Mobile Data Price Hike: अगर आप सोशल मीडिया या OTT प्लेटफॉर्म्स के बड़े शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए चिंता का विषय हो सकती है। इंटरनेट के बढ़ते रिचार्ज प्लान्स और 18% GST से पहले ही परेशान यूजर्स को अब एक और झटका लग सकता है। खबरों के अनुसार सरकार मोबाइल डेटा पर अलग से टैक्स लगाने की योजना पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो हर GB डेटा के हिसाब से टैक्स देना पड़ सकता है, जिससे डेटा की कीमत में भारी वृद्धि होने की संभावना है।
क्या है पूरा मामला (Mobile Data Price Hike)
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस प्रपोजल पर चर्चा की गई थी। सरकार का उद्देश्य है कि इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल ज्यादा “सकारात्मक” कामों के लिए हो। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि दूरसंचार विभाग को इस प्रस्ताव पर अध्ययन कर रिपोर्ट बनाने के लिए सितंबर तक का समय दिया गया है। विभाग को यह बताना होगा कि डेटा पर अलग से टैक्स लगाना व्यावहारिक रूप से संभव है या नहीं और इसके संभावित प्रभाव क्या होंगे।
भारत में अभी इंटरनेट डेटा की कीमत दुनिया में सबसे कम मानी जाती है। यही कारण है कि यहां इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत व्यापक स्तर पर होता है। सरकार का मानना है कि अगर डेटा पर टैक्स लगाया गया तो लोग कम डेटा इस्तेमाल करेंगे और स्क्रीन टाइम घटेगा। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि शिक्षा और मनोरंजन के बीच डेटा उपयोग में अंतर कैसे तय किया जाएगा।
यूजर्स पर दोहरी मार
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण TRAI के पूर्व प्रधान सलाहकार सत्या एन. गुप्ता ने इस प्रस्ताव पर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि डेटा पर नया टैक्स देश में डिजिटल सेवाओं को प्रभावित कर सकता है। डिजिटल इनोवेशन में बाधा आएगी और भारत की वैश्विक डिजिटल प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ेगा। गुप्ता के अनुसार, वर्तमान में मोबाइल रिचार्ज पर 18% GST पहले ही यूजर्स से लिया जाता है। अगर डेटा पर अलग टैक्स भी लागू हुआ तो यूजर्स को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।
सरकार की आमदनी बढ़ेगी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार स्पेक्ट्रम नीलामी और लाइसेंस फीस के अलावा नए आय स्रोतों की तलाश कर रही है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में भारत की मोबाइल डेटा खपत करीब 229 अरब GB थी। अगर हर GB पर केवल 1 रुपये का टैक्स लगाया गया तो सरकार को सीधे 22,900 करोड़ रुपये का फायदा हो सकता है। इससे सरकार के खजाने में वृद्धि तो होगी, लेकिन आम इंटरनेट यूजर्स के लिए खर्च बढ़ जाएगा।
क्या होगा आगे
फिलहाल सरकार ने दूरसंचार विभाग को इस प्रस्ताव के फायदे और नुकसान का अध्ययन करने के लिए कहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। अभी तक सरकार की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन अगर प्रस्ताव लागू हुआ तो मोबाइल और इंटरनेट यूजर्स को महंगे डेटा के साथ नई वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
इस योजना का असर सिर्फ व्यक्तिगत खर्चों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल सेवाओं, OTT प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन शिक्षा पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए इंटरनेट यूजर्स के लिए यह समय सतर्क रहने का है।
और पढ़ें: LPG Gas Cylinder: तेल का सफर… कुएँ से सुपरटैंकर तक, कैसे पहुंचता है ईंधन हमारे घरों में
