Vedanta vs Adani: देश की प्रमुख खनन और धातु क्षेत्र की कंपनी वेदांता समूह एक साथ कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक ओर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत कंपनी से जुड़े परिसरों पर बड़ी कार्रवाई की है, वहीं दूसरी तरफ जयप्रकाश एसोसिएट्स (JAL) के अधिग्रहण को लेकर अडानी समूह के साथ उसका कानूनी विवाद भी लगातार गहराता जा रहा है। इन दोनों घटनाक्रमों ने उद्योग जगत और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
दिल्ली, राजस्थान समेत कई स्थानों पर ED की कार्रवाई| Vedanta vs Adani
प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार, 2 जून को वेदांता समूह से जुड़े विभिन्न परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत कथित विदेशी मुद्रा उल्लंघनों और सीमा पार वित्तीय लेन-देन की जांच के सिलसिले में की गई।
सूत्रों के मुताबिक, तलाशी अभियान दिल्ली, राजस्थान और देश के कई अन्य प्रमुख स्थानों पर स्थित कंपनी के कार्यालयों और संबंधित परिसरों में चलाया गया। जांच एजेंसी कथित तौर पर विदेशी फंड ट्रांसफर और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन से जुड़े कुछ मामलों की पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि यह मामला FEMA के दीवानी प्रावधानों के अंतर्गत दर्ज संभावित उल्लंघनों से जुड़ा है। हालांकि, ED की ओर से अभी तक जांच के निष्कर्षों को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वेदांता का जवाब- कानूनों का पालन हमारी प्राथमिकता
ED की कार्रवाई के बाद वेदांता समूह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वेदांता जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है और मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रवक्ता के अनुसार, कंपनी सभी लागू नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल नियामक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए इस समय कंपनी की ओर से विस्तृत टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
वैश्विक स्तर पर फैला है वेदांता का कारोबार
अरबपति उद्योगपति अनिल अग्रवाल द्वारा स्थापित वेदांता लिमिटेड देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक संसाधन और धातु कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी का कारोबार केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अफ्रीका, मध्य पूर्व और पूर्वी एशिया के कई देशों में भी फैला हुआ है।
वेदांता मेटल्स, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय है और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति रखती है। ऐसे में ED की कार्रवाई को कॉरपोरेट जगत में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
अडानी-वेदांता विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें
ED की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब वेदांता पहले से ही जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण को लेकर अडानी समूह के साथ कानूनी लड़ाई लड़ रही है। मार्च 2026 के अंत में अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया था कि वेदांता को जयप्रकाश एसोसिएट्स की परिसंपत्तियां खरीदने के लिए लिखित पुष्टि मिल चुकी थी। कंपनी का कहना था कि उसने बोली प्रक्रिया में जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं और अधिग्रहण का रास्ता अडानी समूह के पक्ष में चला गया।
इस फैसले से असंतुष्ट वेदांता ने पहले एनसीएलएटी और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने अडानी समूह की समाधान योजना पर रोक लगाने की मांग भी की थी।
बोली प्रक्रिया पर उठाए सवाल
वेदांता का आरोप है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स के कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने बोली प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती। कंपनी का दावा था कि नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के आधार पर उसकी 12,505.85 करोड़ रुपये की पेशकश सबसे बेहतर थी। वेदांता का यह भी कहना था कि उसकी बोली सकल मूल्य के आधार पर अडानी समूह की बोली से लगभग 3,400 करोड़ रुपये अधिक थी और एनपीवी के हिसाब से भी करीब 500 करोड़ रुपये का अंतर था।
हालांकि कर्जदाताओं ने अडानी समूह की योजना को प्राथमिकता दी। इसके पीछे प्रमुख वजह यह बताई गई कि अडानी एंटरप्राइजेज ने तत्काल नकद भुगतान और अपेक्षाकृत तेज भुगतान की पेशकश की थी, जिसे ऋणदाताओं ने अधिक व्यावहारिक माना।
NCLAT से वेदांता को बड़ा झटका
वेदांता को इस मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) से भी राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा की दो सदस्यीय पीठ ने कंपनी की दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि वेदांता ऐसा कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर पाई, जिसके आधार पर एनसीएलटी के आदेश में हस्तक्षेप किया जा सके। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि कर्जदाताओं की समिति का निर्णय विभिन्न समाधान योजनाओं के समग्र मूल्यांकन और उसकी व्यावसायिक समझ पर आधारित था।
NCLAT ने यह भी कहा कि समाधान प्रक्रिया के दौरान समाधान पेशेवर की ओर से किसी महत्वपूर्ण अनियमितता का प्रमाण नहीं मिला है। ऐसे में केवल इस आधार पर कि किसी अन्य बोली का मूल्य अधिक था, कर्जदाताओं के निर्णय को मनमाना नहीं कहा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
इससे पहले वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में भी इस फैसले को चुनौती दी थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने केवल इतना निर्देश दिया था कि जयप्रकाश एसोसिएट्स की निगरानी समिति किसी बड़े नीतिगत फैसले से पहले संबंधित न्यायाधिकरण की अनुमति ले। उल्लेखनीय है कि अडानी एंटरप्राइजेज की बोली को कर्जदाताओं के लगभग 89 प्रतिशत वोट मिले थे, जिसके बाद उसे विजेता घोषित किया गया था।
57 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में फंसी थी JAL
गौरतलब है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड को करीब 57,185 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में चूक के बाद जून 2024 में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के तहत लाया गया था। इसके बाद कंपनी के अधिग्रहण के लिए कई बड़ी कंपनियों ने रुचि दिखाई थी, जिनमें अडानी एंटरप्राइजेज, वेदांता लिमिटेड और डालमिया भारत प्रमुख दावेदार थे।
फिलहाल एक तरफ वेदांता पर FEMA जांच की तलवार लटक रही है, वहीं दूसरी तरफ अडानी समूह के साथ चल रही कानूनी लड़ाई में भी उसे लगातार झटके मिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि देश के इस बड़े कॉरपोरेट समूह की रणनीति आगे क्या रूप लेती है और जांच एजेंसियों की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है।






























