Akshay Kumar: न कोई गॉडफादर, न कोई फिल्मी बैकग्राउंड! पास में था तो सिर्फ ताइक्वांडो का ब्लैक बेल्ट, मुए थाई का जुनून और कभी न टूटने वाला हौसला! आज हम जिसे ‘खिलाड़ी नंबर 1’ कहते हैं, वो कभी बैंकॉक के एक छोटे से रेस्तरां में असिस्टेंट शेफ का काम करता था, बर्तन धोता था और सब्जियां काटता था। बिना किसी सपोर्ट के, सिर्फ अपने दम पर पूरे बॉलीवुड पर राज करना और बड़े-बड़ों को घुटनों पर ला देना… कोई मज़ाक नहीं है! तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं दिनभर रेस्तरां में नौकरी करने वाला यह आम लड़का, राजीव भाटिया से अक्षय कुमार कैसे बना?
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Akshay Kumar का ताइक्वांडो से सिनेमा तक का सफर
कहानी शुरू होती है मुंबई की गलियों से, जहाँ राजीव भाटिया ने ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट तो हासिल कर ली थी, लेकिन मार्शल आर्ट्स को और गहराई से सीखने की भूख उन्हें थाईलैंड के बैंकॉक ले गई। वहाँ उन्होंने ‘मुए थाई’ (Muay Thai) यानी थाई बॉक्सिंग की वो खतरनाक ट्रेनिंग शुरू की, जिसे दुनिया की सबसे कठिन फाइटिंग स्टाइल्स में गिना जाता है। लेकिन बैंकॉक में रहना और ट्रेनिंग करना मुफ़्त नहीं था।
गुज़ारे के लिए राजीव ने एक रेस्तरां में असिस्टेंट शेफ की नौकरी कर ली। उनका शेड्यूल होश उड़ा देने वाला था—सुबह 4 बजे उठकर बिना थके मार्शल आर्ट्स की कड़क ट्रेनिंग करना, और फिर दिनभर रेस्तरां के गर्म किचन में बर्तन मांजना, सब्जियां काटना और खाना बनाना। पैरों में थकान होती थी, हाथों में छाले पड़ते थे, लेकिन आंखों में एक ही सपना था-मार्शल आर्ट्स का मास्टर बनना।
राजीव भाटिया से कैसे बने अक्षय कुमार
सालों की कड़ी मेहनत के बाद जब राजीव भाटिया मुंबई लौटे, तो उन्होंने पेट पालने के लिए बच्चों को मार्शल आर्ट्स सिखाना शुरू किया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। उनकी क्लास के एक बच्चे के पिता फोटोग्राफर थे। उन्होंने राजीव की शानदार 6-फीट की कद-काठी और फिटनेस देखकर कहा—’तुम मॉडलिंग क्यों नहीं करते?’ राजीव मान गए।
अपने पहले मॉडलिंग असाइनमेंट के लिए उन्होंने सिर्फ 2 घंटे पोज़ दिए। और जानते हैं उन्हें कितने पैसे मिले? पूरे 5,000 रुपये! यह उतनी रकम थी, जितनी वे महीने भर बच्चों को कराटे सिखाकर भी नहीं कमा पाते थे। बस, यहीं से राजीव को समझ आ गया कि कैमरा उनका इंतज़ार कर रहा है।
साल 1987 में उन्हें फिल्म ‘आज’ में सिर्फ 10 सेकंड का एक रोल मिला—एक कराटे इंस्ट्रक्टर का। फिल्म में लीड हीरो का नाम था ‘अक्षय’। राजीव को यह नाम इतना पसंद आया कि वे अगले ही दिन कोर्ट गए और अपना नाम बदलकर हमेशा के लिए Akshay Kumar रख लिया।
खिलाड़ी कुमार की एंट्री
इसके बाद आई साल 1992 की सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म—’खिलाड़ी’। फिल्म ब्लॉकबस्टर रही, और बैंकॉक के किचन से निकला वो लड़का रातों-रात पूरे देश का ‘खिलाड़ी नंबर 1’ बन गया। साल 1992 की फिल्म ‘खिलाड़ी’ तो सिर्फ एक शुरुआत थी। इसके बाद अक्षय कुमार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बॉलीवुड को एक के बाद एक कई धमाकेदार और सुपरहिट फिल्में दीं! ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ और ‘इंटरनेशनल खिलाड़ी’—अक्षय (Akshay Kumar) के नाम के आगे ‘खिलाड़ी’ शब्द ऐसा जुड़ा कि वे बॉक्स ऑफिस के सबसे भरोसेमंद और बड़े एक्शन स्टार बन गए।
नब्बे के दशक में अगर थिएटर में सीटी और तालियों की गूंज सुनाई देती थी, तो समझ जाइए स्क्रीन पर खिलाड़ी कुमार की एंट्री हो चुकी है! उन्होंने सिर्फ एक्शन ही नहीं, बल्कि रोमांस और सस्पेंस का ऐसा तड़का लगाया कि दर्शकों के बीच उनका क्रेज सातवें आसमान पर पहुंच गया।
दशकों बीत गए, सिनेमा बदल गया, कई नए चेहरे आए और चले गए लेकिन देखा जाए तो आज भी खिलाड़ी कुमार का क्रेज रत्ती भर भी कम नहीं हुआ है! आज भी 50 पार की उम्र में जब वे स्क्रीन पर आते हैं, तो फिटनेस और एक्शन के मामले में नए-नए एक्टर्स के पसीने छूट जाते हैं।
बिना डुप्लीकेट के किए खतरनाक स्टंट
वही सुबह 4 बजे उठने का कड़ा अनुशासन, बिना स्टंट डबल (डुप्लीकेट) के खतरनाक रिस्क लेने का जज्बा, और साल में 3-4 फिल्में देकर बॉक्स ऑफिस को हिला देने की ताकत—यह सिर्फ अक्षय कुमार (Akshay Kumar) ही कर सकते हैं। बैंकॉक के किचन में बर्तन धोने वाले उस राजीव भाटिया ने साबित कर दिया कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो आप अपनी किस्मत खुद लिख सकते हैं। तभी तो वे आज भी हैं इंडियन सिनेमा के असली ‘खिलाड़ी नंबर 1’ हैं तो अक्षय कुमार की कौन सी फिल्म आपकी सबसे ज्यादा फेवरेट है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।






























