NEET UG 2026 Exam: NEET पेपर लीक मामले की जांच अब और तेज हो गई है। देशभर में लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस केस में CBI लगातार नए खुलासे कर रही है। गुरुवार को गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को CBI ने राउस एवेन्यू कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को 7 दिनों की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया गया।
अलग-अलग राज्यों से हुई गिरफ्तारियां| NEET UG 2026 Exam
CBI ने इस मामले में जिन आरोपियों को पकड़ा है, वे अलग-अलग राज्यों से हैं। महाराष्ट्र के नासिक से शुभम खैरनार, राजस्थान के जयपुर से मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल को गिरफ्तार किया गया है। वहीं हरियाणा के गुरुग्राम से यश यादव को पकड़ा गया है। इसके अलावा गुरुवार को ही CBI ने पुणे और अहिल्यानगर से दो और लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से एक आरोपी इंजीनियरिंग का छात्र बताया जा रहा है। इस तरह अब तक इस मामले में कुल 7 गिरफ्तारी हो चुकी हैं।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
CBI अब इस पूरे नेटवर्क को समझने में जुटी है कि आखिर पेपर लीक का यह रैकेट कैसे काम कर रहा था। एजेंसी ने NTA दफ्तर जाकर भी कई अहम दस्तावेज और जानकारी जुटाई है। पेपर बनाने से लेकर उसकी छपाई, सुरक्षा और अलग-अलग राज्यों में भेजने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, CBI को अब तक 50 से ज्यादा ऐसे लोगों की जानकारी मिली है जिनकी भूमिका इस पूरे सिस्टम में कहीं न कहीं जुड़ी हो सकती है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनकी जिम्मेदारी पेपर की सुरक्षा और ट्रांसपोर्टेशन की थी।
23 लाख छात्रों का भविष्य सवालों में
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 23 लाख छात्रों के भविष्य का क्या होगा। री-एग्जाम को लेकर NTA में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। एजेंसी नहीं चाहती कि परीक्षा में किसी भी तरह की देरी हो, लेकिन साथ ही सुरक्षा को लेकर कोई समझौता भी नहीं किया जा रहा। सूत्रों के अनुसार नई परीक्षा की तारीख जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट nta.neet.gov.in पर जारी की जा सकती है। संभावना जताई जा रही है कि परीक्षा जून के आखिरी हफ्ते से जुलाई के पहले हफ्ते के बीच कराई जा सकती है।
NTA बना रही फुलप्रूफ सिस्टम
NTA इस बार किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए पूरी तैयारी कर रही है। पेपर तैयार करने की प्रक्रिया को और ज्यादा गोपनीय और मल्टी-लेयर बनाया जा रहा है। प्रश्नपत्र बनाने में NCERT के 11वीं और 12वीं के सिलेबस को आधार बनाया जा रहा है। इसके साथ ही अनुभवी शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों की नई टीम बनाई जा रही है। कठिन और एनालिटिकल सवालों पर खास फोकस किया जा रहा है ताकि पेपर पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय रहे।
डिजिटल सिक्योरिटी और ट्रांसपोर्ट पर खास फोकस
इस बार प्रश्नपत्रों को डिजिटल एन्क्रिप्टेड फॉर्म में प्रिंटिंग प्रेस भेजा जाएगा। ट्रांसपोर्ट के लिए GPS-ट्रैक्ड वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद भी ली जाएगी। खास बात यह है कि छात्रों को री-रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी।
CBI के हाथ लगे अहम डिजिटल सबूत
CBI ने आरोपियों के मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए हैं और उन्हें CFSL जांच के लिए भेजा गया है। एजेंसी अब डिलीट की गई चैट्स, मैसेज और लोकेशन डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही है। साइबर यूनिट इस बात की भी जांच कर रही है कि चैट कब और कहां से भेजी गई थी। इसके अलावा आरोपियों की बैंक डिटेल्स भी खंगाली जा रही हैं ताकि पैसों के लेन-देन का पूरा नेटवर्क सामने आ सके।
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