Moushumi Chatterjee News: दिग्गज अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है। साल 1967 में फिल्म ‘बालिका बधू’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मौसमी ने बहुत कम समय में दर्शकों के दिलों में जगह बना ली थी। इस फिल्म की सफलता के बाद वह हिंदी और बंगाली सिनेमा का एक जाना-पहचाना नाम बन गईं। अपने लंबे करियर में उन्होंने राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन जैसे कई बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर की और कई यादगार किरदार निभाए।
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‘बालिका बधू’ से मिली पहचान, फिर नहीं रुका सफर| Moushumi Chatterjee News
मौसमी चटर्जी की पहली ही फिल्म ने उन्हें लोकप्रियता के उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जहां से उनका करियर लगातार आगे बढ़ता गया। इसके बाद उन्होंने कई हिट और क्लासिक फिल्मों में काम किया। उनकी एक्टिंग की सादगी और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया। चाहे गंभीर किरदार हो या हल्का-फुल्का रोल, मौसमी हर भूमिका में फिट बैठती नजर आईं।
15 साल की उम्र में शादी, 10वीं क्लास में थीं पढ़ाई
हाल ही में एक बातचीत के दौरान मौसमी चटर्जी ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और भावुक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी शादी सिर्फ 15 साल की उम्र में हो गई थी। उस समय वह 10वीं क्लास में पढ़ाई कर रही थीं। साल 1972 में उन्होंने प्रोड्यूसर जयंत मुखर्जी से शादी की थी।
मौसमी ने बताया कि ‘बालिका बधू’ की सफलता के बाद उनके लिए रिश्तों की लाइन लग गई थी। उनके शब्दों में, “उस समय हर कोई मुझे अपनी बहू बनाना चाहता था। हर कोई चाहता था कि मैं उनके घर की बहू बनूं।” फिल्म के बाद उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि परिवार के भीतर भी शादी को लेकर चर्चा तेज हो गई थी।
बुआ की आखिरी इच्छा ने बदल दिया फैसला
मौसमी चटर्जी ने यह भी बताया कि उनकी शादी जल्दी होने की एक अहम वजह उनकी बड़ी बुआ थीं। वह अपनी बुआ के बेहद करीब थीं, जो उस समय कैंसर के आखिरी स्टेज में थीं। मौसमी ने बताया कि उनकी बुआ ने उनके ससुर हेमंत मुखर्जी का हाथ पकड़कर यह इच्छा जताई थी कि वह उनकी शादी देखना चाहती हैं।
परिवार में मौसमी आखिरी लड़की थीं जिसकी शादी बाकी थी, इसलिए परिवार ने इस भावनात्मक कारण को ध्यान में रखते हुए शादी जल्द कराने का फैसला लिया। मौसमी ने बताया कि इस घटना के लगभग एक महीने के अंदर ही उनकी शादी हो गई थी।
मुंबई में नई जिंदगी, डॉलहाउस और अकेलापन
शादी के बाद जब मौसमी मुंबई आईं, तब वह काफी छोटी उम्र की थीं। उन्होंने बताया कि उस समय उनके ससुर ने उनका बहुत ध्यान रखा ताकि उन्हें अकेलापन महसूस न हो। उनके ससुर ने उनके लिए एक डॉलहाउस और एक छोटा पालतू कुत्ता खरीदा था, जिससे वह अपना समय आसानी से बिता सकें।
मौसमी ने कहा कि वह दिनभर डॉलहाउस के साथ खेलती थीं और धीरे-धीरे नए माहौल में खुद को ढालने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता भी उन्हें बहुत प्रोटेक्ट करते थे, और मुंबई में उनके ससुर ने मां और पिता दोनों की तरह उनका ख्याल रखा।
हिंदी और बंगाली सिनेमा की मजबूत पहचान
अपने लंबे करियर में मौसमी चटर्जी ने कई यादगार फिल्में दी हैं। फिल्म ‘अनुराग’ में एक अंधी लड़की का उनका किरदार काफी सराहा गया था। वहीं ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में एक बेबस पत्नी की भूमिका ने भी दर्शकों पर गहरा असर छोड़ा। कॉमेडी फिल्म ‘अंगूर’ में उनका हल्का-फुल्का अंदाज भी खूब पसंद किया गया।
इसके अलावा वह ‘मंजिल’ जैसी फिल्मों में भी नजर आईं। हाल के वर्षों में उन्होंने बंगाली फिल्म ‘आरी’ में काम किया और बॉलीवुड फिल्म ‘पीकू’ में अमिताभ बच्चन और इरफान खान के साथ भी दिखाई दीं, जहां उन्होंने दीपिका पादुकोण की मौसी का किरदार निभाया था।




























