Holi 2026: सावधान! जिन्हें आप खुशियों के रंग समझकर घर ला रहे हैं वे असल में केमिकल और कांच का पाउडर हो सकते हैं। दरअसल क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि आपने भला चाहा और हो गया बुरा? रंगों के बाजार में भी आजकल यही हो रहा है। ऑर्गेनिक के नाम पर सिंथेटिक रंगों का खेल जारी है। अपनी त्वचा और आंखों को सुरक्षित रखने के लिए खरीदारी से पहले इन 4 जरूरी बातों पर गौर करें।
बाजार में असली और नकली दोनों तरह के रंग
होली का त्योहार अब बस कुछ ही दिनों दूर है और बाजार रंग-बिरंगे गुलाल व पिचकारियों से सज चुके हैं। लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन होली के रंग खरीदते समय थोड़ी सावधानी जरूरी है। वजह यह है कि बाजार में असली और नकली दोनों तरह के रंग मिलते हैं और कई बार केमिकल वाले रंगों को भी हर्बल बताकर बेच दिया जाता है, जो स्किन के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। अगर आप भी होली के लिए सुरक्षित और असली गुलाल खरीदना चाहते हैं, तो ये आसान टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं।
बहुत चमकदार रंग से रहें सावधान
अक्सर लोग ज्यादा गहरे और चमकीले रंगों की ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन यही सबसे बड़ी गलती हो सकती है। बहुत ज्यादा चमक वाले रंगों में कांच का पाउडर (Crushed Glass), रेत या हानिकारक सिंथेटिक डाई मिलाई जाती है। यह न सिर्फ आपकी त्वचा पर रैशेज पैदा कर सकते हैं, बल्कि आंखों में जाने पर गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए, केवल मैट फिनिश वाले रंगों को ही प्राथमिकता दें।
छूकर करें रंग की पहचान
गुलाल खरीदते समय उसे हल्का सा छूकर जरूर देखें। अगर रंग बहुत ज्यादा चिकना या बेहद रूखा लगे, तो उसमें सिंथेटिक केमिकल मिलावट हो सकती है। नेचुरल गुलाल का टेक्सचर हल्का और मुलायम होता है, जो हाथों में सहज महसूस होता है।
गंध से भी पहचान संभव
रंग की खुशबू से भी असली-नकली का अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर गुलाल से पेट्रोल, केरोसिन, मोबिल ऑयल या तेज केमिकल जैसी गंध आए, तो उसे खरीदने से बचें। प्राकृतिक रंगों की खुशबू हल्की होती है और ज्यादा तीखी नहीं होती।
पानी में घोलकर करें टेस्ट
अगर संभव हो तो थोड़ा सा रंग पानी में घोलकर देखें। नेचुरल रंग पानी में जल्दी घुल जाते हैं, जबकि केमिकल वाले रंग घुलने में समय लेते हैं या नीचे बैठ जाते हैं। कुल मिलाकर होली पर सुरक्षित खेलने के लिए हर्बल और नेचुरल गुलाल का चुनाव करना सबसे अच्छा विकल्प है। इससे न सिर्फ आपकी स्किन सुरक्षित रहती है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता।
