Mamata Banerjee controversy: पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों लगातार उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक साथ कई विवादों के केंद्र में हैं। एक ओर उनके कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें वह अपने ही कार्यकर्ताओं के साथ सख्त व्यवहार करती दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती बगावत, नेताओं का पार्टी छोड़ना और पार्टी फंड से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर उठे सवाल उनकी मुश्किलें बढ़ाते नजर आ रहे हैं। विपक्ष इन सभी घटनाओं को जोड़कर सरकार और पार्टी नेतृत्व पर लगातार निशाना साध रहा है।
बरुईपुर की रैली में मचा हंगामा, वायरल हुआ थप्पड़ वाला वीडियो| Mamata Banerjee controversy
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब दक्षिण 24 परगना के बरुईपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ हुई कथित आपराधिक घटना के विरोध में टीएमसी के छात्र और युवा संगठनों ने विरोध रैली निकाली। इस रैली का नेतृत्व खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कर रही थीं। रैली के दौरान टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नारेबाजी, बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। आरोप है कि कुछ लोगों ने रैली पर अंडे भी फेंके, जिसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। हंगामे में कई कार्यकर्ता घायल हुए और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इसी दौरान जब ममता बनर्जी घायल कार्यकर्ताओं को अस्पताल भेजने और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थीं, तभी सुरक्षा घेरा बना रहे एक कार्यकर्ता पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए थप्पड़ मार दिया। वायरल वीडियो में वह कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को धक्का देते और पीठ पर थपथपाते या मारते हुए भी दिखाई दे रही हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए।
विपक्ष ने साधा निशाना, कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने उठाए सवाल
घटना के बाद कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री का ऐसा व्यवहार उचित नहीं है और ऐसा लगता है कि सत्ता से बाहर होने के बाद उनका संतुलन प्रभावित हुआ है। वहीं बीजेपी नेता सुकांता मजूमदार ने दावा किया कि चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी लगातार दबाव में हैं और उसी का असर उनके सार्वजनिक व्यवहार में दिखाई दे रहा है। हालांकि टीएमसी की ओर से इस मामले पर यही कहा गया कि रैली के दौरान हालात बेहद तनावपूर्ण थे और मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थीं।
पार्टी छोड़ रहे नेताओं ने बढ़ाई ममता की चिंता
ममता बनर्जी के लिए चुनौती केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है। पार्टी के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। हाल के दिनों में कई नेताओं के टीएमसी छोड़कर बीजेपी में जाने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है। पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक के बीजेपी में शामिल होने के बाद माना जा रहा है कि आगामी राज्यसभा उपचुनाव में उन्हें बीजेपी उम्मीदवार बना सकती है। इन घटनाओं को टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
लगातार हो रहे दलबदल पर ममता बनर्जी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे खुलकर चले जाएं। बीच का रास्ता अपनाने वालों के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे बागी नेताओं के बहकावे में न आएं और संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं के संघर्ष को याद रखें।
‘मुझे चुप कराने के लिए मारना पड़ेगा’—ममता का भावुक बयान
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने कहा कि अगर कोई उनका चुनाव चिह्न छीनने की कोशिश करेगा तो वह खुद उसे गले में लटकाकर जनता के बीच जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें डराकर या दबाकर चुप नहीं कराया जा सकता और अगर कोई ऐसा करना चाहता है तो उसे उन्हें मारना पड़ेगा। उनके इस बयान को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
160 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन पर उठे सवाल
इसी बीच टीएमसी और अभिषेक बनर्जी से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन का मामला भी चर्चा में है। जांच एजेंसियों के अनुसार, टीएमसी के खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन (Carewell Aviation) नामक कंपनी को ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल एक प्राइवेट जेट और एक हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया, जिनकी कुल कीमत लगभग 112 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जांच में सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठाया गया है कि जिन विमानों की खरीद के लिए पार्टी के फंड का इस्तेमाल हुआ, बाद में उन्हीं विमानों के इस्तेमाल के लिए पार्टी की ओर से उसी कंपनी को किराया भी दिया जाता रहा। जांच एजेंसियां इस व्यवस्था को संदिग्ध मानते हुए इसकी जांच कर रही हैं। इसके अलावा हेलीकॉप्टर खरीद से जुड़े मामले में केमैन आइलैंड्स की एक कंपनी से 1.7 मिलियन डॉलर का अनसिक्योर्ड लोन लिए जाने का भी आरोप सामने आया है। इसी वजह से मामले की जांच और व्यापक हो गई है।
‘पार्टी का पैसा किसके लिए?’—बागी नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप
टीएमसी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के पैसों से विमान खरीदे गए और बाद में उसी कंपनी को किराया दिया गया। उनके मुताबिक यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला हो सकता है। उन्होंने पूरे प्रकरण की केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से क्या जवाब दिया गया है, यह स्पष्ट नहीं है। मामले की जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।
सियासी दबाव के बीच बढ़ीं चुनौतियां
फिलहाल ममता बनर्जी कई मोर्चों पर राजनीतिक दबाव का सामना कर रही हैं। एक तरफ वायरल वीडियो उनकी छवि को लेकर बहस छेड़े हुए हैं, दूसरी तरफ पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी संगठन के लिए चुनौती बनती दिख रही है। वहीं पार्टी फंड और विमान खरीद से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन के आरोप विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मुद्दा दे रहे हैं।
हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और टीएमसी की राजनीतिक रणनीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
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