E20 fuel engine damage: देशभर में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इस ईंधन में 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल का मिश्रण होता है। इसके बढ़ते उपयोग के साथ ही कई वाहन मालिकों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इससे इंजन की उम्र या परफॉर्मेंस पर असर पड़ेगा। अब इस मुद्दे पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में स्थिति साफ करते हुए कहा है कि E20 फ्यूल से ज्यादातर वाहनों को किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं है। हालांकि, कुछ पुराने BS-III वाहनों में मामूली तकनीकी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
पुराने वाहनों में बदलने पड़ सकते हैं कुछ पार्ट्स| E20 fuel engine damage
राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए गडकरी ने बताया कि 1 अप्रैल 2005 से लागू BS-III मानकों वाले और वर्ष 2016 से पहले बने कुछ वाहनों में रबर के कुछ हिस्सों और गैस्केट को बदलने की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई बड़ा तकनीकी बदलाव नहीं है और नियमित सर्विस के दौरान आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए इंजन में किसी तरह की बड़ी मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी।
स्टडी में इंजन पर नहीं मिला कोई बड़ा असर
सरकार के अनुसार, E20 फ्यूल के प्रभाव का आकलन करने के लिए इंडियन ऑयल (IOCL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), SIAM और ARAI ने दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर विस्तृत परीक्षण किए। इन अध्ययनों में पाया गया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन की परफॉर्मेंस, स्टार्ट होने की क्षमता और ड्राइविंग अनुभव पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा। इसके अलावा धातु और प्लास्टिक के पुर्जों में भी कोई असामान्य बदलाव या इंजन में अतिरिक्त घिसावट के संकेत नहीं मिले।
माइलेज पर भी सरकार ने दिया जवाब
E20 पेट्रोल को लेकर माइलेज कम होने की आशंका भी कई वाहन मालिक जता रहे हैं। इस पर गडकरी ने कहा कि किसी भी वाहन का माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता। सड़क की गुणवत्ता, ट्रैफिक की स्थिति, ड्राइविंग का तरीका, वाहन की देखभाल और इंजन की हालत जैसे कई अन्य कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। ऐसे में सिर्फ E20 फ्यूल को कम माइलेज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
लंबे परीक्षण के बाद लागू किया गया E20
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल को देशभर में लागू करने से पहले कई वर्षों तक लैब टेस्ट, फील्ड ट्रायल और तकनीकी मूल्यांकन किए गए। संतोषजनक परिणाम मिलने के बाद ही इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। सरकार का कहना है कि दुनिया के कई देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक इस्तेमाल पहले से किया जा रहा है।
अगर आपके पास नया वाहन है या वह E20 फ्यूल के लिए उपयुक्त है, तो किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। वहीं, 2016 से पहले बने BS-III वाहन मालिकों को अगली सर्विस के दौरान रबर के पार्ट्स और गैस्केट की जांच करवा लेने की सलाह दी गई है, ताकि वाहन E20 पेट्रोल पर भी बिना किसी परेशानी के बेहतर प्रदर्शन करता रहे।































