Ajab Gajab News: 2,000 साल पुरानी ममियों का CT स्कैन… जो सामने आया, उसने वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया

Nandani | Nedrick News Published: 26 Feb 2026, 09:05 AM | Updated: 26 Feb 2026, 09:05 AM

Ajab Gajab News: दुनिया बदल गई है, लेकिन इंसान की सेहत से जुड़ी परेशानियां शायद उतनी नहीं बदलीं, जितना हम सोचते हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने प्राचीन मिस्र की दो ममियों का जब आधुनिक तकनीक से सीटी स्कैन किया, तो जो रिपोर्ट सामने आई उसने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया।

इन ममियों के नाम हैं नेस-मिन और नेस-होर। जांच में सामने आया कि हजारों साल पहले भी लोग वैसी ही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते थे जैसी आज हम झेल रहे हैं फ्रैक्चर, दांतों की दिक्कतें और बढ़ती उम्र की बीमारियां।

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नेस-मिन: 40 साल की उम्र और कई चोटों के निशान (Ajab Gajab News)

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पहली ममी नेस-मिन की थी, जिसकी मृत्यु करीब 330 ईसा पूर्व मानी जाती है। उस समय उसकी उम्र लगभग 40 साल रही होगी। जब उसका सीटी स्कैन किया गया तो शरीर के अंदर कई चौंकाने वाले संकेत मिले।

रीढ़ की हड्डी में टूटने के सबूत मिले, वहीं पसलियों में फ्रैक्चर के निशान भी पाए गए। इतना ही नहीं, शरीर पर कुछ ऐसे छेद और कट के निशान मिले जो सामान्य या प्राकृतिक नहीं लग रहे थे।

इमेजिंग विभाग की प्रमुख समर डेकर का मानना है कि ये निशान किसी प्राचीन सर्जरी या चिकित्सा हस्तक्षेप की कोशिश हो सकते हैं। यानी संभव है कि उस दौर में भी इलाज या ऑपरेशन जैसा कुछ किया गया हो। अगर यह सही है तो यह प्राचीन चिकित्सा इतिहास के लिए एक बड़ा संकेत हो सकता है।

नेस-होर: 60 साल की उम्र और दांतों की गंभीर समस्या

दूसरी ममी नेस-होर की थी, जिसकी मौत करीब 190 ईसा पूर्व 60 वर्ष की आयु में हुई थी। स्कैन में उसके दांतों की हालत काफी खराब पाई गई। दांतों में गंभीर संक्रमण और घिसाव के संकेत मिले हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे साफ होता है कि हजारों साल पहले भी लोग दांतों की समस्या और उम्र बढ़ने के साथ होने वाले जोड़ों के दर्द जैसी परेशानियों से जूझते थे। यानी आज जिन बीमारियों को हम आधुनिक जीवनशैली से जोड़ते हैं, उनमें से कई समस्याएं प्राचीन काल में भी मौजूद थीं।

बिना छुए किया गया पूरा परीक्षण

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन ममियों को जांच के दौरान छुआ तक नहीं गया। वैज्ञानिकों ने एक शक्तिशाली 320-स्लाइस CT स्कैनर का इस्तेमाल किया, जो 0.5 मिलीमीटर तक की बारीक तस्वीरें ले सकता है।

ममियों को उनके ताबूतों के निचले हिस्से से भी नहीं निकाला गया। मशीन ने वहीं से उनके शरीर का पूरा 3D डिजिटल मॉडल तैयार कर लिया। यह तकनीक बिल्कुल वैसी ही है जैसी अस्पतालों में जीवित मरीजों की जांच के लिए इस्तेमाल की जाती है।

इस वर्चुअल ऑटोप्सी की मदद से वैज्ञानिकों ने कंकाल की बनावट, अंदरूनी अंगों की स्थिति और यहां तक कि शरीर में मौजूद प्राचीन धातुओं या ताबीजों को भी बिना नुकसान पहुंचाए देख लिया।

इतिहास और विज्ञान का अनोखा संगम

इन दोनों ममियों की जांच ने एक बार फिर साबित किया है कि आधुनिक तकनीक इतिहास के गहरे रहस्यों को बिना छेड़छाड़ के सामने ला सकती है। साथ ही यह भी समझ आता है कि इंसानी शरीर और उसकी समस्याएं समय के साथ बहुत ज्यादा नहीं बदलीं।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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