Yogendra Mishra Gaurav Garg Dispute: इनकम टैक्स अफसरों की मारपीट का मामला गरमाया, योगेंद्र मिश्रा ने सीएम योगी से की हस्तक्षेप की मांग

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 02 जून 2025, 05:30 AM Updated: 02 जून 2025, 05:30 AM
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Yogendra Mishra Gaurav Garg Dispute: लखनऊ के प्रतिष्ठित प्रत्यक्ष कर भवन में 29 मई को घटित एक घटना ने न केवल आयकर विभाग के भीतर की तनावपूर्ण स्थितियों को उजागर कर दिया है, बल्कि प्रदेश प्रशासन में भी हलचल मचा दी है। इस दिन दो वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी – योगेंद्र मिश्रा और गौरव गर्ग – के बीच हुए विवाद ने हाथापाई का रूप ले लिया। अब यह प्रकरण महज कार्यालयी झगड़ा नहीं रह गया, बल्कि सुरक्षा, न्याय और प्रभाव के दुरुपयोग जैसे कई बड़े सवालों से जुड़ गया है।

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मीटिंग से मारपीट तक का मामला- Yogendra Mishra Gaurav Garg Dispute

मामला तब शुरू हुआ जब एक नियमित मीटिंग के दौरान दोनों अधिकारियों के बीच बहस तेज़ हो गई। योगेंद्र मिश्रा का आरोप है कि गौरव गर्ग ने उन्हें न केवल सार्वजनिक रूप से गाली दी, बल्कि सबके सामने थप्पड़ मारकर अपमानित भी किया। मिश्रा का कहना है कि इस पूरी घटना के सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान उनके पास मौजूद हैं।

दूसरी तरफ, गौरव गर्ग ने आरोप लगाया कि मिश्रा ने उन पर पहले हमला किया और अंगूठी से चेहरा घायल किया। इसके जवाब में उन्होंने ग्लास फेंकने, गला दबाने और पेपरवेट से हमला होने जैसी शिकायतें दर्ज कराईं। दोनों ओर से आरोपों की बौछार के बीच सच क्या है, इसकी जांच अब राजनीतिक और सामाजिक चिंता का विषय बन चुकी है।

सीएम योगी और डीजीपी से सुरक्षा की गुहार

विवाद के बाद योगेंद्र मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस प्रमुख को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने निष्पक्ष जांच और पुलिस सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने इस मामले में गौरव गर्ग की पत्नी आईपीएस अधिकारी रवीना त्यागी की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि वह लखनऊ पुलिस में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच की दिशा मोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

मिश्रा ने मांग की है कि रवीना त्यागी का तत्काल तबादला किया जाए, ताकि जांच में कोई पक्षपात न हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ एक प्रचार अभियान चलाया जा रहा है, जिससे उनकी छवि खराब हो रही है।

नाबालिग बेटी की जासूसी का गंभीर आरोप

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू वह है जो मिश्रा ने अपनी नाबालिग बेटी की सुरक्षा को लेकर उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि घटना के बाद से उनकी बेटी का पीछा किया गया, उसकी तस्वीरें ली गईं, और परिवार को डराने-धमकाने की कोशिशें हुईं।

30 मई को दो पुलिसकर्मियों के बिना सूचना के उनके कानपुर स्थित आवास पर पहुंचने से परिवार में दहशत फैल गई। मिश्रा का कहना है कि उन्होंने पत्नी और बेटी को उन्नाव भेज दिया, लेकिन वहां भी कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं।

पुलिस पर उठे सवाल

पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मिश्रा का कहना है कि उन्होंने 9 पेज की विस्तृत शिकायत और 4 जरूरी दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं, बावजूद इसके पुलिस की कार्रवाई एकतरफा दिख रही है। इससे यह आशंका और भी गहरी हो गई है कि मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव हो सकता है।

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