Indian Army Logistics Drone: भारतीय सेना जल्द ही हिमालय के दुर्गम और बर्फीले इलाकों में अपनी लॉजिस्टिक क्षमता को नई ऊंचाई देने जा रही है। लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों तक जरूरी सामान पहुंचाना लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है। अब इस चुनौती से निपटने के लिए सेना आधुनिक लॉजिस्टिक्स ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इन स्वदेशी ड्रोन की मदद से कठिन मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों में भी कम समय और कम लागत में जरूरी रसद पहुंचाई जा सकेगी।
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पहाड़ों में सप्लाई पहुंचाना हमेशा रहा है चुनौती| Indian Army Logistics Drone
भारत की उत्तरी सीमाएं दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में आती हैं। कई चौकियां 18 हजार फीट या उससे अधिक ऊंचाई पर स्थित हैं, जहां सामान्य परिवहन साधनों का इस्तेमाल आसान नहीं होता। अब तक सेना को इन इलाकों में खाद्य सामग्री, दवाइयां, हथियार और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए पुराने चीता हेलीकॉप्टरों या फिर पैदल जवानों पर निर्भर रहना पड़ता था।
हेलीकॉप्टरों से सप्लाई पहुंचाने में काफी खर्च आता है और खराब मौसम में उड़ान भरना भी संभव नहीं होता। वहीं पैदल रास्तों से सामान ले जाने में काफी समय और मेहनत लगती है। ऐसे में सेना अब ड्रोन तकनीक को एक प्रभावी विकल्प के रूप में अपना रही है।
सेना को चाहिए हाई-एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक्स ड्रोन
भारतीय सेना ऐसे ड्रोन चाहती है जो करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर भी आसानी से उड़ान भर सकें और 20 से 40 किलोग्राम तक का सामान सुरक्षित तरीके से पहुंचा सकें। इन ड्रोन का मकसद केवल रसद पहुंचाना ही नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में जवानों तक जरूरी सामग्री समय पर पहुंचाना भी है। इनकी मदद से सीमावर्ती चौकियों तक सप्लाई पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और कम लागत में पहुंचाई जा सकेगी।
एयर हंस ड्रोन की खासियत
भारतीय कंपनी बॉनवी एयरो ने सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एयर हंस नाम का लॉजिस्टिक्स ड्रोन तैयार किया है। यह ड्रोन लगभग 20 किलोग्राम तक वजन उठा सकता है और 12 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगभग 16,500 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है, जिससे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
खराब मौसम में भी काम करेगा ‘येती’ ड्रोन
दूसरी ओर, आइडियाफोर्ज कंपनी का विकसित किया गया येती ड्रोन और भी अधिक क्षमता वाला माना जा रहा है। इसे विशेष रूप से कठिन मौसम और पहाड़ी इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है। यह ड्रोन 50 से 200 किलोग्राम तक का वजन उठाने में सक्षम है और लगभग 6,500 मीटर (करीब 21,300 फीट) की ऊंचाई तक उड़ सकता है। ऐसे में यह अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित भारतीय चौकियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
हिम-ड्रोन-ए-थॉन से मिल रही नई तकनीक
भारतीय सेना स्वदेशी ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए हिम-ड्रोन-ए-थॉन जैसी पहल भी चला रही है। इस कार्यक्रम के तहत देश की विभिन्न ड्रोन निर्माण कंपनियों को वास्तविक परिस्थितियों में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने का मौका दिया गया। करीब 4,000 से 5,000 मीटर की ऊंचाई पर हुए इन परीक्षणों में लॉजिस्टिक्स ड्रोन, सर्विलांस ड्रोन और स्वार्म ड्रोन तकनीक का सफल प्रदर्शन किया गया। इससे सेना को वास्तविक परिस्थितियों में इनकी क्षमता का आकलन करने में मदद मिली।
लेह बन रहा है डिफेंस इनोवेशन का केंद्र
हाल ही में लेह में आयोजित हिमटेक कार्यक्रम ने लद्दाख को रक्षा तकनीक और नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है। यहां स्वदेशी कंपनियों ने आधुनिक ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया, जिससे सेना को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप समाधान मिलने की उम्मीद बढ़ी है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विकसित ये ड्रोन भविष्य में भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑटोनॉमस एरियल नेटवर्क के ज़रिए माइनस टेम्परेचर और दुर्गम इलाकों में भी लॉजिस्टिक्स सप्लाई में रुकावट नहीं आएगी।
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