देश पर कीर्तना और काव्या की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जबकि नीष्मा को भी बर्खास्त करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। वहीं समग्र शिक्षा केरल ने सभी जिला परियोजना समन्वयकों को तत्काल आपात बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। 29 जुलाई को जारी सर्कुलर में सभी बीआरसी कोऑर्डिनेटर्स को विशेष शिक्षकों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इस पूरे मामले ने न सिर्फ ड्रग्स नेटवर्क की नई तस्वीर सामने रखी है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।































