Raghav Chadha के भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद से ही राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज है। सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर मीम्स की बाढ़ आ गई है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि राघव चड्ढा के लिए ‘आप’ छोड़ना उतना चुनौतीपूर्ण नहीं था, जितना भाजपा में शामिल होने के बाद उठ रहे सवालों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर क्यों उठ रहे सवाल?
राघव चड्ढा (Raghav Chadha ) के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और बयानों की बाढ़ आ गई है। यूजर्स उनके उन पुराने भाषणों को शेयर कर रहे हैं जिनमें वे बीजेपी की कड़ी आलोचना करते थे। कुछ लोग उन्हें अवसरवादी कह रहे हैं, तो कुछ उनके लुक्स और बॉलीवुड कनेक्शन (परिणीति चोपड़ा) को लेकर मीम्स बना रहे हैं। ट्रोलर्स का कहना है कि जो राघव कभी आप का सबसे पढ़ा-लिखा और वफादार चेहरा माने जाते थे, उनका पाला बदलना राजनीति की अनिश्चितता को दर्शाता है।
राज्यसभा सचिवालय ने दी मंजूरी
बता दें कि हाल ही में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसद अब आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं। इस फैसले को राज्यसभा सचिवालय ने मंजूरी दे दी है और इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है।
किरेन रिजिजू ने जानकारी की साझा
केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्यसभा के अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन ने आधिकारिक तौर पर ‘आप’ के सातों सांसदों के भाजपा में विलय को स्वीकार कर लिया है। अब राघव चड्ढा (Raghav Chadha ) के नेतृत्व में संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी भाजपा संसदीय दल के पूर्णकालिक सदस्य बन चुके हैं। रिजिजू ने इन सांसदों के सदन में अब तक के ‘मर्यादित और अनुशासित’ आचरण की भी सराहना की।
Honb’le Chairman Rajya Sabha Shri C.P. Radhakrishnan Ji has accepted the merger of 7 AAP MPs with BJP. Now, Raghav Chadha ji, Sandeep Pathak ji, Ashok Mittal ji, Harbhajan Singh ji, Swati Maliwal ji, Rajinder Gupta ji & Vikramjit Singh Sahney ji are Members of BJP Parliamentary…
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) April 27, 2026
आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इन सातों सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उनका तर्क है कि यह जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है और संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) का उल्लंघन है। संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस फैसले के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और जरूरत पड़ने पर इसे शीर्ष अदालत (Supreme Court) में चुनौती दी जाएगी।
हालांकि, राज्यसभा सचिवालय की आधिकारिक मंजूरी के बाद अब सारी स्थिति साफ हो चुकी है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद सदन में आम आदमी पार्टी की ताकत काफी कम हो गई है और उसके पास अब केवल तीन सांसद—संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल ही बचे हैं। वहीं, भाजपा इन सात नए सदस्यों के साथ उच्च सदन में और भी ज्यादा मजबूत होकर उभरी है।
Raghav Chadha ने आप पर लगाए आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राघव चड्ढा ने एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर ‘आम आदमी पार्टी’ छोड़ने की वजहों का खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पार्टी को उन्होंने खून-पसीने से सींचा, वहां अब ‘टॉक्सिक वर्क एनवायरनमेंट’ बन चुका है और कुछ भ्रष्ट लोगों के हाथ में कमान होने के कारण वहां काम करना असंभव हो गया था।
चड्ढा ने स्पष्ट किया कि उनके सामने राजनीति छोड़ने या सुधार करने जैसे विकल्प थे, लेकिन अंततः उन्होंने 7 सांसदों के साथ मिलकर सकारात्मक राजनीति के लिए भाजपा को चुना। खुद को ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ बताते हुए उन्होंने कहा कि अब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास के लिए समर्पित होकर काम करेंगे।
BJP में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा का पहला वीडियो आया सामने…#RaghavChadha #BJP #AAP #ViralVideo #Nedricknews pic.twitter.com/J0Whooiv4h
— Nedrick News (@nedricknews) April 27, 2026
राजनैतिक विशेषज्ञों की राय
राजनैतिक विशेषज्ञों (Political Experts) का मानना है कि यह कदम केवल एक सामान्य दलबदल नहीं, बल्कि ‘आप’ के भीतर लंबे समय से पनप रहे असंतोष का विस्फोट है। जानकारों के अनुसार, राघव चड्ढा और अन्य सांसदों ने दो-तिहाई बहुमत के साथ पाला बदलकर कानूनी अयोग्यता से बचने की जो रणनीति अपनाई है, वह उनके सोचे-समझे राजनैतिक भविष्य का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि राज्यसभा में भाजपा की बढ़ती संख्या अब सरकार को विवादास्पद बिलों को आसानी से पास कराने की ताकत देगी, जबकि पंजाब में ‘आप’ के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
निश्चित तौर पर इस घटनाक्रम ने न केवल आम आदमी पार्टी को बैकफुट पर धकेल दिया है, बल्कि राज्यसभा में भाजपा को एक नई मजबूती दी है। कुल मिलाकर राघव चड्ढा (Raghav Chadha ) समेत सात सांसदों का यह पाला बदलना केवल एक दलबदल नहीं, बल्कि देश की राजनीति में एक बड़े शक्ति-संतुलन के बदलाव का संकेत है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ‘आप’ की कानूनी चुनौती इस स्थिति को पलट पाएगी या आने वाले समय में पंजाब की राजनीति और विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर इसका कोई स्थायी असर देखने को मिलेगा।



























