Largest supplier of LPG: भारत आज दुनिया के सबसे बड़े LPG (रसोई गैस) उपभोक्ताओं में शामिल है। देश में 33 करोड़ से ज्यादा घरों में LPG सिलेंडर का इस्तेमाल होता है, जिनमें 10 करोड़ से अधिक लोग उज्ज्वला योजना के लाभार्थी हैं। इतनी बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं है, और यही वजह है कि भारत को अपनी गैस जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है।
भारत में LPG की खपत और उत्पादन का हाल (Largest supplier of LPG)
भारत में हर साल करीब 3 करोड़ टन LPG की खपत होती है। लेकिन इसमें से सिर्फ लगभग 40% यानी करीब 1.24 करोड़ टन ही देश के अंदर उत्पादन हो पाता है। बाकी 60% जरूरत आयात के जरिए पूरी करनी पड़ती है।
यानी साफ है कि देश की रसोई काफी हद तक विदेशी गैस पर टिकी हुई है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर आम लोगों की रसोई तक पहुंचता है।
दुनिया में गैस का खजाना किन देशों के पास
अगर बात करें प्राकृतिक गैस के भंडार की, जिससे LPG भी बनती है, तो दुनिया के 50% से ज्यादा भंडार सिर्फ कुछ ही देशों के पास हैं। सबसे ऊपर रूस है, जिसके पास करीब 24% ग्लोबल गैस रिजर्व है। इसके बाद ईरान का नंबर आता है, जहां फारस की खाड़ी का विशाल साउथ पार्स क्षेत्र है। तीसरे नंबर पर कतर है, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड ‘नॉर्थ फील्ड’ है। चौथे नंबर पर तुर्कमेनिस्तान है, जो अपने गाल्किनीश गैस क्षेत्र के लिए जाना जाता है।
अमेरिका भले ही भंडार के मामले में पांचवें नंबर पर है, लेकिन उत्पादन में वह दुनिया में सबसे आगे है, खासकर शेल गैस के कारण। भारत के पास भी कुछ गैस भंडार हैं जैसे कृष्णा-गोदावरी बेसिन, असम, गुजरात और राजस्थान, लेकिन ये देश की जरूरतों के मुकाबले काफी कम हैं। यही वजह है कि भारत अपनी प्राकृतिक गैस का करीब आधा हिस्सा आयात करता है।
LPG उत्पादन में कौन है नंबर वन
LPG उत्पादन की बात करें तो संयुक्त राज्य अमेरिका इस मामले में सबसे आगे है। दुनिया के कुल LPG उत्पादन का 25% से ज्यादा हिस्सा अकेले अमेरिका से आता है। इसके बाद चीन, सऊदी अरब, रूस और कनाडा जैसे देश भी बड़े उत्पादक हैं। भारत भी LPG उत्पादन में टॉप-5 देशों में शामिल है, लेकिन घरेलू मांग इतनी ज्यादा है कि उत्पादन कम पड़ जाता है।
भारत को सबसे ज्यादा LPG कहां से मिलती है
भारत की LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है, और इसमें सबसे बड़ा योगदान कतर का है। भारत अपने कुल LPG आयात का करीब 34% कतर से लेता है। हाल ही में भारत और कतर के बीच 78 अरब डॉलर का बड़ा समझौता हुआ है, जिसके तहत 2048 तक हर साल 75 लाख टन LNG की सप्लाई जारी रहेगी। इसके अलावा भारत संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ओमान, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों से भी गैस आयात करता है।
घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल
भारत में 14 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की हिस्सेदारी करीब 87% है, जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का हिस्सा सिर्फ 13% है। इससे साफ होता है कि गैस का सबसे ज्यादा इस्तेमाल घरों में हो रहा है।
आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश
सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि देश की LPG जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम की जाए। इसी दिशा में घरेलू रिफाइनरियों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है और हाल ही में इसमें करीब 25% की बढ़ोतरी भी हुई है।
हालांकि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसे देखते हुए भारत अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे नए स्रोतों से भी आयात बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है, ताकि सप्लाई सुरक्षित बनी रहे।
