कश्मीर में हुआ वो आतंकी हमला, जिसको याद कर भावुक हो गए पीएम मोदी…गुलाम नबी आजाद की तारीफों में कही ये बातें…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 09 फ़रवरी 2021, 05:30 AM Updated: 09 फ़रवरी 2021, 05:30 AM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यसभा में भावुक होते हुए नजर आए। दरअसल, मंगलवार को राज्यसभा से जम्मू-कश्मीर के 4 सांसदों को विदाई दी जा रही है, जिसमें कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के साथ शमशेर सिंह, मीर मोहम्मद फैयाज और नाजिर अहमद के नाम शामिल है। इन चारों सांसदों का कार्यकाल पूरा हो गया है।

राज्यसभा से गुलाम नबी आजाद को विदाई देते हुए पीएम मोदी ने उनकी जमकर तारीफ की। साथ में एक घटना को याद करते हुए वो भावुक भी हो गए। उनकी आंखों से आंसू झलक आए। इस दौरान उन्होनें कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को सैल्यूट भी किया।

दरअसल पीएम मोदी राज्यसभा में कश्मीर में हुए एक आतंकी हमले को याद किया। पीएम मोदी ने कहा- ‘जब गुजरात के कुछ यात्री जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में मारे गए तो सबसे पहले गुलाम नबी आजाद का फोन मेरे पास आया था’। पीएम आगे बोले कि ये फोन महज सूचना देने के लिए नहीं था। उस फोन पर गुलाम नबी आजाद के आंसू रुक नहीं रहे थे।’

राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने आगे कहा- ‘उस दौरान देश के रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी थे। उनको मैनें फोन किया और शव को लाने के लिए सेना का हवाई जहाज की मांग की। उस दौरान रात में दोबारा से गुलाम नबी जी का फोन आया। एयरपोर्ट से उन्‍होंने मुझे फोन किया। उन्होनें वैसे चिंता की, जैसे अपने परिवार के सदस्‍य की चिंता करे।’

कांग्रेस नेता की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा- ‘पद और सत्ता तो जिंदगी में आते जाते रहते हैं। उसको कैसे पचाना है वो गुलाम नबी आजाद जी से सीखने को मिलता है। एक मित्र के तौर पर मैं उनका आदर करता हूं।’

प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में ये भी कहा कि उनकी जगह को भर पाना बहुत मुश्किल होगा। क्योंकि गुलाम जी अपने दल के साथ साथ देश और सदन की भी उतनी ही चिंता करते थे। पीएम बोले कि मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि उनकी सौम्‍यता, नम्रता और देश के लिए कुछ कर गुजरने की कामना उनको चैन से नहीं बैठने देगी। वो आगे जो भी दायित्‍व संभालेंगे देश उनसे लाभान्वित होगा। उन्होनें जो भी सेवाएं दी, उसके लिए मैं उनका आदरपूर्वक धन्‍यवाद करता हूं। मेरा व्‍यक्तिगत तौर से उनसे आग्रह है कि अपने मन से मत मानिए कि आप इस सदन का हिस्‍सा नहीं हैं। आप सभी के लिए मेरे द्वार खुले रहेंगे।

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