US Russia geopolitical conflict: दुनिया इस वक्त कई मोर्चों पर बढ़ते तनाव का सामना कर रही है। एक तरफ Iran और United States के बीच खींचतान जारी है, तो दूसरी ओर Russia और Ukraine के बीच युद्ध ने नया मोड़ ले लिया है। हाल ही में रूस की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरियों में से एक पर ड्रोन हमला हुआ है, जिसे यूक्रेन से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि बीते कुछ दिनों में यह चौथा ऐसा हमला है, जिसने रूस की ऊर्जा व्यवस्था को झटका दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये हमले सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे बड़ी रणनीति भी हो सकती है। कुछ विश्लेषकों का दावा है कि इन हमलों के जरिए रूस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तेल ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। इसी बीच Donald Trump और Vladimir Putin के बीच करीब 90 मिनट की बातचीत भी चर्चा में रही, जिसमें दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के संकेत मिले।
रूस पर हुए इन हमलों को लेकर यह भी आशंका जताई जा रही है कि अगर उसकी तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है, क्योंकि रूस को भारत का एक पुराना और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है।
अमेरिका की रणनीति और नई तैयारी | US Russia geopolitical conflict
इस बीच अमेरिका की ओर से भी सैन्य तैयारी तेज करने के संकेत मिल रहे हैं। खबर है कि अमेरिका ‘डार्क ईगल’ जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों की मांग कर रहा है, जिनकी रफ्तार 6000 किमी प्रति घंटे से ज्यादा बताई जाती है। इसे बदलते युद्ध के स्वरूप और बढ़ते खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
पड़ोसी देशों पर भी असर
इस तनाव का असर अब आसपास के देशों में भी दिखने लगा है। खासकर Pakistan में तेल संकट की खबरें सामने आ रही हैं, जहां आपूर्ति को लेकर हाहाकार जैसी स्थिति बताई जा रही है।
ईरान का ‘मास्टर स्ट्रोक’
इसी बीच ईरान ने एक नई रणनीति अपनाते हुए अमेरिका के प्रतिबंधों को चुनौती दी है। जानकारी के मुताबिक, ईरान ने Kazakhstan और Uzbekistan के रास्ते रेल मार्ग से चीन को तेल भेजना शुरू कर दिया है। यह रूट अमेरिका के समुद्री प्रतिबंधों से बाहर है, इसलिए इसे रोक पाना मुश्किल माना जा रहा है।
यह वही योजना है जिस पर साल 2006 से काम चल रहा था और अब यह धीरे-धीरे हकीकत बनती नजर आ रही है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिका-चीन में भी बढ़ी तल्खी
वैश्विक तनाव यहीं नहीं थम रहा। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री और चीन के शीर्ष नेता के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक की खबरें सामने आई हैं। चीन ने साफ तौर पर कहा कि अगर ट्रंप बीजिंग आते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा, लेकिन अपने हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
क्या बढ़ेगा वैश्विक संकट?
कुल मिलाकर, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-ईरान तनाव और चीन-अमेरिका की बढ़ती खींचतान ने दुनिया की सियासत को और जटिल बना दिया है। आने वाले समय में इन घटनाओं का असर तेल बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर साफ दिखाई दे सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इन घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।




























