कंपाउंडर बन गया फर्जी डॉक्टर: खोल डाला अपना अस्पताल, कोरोना मरीजों का भी किया इलाज…फिर ऐसे फूटा भांडा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 14 अप्रैल 2021, 05:30 AM Updated: 14 अप्रैल 2021, 05:30 AM
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कोरोना संक्रमण की सुनामी देश में तहलका मचाने लगी है। कोरोना की दूसरी लहर की स्पीड काफी ज्यादा खतरनाक रूप ले चुकी है। देश में कोरोना के नए मामले रोजाना ही नया रिकॉर्ड बना रहे हैं। बात अगर आज की करें तो देश में 1 लाख 85 हजार के करीब नए केस सामने आए। वहीं एक हजार से ऊपर लोगों ने बीते एक दिन में दम तोड़ा। 

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कोरोना का कहर देखने को मिल रहा है। कई दिनों से 50 हजार से ज्यादा मामले रोजाना ही अकेले इसी राज्य से सामने आ रहे हैं। जहां एक तरफ महामारी का कहर किसी भी तरह कम होने का नाम नहीं ले रहा, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस माहौल में गलत काम करते हुए नजर आ रहे हैं। 

फर्जी डिग्री और नाम से  खोला अस्पताल

महाराष्ट्र के पुणे से एक बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां एक डॉक्टर के नीचे काम करने वाले एक कंपाउंडर खुद ही फर्जी डॉक्टर बन गया। यही नहीं उसने अपना एक 22 बेडों का फर्जी अस्पताल भी खोल लिया। फर्जी डॉक्टर बनकर वो ये फर्जी अस्पताल बीते 2 सालों से चला रहा था। इसके अलावा यहां पर वो कोरोना के मरीजों तक का इलाज कर रहा था। इसके लिए आरोपी शख्स ने कोरोना मरीजों के लिए एक अलग से वार्ड भी बनाया हुआ था। 

ऐसे खुली इस मामले की पोल

पुलिस के मुताबिक शख्स डॉक्टर की फर्जी डिग्री और गलत नाम से इस अस्पताल को चला जा रहा था। उसके इस कारनामे का भंडाफोड़ तब हुआ जब उसने एक शख्स के साथ अस्पताल चलाने के लिए पार्टरनरशिप की। इसके बाद दोनों के बीच पैसों को लेकर कुछ विवाद हुआ और ये मामला पुलिस तक पहुंच गया। 

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जांच शुरू की। तब ये पूरी तरह से खुलकर सामने आया। पुलिस ने बताया कि आरोपी का नाम मेहबूब शेख है। वो डॉक्टर महेश पाटिल के नाम से फर्जी डिग्री के साथ मौर्या हॉस्पिटल चला रहा था। आरोपी ने पुलिस को हिरासत में लिया। वो आरोपी नांदेड का रहने वाला है। 

मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि ये व्यक्ति पहले नांदेड में एक डॉक्टर के पास कपाउंडर के तौर पर काम करता था। उसे उस दौरान ऐसा लगा कि वो भी डॉक्टर का काम कर सकता है। इसके लिए फिर उसने फर्जी तरीके से अस्पताल चलाने का सोचा और इसमें एक शख्स को शामिल किया। इन दोनों के बीच पैसों को लेकर हुए विवाद, तो इस पूरे मामले की पोल खुली। 

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और महाराष्ट्र वैद्यकीय अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ। अब पुलिस फिलहाल इस मामले में ये जांच कर र ही है कि आरोपी ने फेक सर्टिफिकेट और आधार कार्ड समेत अन्य कागज कहां से बनवाए?

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