Defence Minister Khawaja Asif: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान ने देश में इतिहास, पहचान और शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने खुलकर कहा कि पाकिस्तान के बच्चों को ऐसा इतिहास पढ़ाया जा रहा है जो पूरी तरह तथ्यात्मक नहीं है। उनके मुताबिक देश के लोगों को उनकी असली जड़ों और सभ्यता से दूर किया गया है।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान के कई मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों को स्वीकार करने से बचते हैं। उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तानी मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं। पाकिस्तान के आधे लोग यह दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे, जबकि हकीकत कुछ और है।” आसिफ का कहना था कि यह सोच अचानक नहीं बनी, बल्कि सालों से इसे एक खास दिशा में तैयार किया गया।
इतिहास की किताबों से हटाए गए हिंदू शासक? Defence Minister Khawaja Asif
रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था और इतिहास की किताबों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि देश में प्राचीन भारतीय इतिहास और हिंदू शासकों को जानबूझकर कम जगह दी गई। आसिफ ने कहा, “हमने चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक जैसे शासकों को इतिहास की किताबों से लगभग हटा दिया क्योंकि वे हिंदू थे।”
उन्होंने आगे कहा कि उनके खुद के पूर्वज हिंदू थे और इससे उनकी पाकिस्तानी पहचान पर कोई असर नहीं पड़ता। आसिफ ने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर मेरे पूर्वज हिंदू थे तो क्या मैं कम पाकिस्तानी हो जाता हूं?” उनके मुताबिक पाकिस्तान में जो इतिहास पढ़ाया गया, उसका मकसद आने वाली पीढ़ियों की सोच को एक खास विचारधारा के मुताबिक तैयार करना था।
“तथ्यात्मक इतिहास नहीं पढ़ रहे बच्चे”
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान में समय के साथ समाज की सोच को बदला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की वैश्विक रणनीतियों और युद्धों में पाकिस्तान की भूमिका तय करने के लिए देश के अंदर एक खास तरह का नैरेटिव बनाया गया। उसी के अनुसार इतिहास को भी पेश किया गया।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज पाकिस्तान में कई युवा ऐसे हैं जिन्हें यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक कौन थे। आसिफ के मुताबिक बच्चों को तथ्यात्मक और संतुलित इतिहास पढ़ाने की जरूरत है ताकि वे अपनी असली सांस्कृतिक पहचान को समझ सकें।
इजरायल को मान्यता देने पर भी दिया बड़ा बयान
ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह पहले से ही अमेरिका और इजरायल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा में हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने साफ कहा कि पाकिस्तान किसी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा जो उसकी बुनियादी सोच और पुराने रुख के खिलाफ हो। उन्होंने कहा, “मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी मूल सोच से टकराता हो।”
फिलिस्तीन मुद्दे पर कायम है पाकिस्तान का रुख
आसिफ ने दोहराया कि पाकिस्तान फिलिस्तीन मुद्दे पर अपने पुराने रुख पर कायम है। उन्होंने कहा कि जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश नहीं बनाया जाता, तब तक पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा।
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी भी इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भी साफ तौर पर लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है।
अमेरिका में भी दिखी प्रतिक्रिया
ख्वाजा आसिफ के बयान के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इजरायल के प्रति पाकिस्तान की सोच लंबे समय से नकारात्मक रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे में अमेरिका-ईरान या इजरायल से जुड़े मामलों में पाकिस्तान की मध्यस्थता “समस्याओं से भरी” हो सकती है।




























