Bharat Tiwari Case: भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब विवाद और गहरा गया है। एक तरफ मृतक के परिजन और ग्रामीण पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन और सड़क जाम को लेकर तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर बड़ी कार्रवाई की है। इन FIR में मृतक भरत तिवारी के पिता, भाई, बिलौटी पंचायत के मुखिया समेत कई नामजद और अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
क्या है पूरा मामला? Bharat Tiwari Case
यह घटना शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव की है। पुलिस के अनुसार भरत तिवारी हथियार के साथ मौजूद था और पुलिस टीम को धमका रहा था। पुलिस का दावा है कि जब उसकी घेराबंदी की गई तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। इसके जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें भरत तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल होने के बाद उसे तत्काल आरा सदर अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए पटना स्थित पीएमसीएच रेफर कर दिया। हालांकि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद गांव में बढ़ा तनाव
भरत तिवारी की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, माहौल तनावपूर्ण हो गया। परिजन और ग्रामीण शव लेकर सड़क पर उतर आए और आरा-बक्सर मुख्य मार्ग को जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कार्रवाई की मांग की। कई घंटों तक सड़क जाम रहने से यातायात प्रभावित रहा। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को स्थिति संभालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
परिजनों ने पुलिस की कहानी पर उठाए सवाल
मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने हथियार फेंक दिया था और सरेंडर कर दिया था। इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। उन्होंने दावा किया कि भरत तिवारी के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। परिवार का आरोप है कि उसे जानबूझकर निशाना बनाया गया। परिजनों का कहना है कि यह पुलिस मुठभेड़ नहीं बल्कि एक सोची-समझी हत्या है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा कथित वीडियो
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि वीडियो एनकाउंटर से पहले का है, जिसमें भरत तिवारी सरेंडर करता नजर आ रहा है। हालांकि वीडियो की सत्यता और उसके संदर्भ की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले को लेकर बहस और तेज हो गई है। ग्रामीण और परिजन इस वीडियो को अपनी बात का समर्थन बता रहे हैं।
विरोध-प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई
घटना के बाद हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने भी कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस की ओर से दर्ज तीन FIR में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने सड़क जाम कर सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई, कानून-व्यवस्था को प्रभावित किया और हथियारों का प्रदर्शन कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस ने बिलौटी पंचायत के मुखिया समेत कई लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। साथ ही अज्ञात लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जांच पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बता रही है। अब इस मामले की जांच और संभावित साक्ष्यों पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एनकाउंटर के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और दोनों पक्षों के दावों में कितनी सच्चाई है।
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