Anti-Paper Leak Bill 2026: देशभर में छात्रों के भारी प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, संसद में जारी हंगामे के बीच आखिरकार एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा से पास हो गया है। लोकसभा ने 29 जुलाई 2026 को विपक्ष के भारी हंगामे और वॉकआउट के बीच ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ (Anti-Paper Leak Amendment Bill 2026) को ध्वनि मत से पारित कर दिया। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और दोषियों पर नकेल कसने के लिए यह बिल संसद के निचले सदन में लाया गया था। तो चलिए इस लेख के जरिए बिल पास कराने के दौरान क्या-क्या हुआ?
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Anti-Paper Leak Bill पास कराने के दौरान क्या-क्या हुआ?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्ष के सांसदों ने ‘नीट (NEET) पेपर लीक’ विवाद और छात्रों पर हुए पुलिसिया एक्शन को लेकर सदन के बीचों-बीच आकर जोरदार नारेबाजी की। विपक्षी सदस्य लगातार “माफी मांगो” और “No! No!” के नारे लगा रहे थे।
- राहुल गांधी का सरकार पर हमला
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने सदन में कहा कि छात्रों का यह आंदोलन उनका गुस्सा या हिंसा नहीं, बल्कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं की आवाज है। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और आरएसएस (RSS) को लेकर भी सरकार पर तीखे राजनीतिक बाण चलाए।
- सरकार का पलटवार
वहीं विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने लीक मामलों में तुरंत कार्रवाई की है और 2024 से अब तक 52 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर संसदीय मर्यादाओं की समझ न होने का भी आरोप लगाया।
भारी तनाव के बीच बिल पास
लगातार हो रहे शोर-शराबे और तनातनी के बीच, सरकार से असंतुष्ट विपक्षी दलों ने सदन से पूरी तरह वॉकआउट कर दिया। विपक्ष के वॉकआउट के बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को वोटिंग के लिए रखा, जिसे बिना किसी रुकावट के ध्वनि मत (Voice Vote) से पारित कर दिया गया। बिल पास होते ही सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा में हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पारित कर दिया गया है. लंबी चर्चा के बाद ध्वनि मत से यह बिल पास हो गया है. इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर संसद में जमकर हंगामा हुआ. इस बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर नोकझोंक भी हुई. स्पीकर ओम… pic.twitter.com/fiugQhc6B8
— Nedrick News (@nedricknews) July 29, 2026
संसद में हंगामे और नोकझोंक की वजहें
जहां एक तरफ बिल पास हो गया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस बात पर अड़ा था कि नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग (लाठीचार्ज) और क्रूरता पर सरकार पहले जवाबदेही तय करे। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह के आदेश पर ही प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिसिया बल प्रयोग की अनुमति दी गई थी। इस बयान पर सत्ता पक्ष (ट्रेजरी बेंच) ने खड़े होकर बेहद तीखी आपत्ति जताई और इसे असंसदीय करार दिया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) शिक्षा मंत्रालय को नियंत्रित कर रहा है और देश के छात्रों को ‘अंधभक्त’ बनाने की कोशिश की जा रही है। इस पर सरकार के मंत्रियों और भाजपा सांसदों ने पलटवार किया। साथ ही, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे 25 जुलाई 2026 को लेकर तंज कसा। उन्होंने सदन में कहा, “प्रधान जी को हटाकर आपने प्रधानमंत्री को बचा लिया।”
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई सहित विपक्षी नेताओं का तर्क था कि नया संशोधन विधेयक सिर्फ एक दिखावा है, क्योंकि 2024 का मूल कानून भी पेपर लीक रोकने में पूरी तरह विफल रहा था। मुख्य बिल (Anti-Paper Leak Bill ) के अलावा समाजवादी पार्टी (SP) के सांसदों ने अयोध्या में राम मंदिर के चंदे में कथित गबन (चढ़ावा चोरी) का मुद्दा उठाने का प्रयास किया। इसके साथ ही, इथेनॉल-मिश्रित ईंधन की शुरुआत को लेकर भी विपक्ष सरकार को घेर रहा था।































