बीजेपी ने फिर चौंकाया, आखिर किन वजहों से गुजरात के सीएम बनाए गए रेस में सबसे पीछे रहने वाले Bhupendra Patel?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 13 Sep 2021, 12:00 AM | Updated: 13 Sep 2021, 12:00 AM

गुजरात विधानसभा चुनाव में अभी एक साल से भी ज्यादा का वक्त बचा है। इससे पहले ही राज्य की सियासत उस वक्त से तेज हो गई, जब विजय रुपाणी ने एकाएक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जिससे पता चला कि बीजेपी गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से एक्टिव मोड़ में आ गई है। उत्तराखंड, कर्नाटक के बाद अब चुनाव से पहले बीजेपी ने गुजरात का सीएम भी बदल दिया।

बाजी मार ले गए भूपेंद्र पटेल

वहीं विजय रुपाणी के रिजाइन करने के बाद बीजेपी गुजरात का अगला सीएम किसे बनाएगी, इसको लेकर चर्चाएं तेज होने लगीं। मुख्यमंत्री पद की रेस में नितिन पटेल, मनमुख मंडाविया समेत कई नाम रेस में शामिल थे। लेकिन इस बीच बीजेपी ने एक बार फिर हर किसी को चौंकाते हुए उस चेहरे को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में चुना, जिनका नाम रेस में शामिल भी नहीं था। विधायक दल की बैठक में भूपेंद्र पटेल को गुजरात के नए मुख्यमंत्री के रूप में चुना। वो आज दोपहर को शपथ लेंगे। 

भूपेंद्र पटेल को गुजरात का सीएम बनाना बीजेपी के एक चौंकाने वाले फैसलों में से एक माना जा रहा है। भूपेंद्र पटेल एक लो प्रोफाइल रहते हैं। हालांकि उनकी पाटीदार समाज में अच्छी पकड़ हैं। यही वजह मानी जा रही हैं, उनको गुजरात का मुख्यमंत्री चुनने की।  वो घाटलोडिया सीट से विधायक हैं। उनको पीएम मोदी की करीबी आनंदीबेन पटेल का भी काफी करीबी माना जा रहा हैं। 

पाटीदार समुदाय को साधने की कोशिश 

गुजरात में पाटीदार समुदाय बेहद ताकतवर है। समुदाय की ताकत को इससे ही आका जा सकता है कि ये राज्य की 70 से भी अधिक सीटों पर पकड़ रखता है। पाटीदार या पटेल खुद को भगवान राम का वशंज बताते हैं। वैसे तो पूरे गुजरात में इस समुदाय का प्रभाव है, लेकिन उत्तर गुजरात या सौराष्ट्र में ये आबादी काफी ज्यादा है। आर्थिक और राजनीतिक रूप से ये समुदाय गुजरात में काफी प्रभावशाली है। पहले इस समुदाय के लोग कांग्रेस सपोर्ट थे, लेकिन 1980 के दशक में जब कांग्रेस का फोकस क्षत्रिय, आदिवासी, हरिजन और मुस्लिम समुदाय पर बढ़ गया, तो समर्थक बीजेपी में शिफ्ट होने लगे। 

काम आएगा बीजेपी का पाटीदार कार्ड?

भूपेंद्र पटेल को सीएम बनाकर बीजेपी ने राज्य में पाटीदार कार्ड खेलने की कोशिश की। 2022 चुनावों को लेकर बीजेपी ने पाटीदार समुदाय को रिझाने की कोशिश करते हुए ये एक बड़ा कदम उठाया हैं। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान गुजरात बीजेपी सरकार का कैबिनेट विस्ताीर हुआ, जिसमें 6 पाटीदार नेता शामिल किए गए। वहीं 2021 मोदी कैबिनेट के विस्ता्र में राज्य  के सात नेताओं को जगह मिली। केंद्रीय कैबिनेट के फेरबदल में मनसुख मांडविया और पुरुषोत्तोम रुपाला को राज्यिमंत्री से प्रमोट करते हुए केंद्रीय मंत्री बनाया गया। दोनों ही पाटीदार समुदाय से आते हैं। अब भूपेंद्र पटेल को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने एक तीर से कई निशाने लगा दिए हैं। अब देखने वाली बात तो ये होगी कि इस दांव से 2022 गुजरात चुनाव में बीजेपी को कितना फायदा मिलता है?

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