LPG Rule Change: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच जारी टकराव का असर अब भारत की रसोई तक महसूस होने लगा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित होने से एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर देश के गैस बाजार पर पड़ रहा है।
इसी स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी की ‘पैनिक बुकिंग’ और संभावित किल्लत को रोकने के लिए पांच अहम फैसले लिए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार का मकसद जमाखोरी रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि असली उपभोक्ताओं तक गैस समय पर पहुंचे। इन फैसलों का असर गैस सिलेंडर की बुकिंग, डिलीवरी से लेकर नए कनेक्शन तक पर पड़ने वाला है।
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बुकिंग के बीच तय किया गया समय (LPG Rule Change)
सरकार का सबसे बड़ा फैसला एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के अंतराल को लेकर है। अब रसोई गैस की रीफिल बुकिंग के लिए एक तय समय सीमा लागू कर दी गई है। नए नियमों के अनुसार, शहरों में रहने वाले उपभोक्ता एक सिलेंडर लेने के कम से कम 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग कर पाएंगे। वहीं ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों के लिए यह अवधि 45 दिन तय की गई है। सरकार का मानना है कि कई लोग डर के कारण एक साथ ज्यादा सिलेंडर बुक करने लगते हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो जाती है। इसलिए यह कदम उठाया गया है ताकि हर उपभोक्ता को बराबरी से गैस मिल सके। अगर कोई तय समय से पहले बुकिंग करने की कोशिश करेगा तो सिस्टम उस रिक्वेस्ट को स्वीकार नहीं करेगा।
अब डिलीवरी के लिए जरूरी होगा OTP
दूसरा बड़ा बदलाव गैस सिलेंडर की डिलीवरी से जुड़ा है। अब डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड यानी OTP आधारित सिस्टम को और ज्यादा सख्ती से लागू किया जा रहा है। पहले यह व्यवस्था करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं पर लागू थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर लगभग 90 प्रतिशत तक कर दिया गया है।
इसका मतलब है कि जब डिलीवरी बॉय आपके घर गैस सिलेंडर लेकर पहुंचेगा तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा। उसी कोड को बताने के बाद ही डिलीवरी पूरी मानी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध बिक्री को रोकना है। सरकार ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे अपने गैस कनेक्शन के साथ सही मोबाइल नंबर अपडेट जरूर रखें।
कमर्शियल गैस की सप्लाई पर नियंत्रण
तीसरा फैसला कमर्शियल गैस सिलेंडरों को लेकर लिया गया है। होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर फिलहाल सीमित नियंत्रण लगाया गया है। तेल कंपनियां अब व्यवसायिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत मासिक मांग का केवल 20 प्रतिशत ही गैस उपलब्ध कराएंगी। सरकार का कहना है कि अगर कमर्शियल सेक्टर को खुली छूट दी गई तो घरेलू गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसलिए प्राथमिकता घरों में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलेंडरों को दी जा रही है।
PNG वाले घरों के लिए नया नियम
सरकार ने चौथा फैसला पीएनजी और एलपीजी के इस्तेमाल को लेकर लिया है। जिन शहरों में पाइपलाइन के जरिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा पहुंच चुकी है, वहां लोगों को एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
नए नियम के तहत जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन है, उन्हें एलपीजी रिफिल के लिए पहले जैसी प्राथमिकता नहीं मिलेगी। सरकार का मानना है कि अगर शहरों में लोग पाइप वाली गैस का इस्तेमाल ज्यादा करेंगे तो सिलेंडरों की खपत कम होगी और उन्हें उन इलाकों में भेजा जा सकेगा जहां अभी पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
नए कनेक्शन पर सख्त जांच
पांचवां और अंतिम फैसला नए एलपीजी कनेक्शन से जुड़ा है। मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया को थोड़ा धीमा कर दिया गया है। साथ ही, केवाईसी जांच भी पहले से ज्यादा सख्त कर दी गई है।
अब आवेदन करने वालों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच होगी ताकि एक ही पते पर कई गैस कनेक्शन लेने की प्रवृत्ति को रोका जा सके। सरकार का फोकस इस समय मौजूदा उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने पर है।
कुल मिलाकर, सरकार इन सख्त कदमों के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश में घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य बनी रहे और आम लोगों को रसोई गैस के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।
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