Henry Nowak case: 1 जून 2026 को लंदन के साउथेम्प्टन क्राउन कोर्ट के जज विलियम मौसली केसी – साउथेम्प्टन के मानद रिकॉर्डर ने करीब 6 महीने पहले 3 दिसंबर 2025 को 18 साल के हेनरी नोवाक की हत्या के आरोप में 23 साल के एक निहंग सिख युवक विक्रम सिंह दिगवा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसमें 21 साल की सजा काटने के बाद ही विक्रम को पैरोल दी जा सकेगी.. ये एक ऐसा मुद्दा है जिसने लंदन से लेकर पंजाब तक की राजनीति गलियारों में हलचल मचाई.. इस मामले में कई बार ऐसे मोड़ आये जब ये तय करना मुश्किल था कि क्या वाकई में विक्रम सिंह दिगवा ने जानबूझ कर ये हत्या की थी.. या वो केवल हीट ऑफ द मूमेंट था। 18 साल का हेनरी की मौत वाकई में दर्दनाक थी, लेकिन सवाल ये है कि क्या इस मामले में पूरी तरह से दिगवा ही जिम्मेदार था.. अपने इस लेख में हम इस मामले को डिटेल्स में जानेंगे।
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जानें ब्रिटेन में हेनरी नोवाक मर्डर केस
दरअसल ये कहानी शुरु हुई एक सर्द रात में.. 3 दिसंबर 2025 की उस सर्द रात में रात को करीब साढ़े 11 बजे साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के Accounting and Finance का फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट जिसका नाम हेनरी नोवाक था, वो अपने दोस्तों के साथ फुटबॉल टीम के साथ जश्न मना तक वापिस यूनिवर्सिटी के पास ही पोर्ट्सवुड स्थित अपने छात्र आवास पैदल ही लौट रहा था.. हेनरी ने उस दौरान नशे में था.. हेनरी इस दौरान अपने दोस्तों से भी कॉन्टेक्ट में था, और लगातार स्नैपचैट बना रहा था लेकिन रात को करीब 11.30 बजे बेलमोंट रोड पर, सेंट डेनिस रोड के जंक्शन के पास, हेनरी और दिगवा पहली बार टकरायें। दिगवा बेलमोंट रोड के पास ही अपने परिवार के साथ रहता था। हेनरी नशे में था तो दिगवा ने उसे कोई जवाब दिये बिना ही आगे बढ़ना जरूरू समझा। लेकिन हेनरी ने दिगवा को कुठ दूर जाने के बाद अपशब्द कहने शुरु कर दिये।
इस घटना का कोई चश्मदीद नही
ब्रिटेन हो या अमेरिका, सिखों के साथ किस तरह का नस्लभेदी व्यवहार होता है, उसस, पूरी दुनिया वाकिफ है। हेनरी ने दिगवा को गंदा, बुरा आदमी कहा, औऱ साथ ही कहा कि उसे वापिस चले जाना चाहिए। दिगवा को ये अपमान ट्रिगर कर गया और उसके पास मौजूद 8 इंच के धारदार हथियार से हेनरी पर कई गंभीर वार किये गए। ये हमला इतना गहरा था कि हेनरी के छाती में जानलेवा घाव बन गया, उसके पैरों में दो गहरे घाव,बने, पेट में चाकू की नोक से एक घाव बना और चेहरे पर एक कट लगाया गया था। रात के अंधेरे में हेनरी और दिगवा की चीखें साफ सुनाई दे रही थी। इस घटना का कोई चश्मदीद नही था लेकिन ङर में बैठे लोगो ने आवाजे सुनी..आस पास के लोगों ने बताया दिगवा ने हेनरी को “तुम बचकर नहीं जा पाओगे, बड़े आदमी” और “मैं तुम्हें काट डालूँगा” जैसे शब्द बोले थे तो वहीं हेनरी ने कहा था उसे चाकू मारा गया है और वह मर रहा है, वो नस्लवादी नहीं है।
