क्या Journalist Rajiv Pratap की मौत सच में हादसा थी या कुछ और? भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की मिली सज़ा?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 29 सितम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 29 सितम्बर 2025, 05:30 AM
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Journalist Rajiv Pratap: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के जाने-माने स्वतंत्र पत्रकार राजीव प्रताप का शव रविवार को जोशियाड़ा बैराज से बरामद कर लिया गया। राजीव पिछले दस दिनों से लापता थे। उनके लापता होने के बाद से कहा जा रहा था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं। पुलिस और बचाव दल ने मिलकर उनकी तलाश में कई दिनों तक कड़ी मेहनत की। अब उनके शव मिलने के बाद परिवार और प्रशासन दोनों इस मौत की गहराई से जांच करने पर जोर दे रहे हैं।

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लापता होने का रहस्य: 18 सितंबर की रात का सच- Journalist Rajiv Pratap

खबरों की मानें तो, राजीव प्रताप 18 सितंबर की रात अपने एक दोस्त सोबन सिंह की कार लेकर ज्ञानसू से गंगोरी की तरफ निकले थे। उनकी आखिरी बार कार में स्यूणा गांव के पास भागीरथी नदी के पास देखा गया था। अगली सुबह जब वे घर वापस नहीं लौटे, तो परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। 19 सितंबर को पुलिस को सोबन सिंह की कार नदी के बीच क्षतिग्रस्त हालत में मिली, लेकिन कार के अंदर राजीव का कोई सुराग नहीं था। इस घटना ने परिवार के साथ-साथ पुलिस को भी चिंतित कर दिया और गुमशुदगी की तहरीर दर्ज कराई गई।

खोजबीन में जुटी पुलिस और बचाव दल

राजीव की तलाश में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, क्यूआरटी, और स्थानीय पुलिस टीम ने गंगोरी से लेकर चिन्यालीसौड़ तक भागीरथी नदी में सर्च अभियान चलाया। साथ ही, आसपास के CCTV फुटेज भी खंगाले गए, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। परिवार ने अधिकारियों से गुहार लगाई कि राजीव के खिलाफ इस इलाके में दुश्मनी रखने वाले कई लोग हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और खोजबीन में तेजी लाने की जरूरत है।

शव बरामदगी और पोस्टमार्टम

10 दिन की खोजबीन के बाद, रविवार की सुबह जोशियाड़ा बैराज के पास एक शव मिला। बचाव टीम ने नदी से शव को बाहर निकालकर पुलिस को सौंप दिया। शव की पहचान जिला अस्पताल में परिजनों ने की। इसके बाद सोमवार को केदार घाट पर राजीव का अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शव की पहचान हो चुकी है, लेकिन मौत के कारणों का पता लगाना अभी बाकी है।

मौत के पीछे क्या था सच?

राजीव की पत्नी मुस्कान ने बताया कि 16 सितंबर की रात लगभग 11 बजे उनकी आखिरी बातचीत हुई थी। उस दिन राजीव अस्पताल और एक स्कूल से जुड़ी रिपोर्टें अपलोड कर रहे थे, जिनसे जुड़ी अनियमितताओं की उन्होंने जानकारी साझा की थी। मुस्कान ने यह भी बताया कि वीडियो न हटाने पर उन्हें जान से मारने की धमकी मिली थी। उनका आखिरी मैसेज 11:50 बजे तक डिलीवर नहीं हुआ, जो इस मामले को और ज्यादा पेचीदा बनाता है।

पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच जारी

पुलिस का कहना है कि यह घटना एक सड़क हादसा हो सकता है, क्योंकि कार नदी में मिली और शव भी उसी इलाके से बरामद हुआ। हालांकि, परिवार अभी भी हत्या और अपहरण की आशंका जताए हुए है। स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि मामले की गहन और निष्पक्ष जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर गहरा शोक जताया है और कहा है कि राजीव प्रताप की मौत की पूरी, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने भी अपने संदेश में संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

राजीव प्रताप कौन थे?

राजीव प्रताप उत्तराखंड के एक प्रतिष्ठित डिजिटल पत्रकार थे और उन्होंने IIMC दिल्ली से पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की थी। वे “Delhi Uttarakhand Live” नामक डिजिटल चैनल के संस्थापक थे। वे स्थानीय स्तर पर अस्पतालों और सरकारी संस्थानों में चल रही अनियमितताओं की खबरें उजागर करते थे। उनके निधन से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

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