Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया है, जिससे राज्य में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। 234 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, लेकिन कोई भी पार्टी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। ऐसे में विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अब सत्ता की दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे रही है।
सबसे बड़ी पार्टी बनी टीवीके, लेकिन बहुमत से दूर |Tamil Nadu Politics
टीवीके को इस चुनाव में 108 सीटें मिली हैं, जो बहुमत के आंकड़े से सिर्फ 10 कम हैं। यही वजह है कि पार्टी अब सहयोगी दलों की तलाश में जुटी हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ छोटे दल टीवीके को समर्थन दे सकते हैं, हालांकि अभी तक किसी ने औपचारिक घोषणा नहीं की है।
इस बीच, राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने के संकेत दिए हैं, लेकिन इसके साथ एक शर्त भी रखी है। एआईसीसी के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने साफ कहा है कि उनका समर्थन तभी मिलेगा, जब गठबंधन में “संवैधानिक मूल्यों में विश्वास न रखने वाली सांप्रदायिक ताकतों” को शामिल नहीं किया जाएगा।
10 मई की डेडलाइन, बढ़ा संवैधानिक दबाव
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को खत्म हो रहा है। ऐसे में उससे पहले नई सरकार का गठन करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के वकील कृष्णमूर्ति के अनुसार, सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपना अनिवार्य होगा। उन्होंने यह भी बताया कि समय बहुत कम है, इसलिए एक विकल्प यह भी हो सकता है कि विजय पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ लें और फिर 15 दिनों के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित करें। यह संवैधानिक रूप से मान्य प्रक्रिया है और कई राज्यों में पहले भी अपनाई जा चुकी है।
समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज
वरिष्ठ पत्रकार कुपेंद्रन का मानना है कि हालात इतने जटिल नहीं हैं, जितने दिख रहे हैं। उनके मुताबिक, गैर-डीएमके और एआईएडीएमके दलों के पास करीब 11 विधायक हैं, जो टीवीके को समर्थन दे सकते हैं। इनमें कांग्रेस, वीसीके, वामपंथी दल और डीएमडीके के विधायक शामिल हैं।
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार शिवप्रियन का कहना है कि पीएमके और एएमएमके जैसी पार्टियां भी विजय के साथ आ सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डीएमके, एआईएडीएमके या बीजेपी जैसी बड़ी पार्टियों से समर्थन लेना विजय के लिए राजनीतिक रूप से मुश्किल होगा।
गठबंधन की राजनीति और शर्तें
कुपेंद्रन के मुताबिक, विजय पहले ही गठबंधन सरकार की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं और कांग्रेस भी इस दिशा में दबाव बना रही है। अगर विजय बीजेपी के खिलाफ अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के विधायक भी उनका समर्थन कर सकते हैं। हालांकि, मुस्लिम लीग ने फिलहाल डीएमके गठबंधन में बने रहने की बात कही है, जिससे स्थिति थोड़ी उलझी हुई बनी हुई है।
पार्टियों के अलग-अलग सुर
तमिलनाडु कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सेल्वापेरुंधगई ने कहा है कि अंतिम फैसला राहुल गांधी ही करेंगे। वहीं, कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह अभी डीएमके गठबंधन में ही बनी रहेगी और टीवीके से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है।
इसी तरह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने भी डीएमके के साथ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। डीएमडीके नेता प्रेमलता ने भी संकेत दिए हैं कि वे धर्मनिरपेक्ष गठबंधन का हिस्सा बनी रहना चाहती हैं, हालांकि उन्होंने विजय के लिए सकारात्मक भाव भी जताया।
आगे क्या?
तमिलनाडु में सरकार गठन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होने वाले हैं। क्या विजय जरूरी समर्थन जुटाकर सरकार बना पाएंगे, या फिर राज्य में कोई और राजनीतिक समीकरण उभरेगा इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।




