जिसे सुनने के बाद पडोसियों ने पुलिस को बुलाया था, लेकिन जब पुलिस वहां पहुंची मामला बिल्कुल अलग नजर आया। दिगवा की पगड़ी खुली हुई थी, और ऐसा लगा था कि दोनो के बीच हाथापाई हुई थी। हेनरी बार बार पुलिस से कह रहा था कि दिगवा ने चाकू से हमला किया है और वो मर रहा है लेकिन दिगवा ने कहा कि हेनरी ने उसके साथ नस्ल विरोधी व्यवहार किया है, उससे हाथापाई की और पगड़ी खोल दी।पुलिस को दिगवा की स्थिति देखकर ये सब सच लगा था, लेकिन इसी बीच जब हेनरी को पुलिस गिरफ्तार करके ले जा रही थी तभी वो बेहोश हो गया उसे आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया जहां रात को करीब 12.37 मिनट पर उसने दम तोड़ दिया.. मगर सबसे हैरानी की बात ये थी कि पुलिस के आने से पहले ही दिगवा का परिवार वहां पहुंच गया था। हत्या का चाकू किरण कौर ने छिपा दिया था.. नस्लविरोधी टिप्पणी करने जैसे आरोप हेनरी पर लगाये गए, लेकिन हैनरी की मौत ने केस का रूख बदल दिया।
दिगवा को हत्या करने के शक में गिरफ्तार किया
पुलिस ने तुरंत दिगवा को हत्या करने के शक में गिरफ्तार कर लिया। दिगवा का पूरा परिवार फिर भी हत्या करने की बात को स्वीकार नहीं कर रहा था, मगर जब दिगवा को कोर्ट ले जाया जा रहा था तब दिगवा को उसके भाई गुरप्रीत के साथ बैठने दिया गया.. दोनो ने पंजाबी भाषा में बात की थी, जिसे पुलिस ने चोरी छिपे रिकॉर्ड कर लिया था.. इस बातचीत के मुताबिक दिगवा ने कबूल किया था कि उसने नोवाक को चाकू मारे औऱ जख्म दिये थे। जिस पर उसके बाई ने कहा कि तुन्हें उसे केवल मारना या पीटना चाहिए था, उसपर कृपाण से हमला करने की क्या जरूरत थी, इतनी ही नहीं दिगवा के भाई ने उसे ये हमला सेल्फ डिफेंस में किया गया हमला कहा था। इस मामले में पुलिस की लापरवाही और आरोपी के बदलते बयानों के कारण नोवाक का अंतिम संस्कार 23 जनवरी 2026 को ब्रेंटवुड कैथेड्रल में हुआ ।
साउथेम्प्टन क्राउन कोर्ट का बड़ा फैसला
पुलिस कार्यवाई में सामने आया कि हेनरी की हत्या पूरे सोच विचार से की गई है, क्योंकि पड़ोसियों द्वारा रिकॉर्डिंग में कही भी हमले के दौरान पगड़ी उतरी हुई नहीं थी। झूट बोला गया, केस को बरगलाया गया, हथियार छिपाये गए यानि की शुरु से ही मामले को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही थी। मामले की जांच के बाद फैसला 27 मई को जूरी विचार-विमर्श के लिए चला गया, वही 28 मई को आत्मरक्षा के दावों को खारिज कर हेनरू की हत्या का दोषी माना गया। कोर्ट ने दिगवा को आजीवन कारावास की सजा दी जिसमें 21 साल न्यूनतम उसे जेल में बिताना पड़ेगा औऱ और उसकी मां को 3 साल की सजा सुनाई गई।
इस एक घटना ने लंदन में फिर से सिख समुदाय के प्रति लोगो में गुस्सा और नफरत भर दिया। उनपर नस्लिय हमले बढ़ गये है। वहीं सिख संगठन का कहना था कि ये हत्या सिख धर्म से रिलेटेड नहीं है, बल्कि ग्रेज़ के एक स्थानीय गुरुद्वारे के सिख संगठन ने नोवाक की माँ से मुलाकात कर गहरी संवेदना और समर्थन दिखाया था। इस मुकदमे ने एक बार फिर से सिख मूल्यों को लेकर सवाल खड़े कर दिया है.. और उनके प्रति अविश्वास भी पैदा किया है। सदियों की साख मिट्टी में मिलने लगी.. ऐसे में जरूरी ये है कि सिख समुदाय अपना भरोसा फिर से जीते।






























