ट्रंप को दिया करारा जवाब… मैक्रों से भी ले चुकी हैं पंगा! यूरोप की सबसे खुर्राट लीडर हैं मेलोनी| Trump vs Meloni

Nandani | Nedrick News Italy Published: 21 जून 2026, 02:07 PM Updated: 21 जून 2026, 02:07 PM
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Trump vs Meloni: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। इस बार वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनका सार्वजनिक विवाद है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब मेलोनी ने किसी बड़े नेता या प्रभावशाली संस्था के खिलाफ खुलकर अपनी राय रखी हो। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से लेकर इटली की अदालतों तक, कई मौकों पर उन्होंने बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी है। यही वजह है कि समर्थक उन्हें मजबूत नेतृत्व का चेहरा मानते हैं, जबकि आलोचक उनके बयानों को विवादों से जोड़कर देखते हैं।

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ट्रंप के बयान पर दिया तीखा जवाब| Trump vs Meloni

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप और जॉर्जिया मेलोनी के बीच बयानबाजी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। विवाद तब शुरू हुआ जब ट्रंप ने दावा किया कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए काफी कोशिशें की थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने मेलोनी के साथ फोटो केवल सहानुभूति के कारण खिंचवाई थी।

माना जा रहा है कि ट्रंप की नाराजगी की एक वजह यह भी थी कि ईरान से जुड़े तनावपूर्ण दौर के दौरान इटली ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपनी जमीन पर उतरने की अनुमति नहीं दी थी। ट्रंप के इन बयानों पर मेलोनी ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता किसी विदेशी नेता की दोस्ती पर निर्भर नहीं करती।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ट्रंप के दावे तथ्यहीन हैं और उन्हें यह समझ नहीं आता कि अमेरिका का राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के बारे में इस तरह की बातें क्यों करता है। मेलोनी ने यह भी दोहराया कि इटली एक संप्रभु देश है और उसकी जमीन व सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल को लेकर फैसला इटली ही करेगा।

मैक्रों से भी हो चुकी है तीखी नोकझोंक

जॉर्जिया मेलोनी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच भी कई बार सार्वजनिक मतभेद सामने आ चुके हैं। खासकर आव्रजन नीति और यूरोप की दिशा को लेकर दोनों नेताओं के विचार अक्सर अलग रहे हैं।

फ्रांस के ल्योन शहर में दक्षिणपंथी कार्यकर्ता क्विंटिन डेरांक की हत्या के बाद मेलोनी ने इस घटना को पूरे यूरोप के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया था। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मैक्रों ने कहा था कि राष्ट्रवादी नेताओं को दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

मैक्रों की टिप्पणी के जवाब में मेलोनी ने दो टूक कहा कि वैचारिक हिंसा के खिलाफ बोलना उनकी जिम्मेदारी है और वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगी, चाहे मामला किसी भी देश का क्यों न हो।

यूरोप में बढ़ते इस्लामीकरण पर जताई थी चिंता

जॉर्जिया मेलोनी का एक पुराना वीडियो भी समय-समय पर चर्चा में आता रहा है। वर्ष 2018 के इस वीडियो में उन्होंने यूरोप में बढ़ते इस्लामीकरण और कुछ सांस्कृतिक केंद्रों की गतिविधियों को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

उन्होंने कहा था कि यूरोपीय मूल्यों और इस्लामी संस्कृति की कुछ व्याख्याओं के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है। उनके इस बयान को लेकर पाकिस्तान सहित कई देशों में उनकी आलोचना भी हुई थी। उस समय मेलोनी प्रधानमंत्री नहीं थीं, लेकिन उन्होंने अवैध प्रवास को रोकने और ऐसे लोगों को वापस भेजने के लिए ब्रिटेन और अल्बानिया जैसे देशों के साथ सहयोग की बात कही थी।

फिलिस्तीन को मान्यता देने के मुद्दे पर भी अलग रुख

मध्य पूर्व के मुद्दों पर भी मेलोनी का रुख कई बार चर्चा में रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को तत्काल स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। साथ ही उन्होंने उस अमेरिकी रुख का समर्थन किया जिसमें हमास से हथियार छोड़ने और इजरायली बंधकों की रिहाई की मांग की गई थी।

हालांकि इटली के भीतर उनके इस रुख का विरोध भी हुआ। इजरायल के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर लाखों लोगों और विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन किए, लेकिन मेलोनी अपने फैसले पर कायम रहीं।

पोर्न वेबसाइट के खिलाफ भी लिया सख्त एक्शन

जॉर्जिया मेलोनी तब भी सुर्खियों में आई थीं जब एक पोर्न वेबसाइट ने उनकी, उनकी बहन आरियाना मेलोनी और विपक्षी नेता एली श्लेन की तस्वीरों के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ कर उन्हें आपत्तिजनक रूप में प्रकाशित किया था।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मेलोनी ने कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद संबंधित वेबसाइट को अपना संचालन बंद करना पड़ा। इस कदम को महिलाओं की गरिमा और डिजिटल सुरक्षा के मुद्दे पर एक सख्त संदेश के तौर पर देखा गया।

अदालत के फैसले पर भी उठाए थे सवाल

इटली की प्रधानमंत्री ने कई बार न्यायिक फैसलों पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी है। एक मामले में इटली की अदालत ने मिस्र मूल के इमाम मोहम्मद शाहिन को रिहा कर दिया था, जबकि सरकार उसे देश से बाहर भेजना चाहती थी।

इस फैसले पर मेलोनी ने नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया था कि यदि सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं के बावजूद ऐसे लोगों को राहत मिलती रहेगी तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। उनके इस बयान ने इटली में न्यायपालिका और सरकार के संबंधों पर नई बहस छेड़ दी थी।

बेबाक छवि बनी पहचान

जॉर्जिया मेलोनी की राजनीतिक शैली उन्हें यूरोप के अन्य नेताओं से अलग बनाती है। चाहे मामला अमेरिका के राष्ट्रपति को जवाब देने का हो, फ्रांस से मतभेद का हो या फिर घरेलू मुद्दों पर सख्त रुख अपनाने का, मेलोनी अक्सर बिना झिझक अपनी बात रखती हैं। यही बेबाकी उन्हें समर्थकों के बीच लोकप्रिय बनाती है, जबकि विरोधियों के लिए वह लगातार बहस और विवाद का विषय बनी रहती हैं।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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