NASA News: क्या कभी पृथ्वी पर जीवन पूरी तरह खत्म हो सकता है? नासा की एक नई स्टडी ने इस सवाल का ऐसा जवाब दिया है जिसने वैज्ञानिक दुनिया में हलचल मचा दी है। सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन पर आधारित इस रिसर्च के मुताबिक, धरती पर मौजूदा जीवन लगभग 100 करोड़ साल बाद खत्म हो सकता है।
लेकिन इसकी वजह कोई युद्ध, प्रदूषण या इंसानी गलती नहीं होगी, बल्कि खुद सूरज होगा जो समय के साथ धीरे-धीरे ज्यादा गर्म और चमकदार होता जा रहा है। यह अध्ययन नासा के एस्ट्रोबायोलॉजी इंस्टीट्यूट के डेटा पर आधारित है और इसे वैज्ञानिक काजुमी ओजाकी और क्रिस्टोफर टी. रेनहार्ड ने तैयार किया है। यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल Nature Geoscience में प्रकाशित हुई है।
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सूरज बनेगा सबसे बड़ा कारण | NASA News
वैज्ञानिकों के मुताबिक, सूरज हर दिन बहुत धीमी गति से ज्यादा गर्म और चमकीला होता जा रहा है। आने वाले करोड़ों सालों में यह बदलाव इतना बड़ा हो जाएगा कि पृथ्वी का पूरा वातावरण बदल सकता है। स्टडी बताती है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, पृथ्वी का पानी धीरे-धीरे वायुमंडल में पहुंचने लगेगा। इससे ऑक्सीजन बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया पर असर पड़ेगा।
ऑक्सीजन का खत्म होता चक्र
आज पृथ्वी के वातावरण में करीब 20% ऑक्सीजन है, जो पौधों और सूक्ष्म जीवों की वजह से बनी रहती है। लेकिन जब तापमान बढ़ेगा, तो पौधे और सूक्ष्म जीव ठीक से काम नहीं कर पाएंगे। इसके चलते ऑक्सीजन बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी और धीरे-धीरे हवा में ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगेगा। वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि लगभग 100 करोड़ साल बाद यह स्तर 1% से भी नीचे चला जाएगा।
इस स्थिति में इंसान, जानवर और बड़े पौधे जीवित नहीं रह पाएंगे। पृथ्वी पर केवल कुछ सरल बैक्टीरिया जैसे जीव ही बच सकते हैं।
अतीत जैसा लौटेगा माहौल
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह स्थिति पृथ्वी को उसके बहुत पुराने समय जैसा बना सकती है जब वातावरण में ऑक्सीजन बहुत कम थी। करीब 2.5 अरब साल पहले पृथ्वी पर “ग्रेट ऑक्सीडेशन इवेंट” हुआ था, जब पहली बार कुछ जीवों ने ऑक्सीजन बनाना शुरू किया और पृथ्वी का वातावरण बदल गया था। उसी बदलाव ने जटिल जीवन को जन्म दिया। लेकिन नई स्टडी का कहना है कि भविष्य में यह प्रक्रिया उलटी हो सकती है और पृथ्वी फिर से ऑक्सीजन-रहित माहौल की ओर बढ़ सकती है।
सुपरकंप्यूटर ने कैसे निकाला निष्कर्ष
नासा के सुपरकंप्यूटर ने सूरज की चमक, पृथ्वी के मौसम और रासायनिक प्रक्रियाओं को मिलाकर एक लंबा मॉडल तैयार किया। इसी मॉडल से अनुमान लगाया गया कि यह बदलाव लगभग साल 10,00,00,2021 (करीब 100 करोड़ साल बाद) के आसपास हो सकता है। पहले वैज्ञानिक मानते थे कि पृथ्वी पर जीवन लगभग 200 करोड़ साल तक टिक सकता है, लेकिन नए मॉडल ने यह समय घटाकर लगभग आधा कर दिया है।
क्या इंसान के पास बचने का रास्ता है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि 100 करोड़ साल का समय बहुत लंबा है। इस दौरान मानव सभ्यता अगर खुद को तकनीकी रूप से विकसित करती है, तो दो रास्ते हो सकते हैं या तो पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के नए तरीके खोजे जाएं, या फिर इंसान दूसरे ग्रहों पर बसने में सक्षम हो जाए।
दूसरे ग्रहों की खोज में मदद
यह रिसर्च सिर्फ पृथ्वी के भविष्य को समझने के लिए नहीं है, बल्कि इससे दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावना भी समझी जा सकेगी। वैज्ञानिक अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि किन परिस्थितियों में किसी ग्रह पर ऑक्सीजन टिक सकती है और वह कितने समय तक रहने योग्य हो सकता है।





























