Indore News latest: इंदौर का ‘भिखारी मुक्त अभियान’, भीख देने वालों को भी मिलेगी सज़ा

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 14 जनवरी 2025, 12:00 AM 🔄 Updated: 14 जनवरी 2025, 12:00 AM
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Indore News latest: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर ने अब ‘भिखारी मुक्त अभियान’ शुरू करके सामाजिक बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 1 जनवरी, 2025 से लागू हुए इस अभियान का उद्देश्य शहर को न केवल भिखारी मुक्त बनाना है, बल्कि भिखारियों का पुनर्वास कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करना भी है।

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भीख मांगने और देने पर प्रतिबंध- Indore News latest

जिला प्रशासन ने शहर में भीख मांगने और देने, दोनों को प्रतिबंधित कर दिया है। प्रशासन के आदेश के अनुसार, किसी सार्वजनिक स्थान पर भीख मांगने वाले या भीख देने वाले पर भारतीय नागरिक संहिता 2023 की धारा 163 (1-2) और धारा 144 के तहत कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल या ₹5,000 का जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है।

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सूचना देने वालों को इनाम

भिखारियों की पहचान के लिए प्रशासन ने एक मोबाइल नंबर जारी किया है। भिखारियों की सही जानकारी देने पर ₹1,000 की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अभियान के दस दिनों में 15 लोगों को इनाम दिया गया है। प्रशासन के अनुसार, यह कदम नागरिकों को जागरूक करने और जिम्मेदारी का एहसास दिलाने के लिए उठाया गया है।

प्रमुख मामले: भिखारियों की सच्चाई उजागर

वहीं, इस अभियान के तहत कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने भिक्षावृत्ति के पीछे की सच्चाई को उजागर किया है।

इंदिरा बाई का मामला

लव कुश चौराहे पर पकड़ी गई इंदिरा बाई साधारण भिखारी नहीं थीं। जांच में पता चला कि उनके पास एक एकड़ जमीन, दो मंजिला मकान, बाइक और स्मार्टफोन था। उन्होंने अपने तीन बच्चों को भी भीख मांगने के काम में लगा रखा था। 45 दिनों में उन्होंने करीब ढाई लाख रुपये भीख मांगकर जुटाए थे। उन्हें गिरफ्तार कर परामर्श के बाद राजस्थान वापस भेज दिया गया।

शकुंतला बाई का मामला

प्रशासन ने शकुंतला बाई से ₹75,000 बरामद किए। उन्हें सेवाधाम आश्रम भेजा गया और बाद में उन्होंने शपथ ली कि वह दोबारा भीख नहीं मांगेंगी।  शकुंतला ने कहा, “मैं मेहनत करके पैसे कमाऊंगी। अब मैंने समझ लिया है कि मेहनत से ही आगे बढ़ा जा सकता है।”

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भिखारियों का पुनर्वास: एक मानवीय पहल

प्रशासन ने भिखारियों को मुख्यधारा में लाने के लिए पुनर्वास केंद्रों में विशेष सुविधाएं प्रदान की हैं। एनजीओ ‘परमपूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसाइटी’ के सहयोग से अब तक 650 बच्चों और 2,500 वयस्कों को पुनर्वास सेवाएं दी गई हैं। इतना ही नहीं भिखारियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा रहा है।  प्रशिक्षित लोगों को मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, अगरबत्ती कारखानों, और हैंडीक्राफ्ट कार्यों में लगाया गया है। कुछ लोगों ने फलों और सब्जियों के ठेले लगाना शुरू किया है। वहीं, वृद्ध और निराश्रित भिखारियों के परिवार से अंडरटेकिंग ली गई है कि वे उनकी देखभाल करेंगे।

शहर की छवि को बेहतर बनाने की कोशिश

इंदौर के खजराना मंदिर, रंजीत हनुमान मंदिर, और अन्य धार्मिक स्थलों पर भिखारियों की उपस्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया। प्रशासन का मानना है कि भिखारियों की भीड़ न केवल पर्यटकों के अनुभव को खराब करती है, बल्कि शहर की छवि को भी प्रभावित करती है। अब तक कई भिखारियों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में भेजा गया है और कुछ को उनके घर लौटाया गया है।

चुनौतियां और समाधान

एनजीओ के अनुसार, भिखारियों को मुख्यधारा में लाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। कई बार टीबी और एचआईवी जैसी बीमारियों से ग्रस्त भिखारी हमला कर देते हैं। अब तक एनजीओ के सदस्यों पर 72 बार हमले हो चुके हैं।

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